Alcohol : शराब पीने के बाद आखि‍र कैसे और क्‍यों अंग्रेजी बोलने लगते हैं लोग? जानिए क्या है कारण

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देखा जाता है कि शराब पीने के बाद लोगों के बोलचाल और व्यव्हार में कई अंतर आता है। कोई कुछ भी बोलने लगता है तो कोई उल्टी सीधी हरकतें करने लगता है। आपने ये भी गौर किया होगा कि शराब पीने के बाद जिन्हें अंग्रेजी का ज्ञान नहीं वो भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने लगते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक थोड़ी सी शराब पीने से नई भाषा बोलने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

शराब का सेवन करना पीना सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। अगर आप किसी दूसरी भाषा में बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा। सही शब्द आपको मुश्किल से मिलेंगे और उनका ठीक से उच्चारण करना भी चुनौती जैसा लगेगा। लेकिन अगर आप थोड़ी सी शराब पी लें तो उस दूसरी भाषा के शब्द अपने आप मुंह से धारा प्रवाह निकलेंगे।

फिल्म ‘शोले’ में वीरू के टंकी पर चढ़ने के बाद बोले गए ‘चक्की पीसिंग एंड पीसिंग एंड पीसिंग’ को कौन भूल सकता है? पीने के बाद बहुत से लोगों के अंदर का वीरू बाहर आने लगता है।

साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक शोध के मुताबिक, थोड़ी सी शराब पीने के बाद जो नशा होता है वो दूसरी भाषा को बोलने में मददगार साबित होता है।

अगर हिंदी आपकी मातृभाषा है और अंग्रेजी आपकी दूसरी भाषा है तो बहुत बार आप किसी के सामने अंग्रेजी बोलने में संकोच कर जाते हैं कि कहीं गलती न हो जाए। जो लोग एक नई भाषा सीखने में डरते हैं उन्हें शराब वो नई भाषा बोलने और सीखने में मदद करती है।

लेकिन दूसरी तरफ, शराब को नकारात्मक रूप से स्मृति और ध्यान को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। यह अतिसंवेदनशीलता और आत्म-मूल्यांकन भी करने को मजबूर करती है। तो क्या लोग वास्तव में पीने के बाद अंग्रेजी या और विदेशी भाषाएं बोलते हैं, या यह सिर्फ बोलने के लिए जिस हिम्मत या कॉन्फिडेंस की ज़रूरत होती है उसकी बात है ?

शराब को लेकर कोई अंदाज़े की बात नहीं है बल्कि इसे लेकर एक अध्ययन आया है। साइंस मैगज़ीन ‘जर्नल ऑफ़ साइकोफ़ार्माकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक थोड़ी सी शराब किसी दूसरी भाषा में बोलने में मदद करती है।

ये भी सही है कि शराब हमारी याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर असर डालती है और इस लिहाज से ये एक बाधा है। लेकिन दूसरी तरफ ये हमारी हिचकिचाहट भी दूर करती है, हमारा आत्म-विश्वास बढ़ाती है और सामाजिक व्यवहार में संकोच कम करती है।

जब हम किसी दूसरे शख्स से मिलते हैं और बात करते हैं तो इन सब बातों का असर हमारी भाषाई क्षमता पर पड़ता है। यह विचार अब तक बिना किसी वैज्ञानिक आधार के ही स्वीकार किया जाता था।

-Agency

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