An issue in the Jharkhand assembly session : सत्ता पक्ष को जो पाना था उसने पा लिया, कांग्रेस तो बेचारी हो गई, लेकिन भाजपा का पलड़ा भारी रहा

राजीव मिश्र

एक धर्म विशेष को खुश करने के लिए झारखंड विधानसभा के छोटा से 5 दिवसीय मानसून सत्र की बलि चढ़ाने के बाद सरकार नतमस्तक की मुद्रा में दिख रही है। हालांकि, भाजपा को तत्काल क्रेडिट न मिले, इसलिए मामले को लंबा खींच दिया है। भाजपा के दबाव में हेमंत सरकार की तय स्ट्रेटजी के तहत गुरुवार को विशेष नमाज कक्ष के मुद्दे पर झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय सर्वदलीय कमेटी गठित कर दी गई। इसमें भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा सहित प्रदीप यादव, सरफराज अहमद, बिनोद सिंह, लंबोदर महतो और दीपिका पांडेय सिंह सदस्य हैं। समिति डेढ़ महीने में रिपोर्ट देगी। स्पीकर ने सफाई भी दी। कहा, यह गतिरोध का विषय नहीं था, बावजूद सभी सदस्यों की राय पर सर्वदलीय समिति बनायी गई है। अब लोगों का मानना है कि यह काम सत्र के पहले दिन भी हो सकता था। इससे इन पांचों दिनों का राज्यहित में उपयोग होता। लेकिन, वोट जो न कराए। हालांकि, इस मामले में सत्ता को जो साधना था उसने साध लिया, पर भाजपा का पलड़ा भारी रहा।

संभवतया देश का पहला मामला है कि विधानसभा भवन में नमाज के लिए विशेष कक्ष के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा से आने वाले स्पीकर रवींद्र नाथ महतो के आदेश से अधिसूचना जारी हुई। इस पर जमकर राजनीति हुई। विपक्षी दल भाजपा ने इसका पुरजोर विरोध किया। इस मुद्दे पर भले ही लोगों को झामुमो-कांग्रेस और राजद की धर्मनिरपेक्ष सरकार अभी बैकफुट पर नजर आ रही हो, लेकिन सच ये भी है कि हेमंत सोरेन सरकार अपनी तुष्टिकरण की राजनीति में सफल रही। उसे जो साधना था, साध लिया। हालांकि, विपक्ष भी पीछे नहीं रहा। भाजपा ने अवसर को समझा और उसे लपककर कैश कर लिया। सत्ता और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी राजनीति में सफल रहे, लेकिन पलड़ा भाजपा का भारी रहा।

गांव-गांव में चर्चा होने लगी कि हेमंत सोरेन ने विधानसभा में मस्जिद बनवा दी। इसका फायदा झामुमो और भाजपा के खाते में गया। बीच में सिर्फ मारी गई तो बेचारी कांग्रेस। कहीं की नहीं रही। उसके नेता छटपटा के रह गये।

हालांकि #इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने थोड़ी-बहुत भरपाई की। उन्होंने हिम्मत दिखाई। मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण लोगों के बीच हिंदू विरोधी छवि वाली #कांग्रेस पार्टी की लीक लाइन से अलग हटकर स्टैंड लिया। गरम मामले के बीच लगे हाथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कह डाला कि झारखंड विधानसभा स्पीकर के आदेश से गलत नोटिफिकेशन जारी किया गया है जिसमें नमाज पढ़ने के लिए एक अलग कमरा आवंटित किया गया है। उनको नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए था कि सभी धर्मों के लिए, अध्यात्म के लिए एक कमरा आवंटित किया जाता है। झारखंड राज्य में दुर्भाग्य की बात है कि यहां की राजनीतिक संस्कृति खराब हो गई है। उन्होंने कहा, मै विधानसभा स्पीकर से मांग करता हूं कि नोटिफिकेशन को संशोधित कर नमाज के लिए जो कमरा आवंटित किया गया है उस कमरे को हर व्यक्ति के लिए खोला जाए, क्योंकि सरकारी संपत्ति और भवनों का उपयोग सबके लिए समान्य रूप से किया जाना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता त्रिपाठी के बयान को आम लोगों ने सराहा। कहा, केएन त्रिपाठी ने स्थिति की नजाकत को समझा और जनता के बीच एक सकारात्मक धर्मनिरपेक्ष संदेश दे दिया।

हालांकि, बात यहीं नहीं रुकती है। सत्र के अंतिम दिन आज सत्ता पक्ष ने जो लचीला रुख अपनाया और जिस तरह झुकते नजर आया, अगर वह पहले ही ऐसा कर लेता तो पांच दिनों के सत्र के लिए खर्च हुए जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये का सदुपयोग हो पाता। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो अगर भाजपा की जायज मांग पर नमाज के लिए आवंटित विशेष कक्ष की अधिसूचना रद्द कर देते या सभी धर्मों के लिए उस कक्ष को खोलने की इजाजत देते या सभी धर्मों के लिए अलग-अलग कमरे उपलब्ध कराने की एक और अधिसूचना जारी करवा देते तो सरकार की इज्जत भी बच जाती। साथ ही एक धर्म विशेष को खुश करने के आरोप भी नहीं लगते और तुष्टिकरण की नीति की पोल भी नहीं खुलती। लेकिन, हेमंत सरकार की मंशा तो कुछ और ही थी। वह जो संदेश देना चाहती थी, उसे दे दिया।

लेकिन, भाजपा भी इसमें पीछे नहीं रही। उसने इस मुद्दे को लपक लिया। इससे पार्टी को दोहरा लाभ हुआ। नमाज के लिए विशेष कक्ष और #नियोजननीति बदलने के विरोध के बहाने अलग-अलग खेमों में बंटी भाजपा के दिग्गज नेता एक मंच पर आये और एकजुटता दिखाई। विधानसभा के अंदर भाजपा विधायक सरकार को नतमस्तक करने और बाहर प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश इसे जन आंदोलन में बदलने में सफल रहे। विधानसभा के अंदर विधायक झाल-मंजीरे के साथ श्री हनुमान चालीसा का पाठ और भजन-कीर्तन कर रहे थे तो बाहर दीपक प्रकाश पांच दिवसीय आंदोलन की रूपरेखा खींच रहे थे और भाजपा के आंदोलन ने रंग भी दिखाया। विधानसभा परिसर से बाहर निकल कर पूरे प्रदेश में फैल गया। जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी रांची में प्रदर्शन होने लगे। नतीजा हुआ कि आस्था और रोजगार के मुद्दे ने भाजपा के नेतृत्व में आस्था के जन आंदोलन का रूप ले लिया। साथ ही सत्ता गंवाने के बाद इस पौने दो साल में शायद यह पहला अवसर था कि भाजपा के सभी खेमों को प्रदेश अध्यक्ष एक साथ लाने में सफल रहे।

  • सरफराजअहमद को जानकारी का अभाव, हमारे कार्यकाल में नहीं आवंटित हुआ कक्षः बाबूलाल मरांडी

आज सदन में प्रस्ताव लाने के दौरान झामुमो विधायक सरफराज अहमद ने कहा कि जब झारखंड बना था तो झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी ऐसे ही कक्ष का आवंटन किया था। उसी परंपरा का निर्वहन इस बार भी हुआ है। इस पर तत्काल झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरफराज अहमद को जानकारी का अभाव है। हमारे कार्यकाल में ऐसे किसी कक्ष का आवंटन नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, हम #सेकुलर स्टेट हैं, कोई मजहबी स्टेट नहीं हैं। इसलिए हमारा संविधान इजाजत नहीं देता कि विधानसभा में नमाज के लिए विशेष कक्ष की अधिसूचना जारी की जाये। इसके अलावा भाजपा ने सत्ताधारी दलों को नमाज के लिए आवंटित विशेष कक्ष का किसी विधानसभा का नोटिफिकेशन दिखाने को कहा, लेकिन वे नहीं दिखा पाये।

फेसबुक से साभार

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