Assam Assembly Election Update : हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट माजुली से चुनाव मैदान में उतरेंगे सोनोवाल

गुवाहाटी, 03 मार्च । तीन चरणों में होने जा रहे असम विधानसभा चुनाव में माजुली (एसटी) सीट को लेकर इन दिनों इसलिए काफी चर्चाएं हो रही हैं क्योंकि इस सीट से फिर एक बार वर्तमान मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, अभी तक किसी भी बड़े राजनीतिक दल की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है लेकिन इसके बावजूद माजुली से फिर एक बार सोनोवाल का चुनाव मैदान में उतरना तय माना जा रहा है।

राज्य में विधानसभा की कुल 126 सीटें हैं। राज्य की प्रमुख हाई प्रोफाइल विस सीटों में माजुली का नाम भी शामिल हो गया है। इस सीट से राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल केंद्रीय मंत्री रहते हुए 2016 के विधानसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल किया था। सोनोवाल ने इस सीट से पहली बार 2016 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। हालांकि, इससे पहले यह सीट असम गण परिषद (अगप) और कांग्रेस के खाते में जाती रही है।

अब देखना होगा कि 2021 के चुनाव में यह सीट किसके खाते में जाती है। माना जा रहा है कि इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच में ही रहने वाला है। हालांकि, राज्य की नव गठित पार्टी राइजर दल और असम जातीय परिषद भी गठबंधन के तहत यहां से अपना उम्मीदवार उतारेंगी। इसके बावजूद मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता दिखाई दे रहा है। इस सीट से मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने के कारण लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ गयी है।

माजुली विधानसभा का निर्वाचन क्षेत्र संख्या 99 है। यह लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 2016 के चुनाव में जालुकबारी में 1,14,572 पंजीकृत मतदाता थे। इस बार यह संख्या कुछ अधिक रहने वाली है। माजुली ब्रह्मपुत्र नद के बीचों-बीच स्थित है। माजुली को विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप के रूप में पहचान मिली है। इसे वैष्ण धर्म का प्राण केंद्र भी कहा जाता है।

यहां पर कुल 22 सत्र (मठ) हैं। 15वीं शताब्दी में पहले सत्र की स्थापना होने के प्रमाण मिलते हैं। 2016 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद माजुली को जिला घोषित किया गया। जिले में दो ब्लाक, 20 पंचायत व 246 गांव हैं। यहां पर जनजाति व गैर जनजातियां पर निवास करती हैं। जनजातियों में मिसिंग, देउरी, सोनोवाल कछारी शामिल हैं। अनुसूचित जाति की कैवर्त, बनिया आदि के साथ ही गैर जनजाति में कोच, कलिता, आहोम, चुतिया (चुतिया), केवट, योगी आदि शामिल हैं। माजुली में सबसे अधिक मिसिंग जनजातियां पायी जाती हैं।

माजुली विधानसभा वर्ष 1962 में अस्तित्व में आई थी। पहली बार यहां से कांग्रेसी उम्मीदवार मालचंद्र पेगु ने 1962 में जीत हासिल की थी। इसके बाद 1967 में मालचंद्र पेगु निर्दलीय के रूप में चुनाव जीते। 1972 में फिर से पेगु कांग्रेस के टिकट पर जीते, 1978 में जनता पार्टी, 1985 में निर्दलीय पदमेश्वर दौले, 1991, 1996 और 2000 पदमेश्वर दौले ने अगप के टिकट पर चुनाव जीता। इस बीच 2001, 2006, 2011 में कांग्रेस के टिकट पर राजीब लोचन पेगु ने एकतरफा जीत हासिल की। उसके बाद 2016 के चुनावों में लगातार जीत हासिल करने वाले राजीब लोचन पेगु को सर्वानंद सोनोवाल ने कड़ी टक्कर देते हुए मात देते हुए भाजपा का ध्वज लहरा दिया।

माजुली विस सीट से 2011 में जीत हासिल करने वाले राजीब लोचन पेगु ने 39,655 मत प्राप्त कर निर्दलीय उम्मीदवार पदमेश्वर दौले को हरा दिया था। 2011 में भाजपा 2,500 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रही। 2016 में सर्वानंद सोनोवाल ने 49,602 मत प्राप्त कर कांग्रेसी उम्मीदवार राजीब लोचन पेगु को मात दी। पेगु को 30,689 मत मिले थे और सोनोवाल ने 18,923 मतों से पेगु को हराकर कांग्रेस के दबदबे को उखाड़ फेंका। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनते ही सर्वानंद सोनोवाल ने माजुली को पूर्ण जिला का दर्ज देते हुए माजुली में अपना मजबूत आधार बनाया।

भाजपा माजुली में एक बार फिर से जीत हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। हालांकि कांग्रेस और नयी पार्टियां भी भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में जुट गयी हैं। नदी द्वीप माजुली में भूमि से कटे होने के कारण यहां पर कई तरह की चुनौतियां हैं। मुख्य रूप से यातायात और स्वास्थ्य की। प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ से भी माजुली को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। माजुली को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने को लेकर भी लंबे समय से राजनीति होती आ रही है। अब देखना होगा कि इस बार के चुनाव में माजुली की जनता किसके साथ खड़ी होती है।

(हि.स.)

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