Arjun Munda : जनजातियों के विकास के लिए संकल्पबद्ध होना जरूरी: मुंडा

नयी दिल्ली : केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने गुरुवार को कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आदिवासियों के साथ संवाद और संपर्क बढ़ाकर उनके विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता है जिससे स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर आदिवासी समाज किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहे।

श्री मुंडा ने यहां जनजाति समुदाय के लिए अनेक कार्यक्रमों का शुभारंभ करने के बाद कहा,“ जनजातियों के बीच संपर्क, संंबंध, संवाद और समृद्धि के संकल्प के साथ यदि हम आगे बढ़ेंगे तो निश्चित रूप से 25 वर्ष बाद आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आदिवासी समुदाय खुशहाल होने के साथ ही हर क्षेत्र में सभी के संग कदम से कदम मिलाकर चल सकेगा। हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसे प्रयास करें जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग पिछड़ न जायें।”

उन्होंने कोविड टीकाकरण अभियान में जनजातीय समाज की भागीदारी पर संतोष जताते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के पांच करोड़ लोगों को कोरोना टीके लगाये जा चुके हैं और यह कार्यक्रम जारी है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज में टीकाकरण अभियान को पूर्णरूप से सफल करना है। कोरोना वायरस के नये रूप ओमिक्रॉन को लेकर सतर्क रहने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि टीकाकरण कार्य को भी एक संकल्प के रूप में पूरा करना होगा।

इससे पहले जनजातियों के उत्थान के लिए भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लि (ट्राईफेड) वन धन क्रॉनिकल का लोकार्पण, 14 शहद किसान उत्पादन संगठनों का उद्घाटन, लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) पोर्टल का लोकार्पण और ‘जनजातीय संवाद नेटवर्क’ पर यूनिसेफ तथा ट्राइफेड के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किये गये।

श्री मुंडा ने ट्राईफेड वन धन क्रॉनिकल जैसी इन सभी उल्लेखनीय कार्यक्रमों का लोकार्पण करते हुए कहा कि उन्हें इस मौके पर बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि ट्राईफेड की ओर से शुरू की गयी गतिविधियों के बारे में संवाद करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि व्यापक प्रबंधन सूचना प्रणाली का शुभारंभ भी खरीद आंकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड आदिवासी लोगों के सशक्तीकरण के लिए कई उल्लेखनीय कार्यक्रम चला रहा है। दो वर्ष की अल्प अवधि में इसने 27 राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों में 3110 वन धन विकास केन्द्र समूहों में शामिल 52976 वन धन स्वयं सहायता समूहों को स्वीकृति प्रदान की है।

वार्ता

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