विश्वसनीय और जवाबदेह हो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारत बने इसका वैश्विक हब : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, 05 अक्टूबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि इंसान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकता है लेकिन इसे विश्वसनीय और जवाबदेह बनाना बेहद जरूरी है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि इंसानी बुद्धिमत्ता हमेशा कृत्रिम से कुछ कदम आगे रहे और यह हमारी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करे।

इस वर्जुअल सम्मेलन का आयोजन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा नीति आयोग 5 से 9 अक्टूबर के बीच कर रहा है। इसका विषय ‘सामाजिक सशक्तिकरण के लिए जवाबदेह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (रेज)-2020′ है। सोमवार को वर्चुअल शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि एआई का उपयोग सही दिशा में हो। इस पर विश्वास बनाए रखने के लिए एल्गोरिदम पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। हमें एआई को किसी व्यक्ति या गैर सरकारी समूह के हथियार के तौर पर इस्तेमाल से दुनिया की रक्षा करनी चाहिए।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि मनुष्य की रचनात्मकता और मानवीय भावनायें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से हमेशा आगे रहेंगी। यह हमारी ताकत है। हम चाहते हैं कि भारत एआई का वैश्विक हब (केन्द्र ) बने। कई भारतीय पहले से इस दिशा में काम कर रहे हैं और उन्हें आशा है कि आने वाले समय कई और भारतीय भी इसमें जुड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भारत में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बड़ी है और लोगों को आसानी से सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। उनकी सरकार चाहती है कि कृषि, स्वास्थ्य, अगली पीढ़ी के शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण और आपदा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत बनाने में इसका इस्तेमाल हो।

अपनी सरकार के डिजिटल कार्यक्रम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अपनाया है। यह प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा और शिक्षा के प्रमुख भाग के रूप में कौशल पर केंद्रित है। ई-पाठ्यक्रम विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में भी विकसित किया जाएगा। मोदी ने कहा कि हमने इस वर्ष अप्रैल में ‘यूथ के लिए जिम्मेदार एआई’ लॉन्च किया। इस कार्यक्रम के तहत, स्कूलों के 11,000 से अधिक छात्रों ने बुनियादी पाठ्यक्रम पूरा किया। वे अब अपनी एआई परियोजनाओं का निर्माण कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम का गठन किया जा रहा है। यह डिजिटल बुनियादी ढांचे, डिजिटल सामग्री और क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक ई-शिक्षा इकाई का निर्माण करेगा।

इस दौरान इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री देश में प्रशासन को एआई से बेहतर करने के प्रयासों में लगे हुए हैं। स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवा क्षेत्र में इसका प्रयोग किया जाने लगा है। हम प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के माध्यम से गरीबों का पैसा उनके खाते में सीधे पहुंचा रहे हैं। एआई में विकास, समानता और पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हम चाहते हैं कि डिजिटल इंडिया से सर्व समावेशी तंत्र विकसित हो।

(हि.स.)

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