Assembly Election Results : बंगाल में टीएमसी की जीत की हैट्रिक, असम में भाजपा तो केरल में वाम मोर्चे की सत्ता बरकरार


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नई दिल्ली/कोलकाता: चार राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव नतीजे रविवार को घोषित हो गए। तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, असम और केरल में सत्ता विरोधी फैक्टर को मतदाताओं ने ठेंगा दिखा दिया।

कोविड प्रोटोकॉल के चलते धीमी गति से हो रही मतगणना के कारण देर रात तक आए परिणामों के बीच पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को अपने बागी सुवेंदु अधिकारी से नंदीग्राम सीट पर पटखनी खानी पड़ी। लेकिन अन्य सीटों पर आए मजबूत रुझानों में ममता की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस ने तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए जीत की हैट्रिक लगाकर इस दर्द पर मरहम लगा दिया।
वहीं असम में भाजपा भी अपनी सत्ता बरकरार रखने में सफल रही, जबकि केरल में अपनी सत्ता बचाकर वाम मोर्चे ने राज्य में हर पांच साल में परिवर्तन की परंपरा पर विराम लगाने का इतिहास रचा। तमिलनाडु में द्रमुक की अगुआई वाले विपक्षी गठबंधन और पुडुचेरी में विपक्षी एनडीए को सत्ता देकर मतदाताओं ने परिवर्तन का बिगुल बजाया।

इन चुनावों में जहां भाजपा की पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करने की आस अधूरी रह गई, वहीं दक्षिणी राज्यों में भी उसके कद बड़ा करने की मनोकामना पूरी नहीं हो सकी। इन चुनावों में अंतर्द्वंद्व से जूझ रही कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा है।

कांग्रेस को पुडुचेरी में सत्ता गंवानी पड़ी, तो उसकी असम और केरल में सत्ता में वापसी के उसके अरमानों पर भी ग्रहण लग गया। पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधन को पश्चिम बंगाल में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि तमिलनाडु में द्रमुक के पक्ष में चली लहर का लाभ उसकी सहयोगी के तौर पर कांग्रेस को भी मिला। दूसरी तरफ जीत की हैट्रिक के साथ ही ममता राष्ट्रीय राजनीति में भी अपना सियासी कद बड़ा करने में कामयाब रही हैं।
बंगाल में ममता का जादू कायम
इस चुनाव में देश की हर चौपाल पर सबकी निगाहें पश्चिम बंगाल पर थी। राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को प्रचार में उतारने समेत अपनी सारी ताकत झोंक दी थी।

इसके बावजूद सत्तारूढ़ टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी पुराना प्रदर्शन दुहराते हुए जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रही। देर शाम तक सामने आए परिणामों में टीएमसी ने 292 में से बहुमत के लिए आवश्यक 147 की जादुई संख्या से कहीं ज्यादा 202 सीट हासिल की, जबकि भाजपा तमाम कोशिशों के बावजूद 81 सीटों तक सिमटकर तीन अंकों से भी दूर रह गई।

भाजपा को 38.7 फीसदी, जबकि टीएमसी को 48.3 फीसदी वोट मिले। सबसे बड़ा आश्चर्य बंगाल में कई दशक तक लगातार सत्ता में रहे वाम दलों और कांग्रेस का तकरीबन पूरी तरह सफाया हो जाना भी रहा है।

असम ने दी भाजपा को मुस्कुराहट
पश्चिम बंगाल और केरल की तरह असम में भी मतदाताओं ने सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए पर ही भरोसा जताया। पश्चिम बंगाल में हार के दर्द के बीच असम ने भाजपा को मुस्कुराने का मौका दिया।

हालांकि बीते विधानसभा चुनाव के मुकाबले भले ही भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की सीटों में कमी आई, लेकिन कांग्रेस की अगुवाई में बने बड़े गठबंधन की 46 सीटों के मुकाबले एनडीए ने 126 में से 75 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाकर आरामदायक तरीके से बहुमत हासिल कर लिया।

भाजपा को जहां 56 सीटें मिलीं, वहीं उसकी सहयोगी अगपा को 11 और यूपीपीएल को 8 सीटें हासिल हुईं। महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में 29 सीट आईं। असम में जीत से राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री हेमंत बिस्वासरमा का सियासी कद बढ़ गया है।

उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी वर्तमान सीएम सर्वानंद सोनोवाल की जगह बिस्वासरमा को सरकार की कमान देगी। हालांकि सोनोवाल ने गठबंधन की सफलता को अपने लिए जनता का आशीर्वाद बताया है।
केरल में टूटी परंपरा
हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन केरल की राजनीतिक परंपरा बन गई थी। लेकिन इस बार वाम दलों के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने करीब चार दशक से चली आ रही इस परंपरा को तोड़कर अपनी सत्ता बरकरार रखने का इतिहास रच दिया।

एलडीएफ ने 140 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत से दो सीट ज्यादा 73 पर जीत हासिल की और सत्ता पाने का ख्वाब देख रहे कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब देश में केरल ही इकलौता राज्य है, जहां वाम दलों की सरकार बची है। हालांकि इस बार केरल में भी पश्चिम बंगाल की तरह बेहद दमखम दिखा रही भाजपा को महज एक सीट से ही संतोष करना पड़ा।

तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन
तमिलनाडु में एमके स्तालिन के नेतृत्व में द्रमुक ने सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक को करारी शिकस्त दी है। इससे सत्ताधारी दल के सत्ता में वापसी करने की परंपरा भी टूट गई है। द्रमुक को 234 सीटों में से अन्नाद्रमुक (80) के मुकाबले 121 पर जीत मिली है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस ने 16 सीट हासिल की हैं।

द्रमुक और अन्नाद्रमुक इन चुनावों में पहली बार अपने-अपने दिग्गज नेताओं एम. करुणानिधि और जे. जयललिता के बिना उतरी थीं। लेकिन इस परिणाम के साथ ही न सिर्फ द्रमुक में करुणानिधि की विरासत पर स्तालिन के कब्जे पर मुहर लगी है, बल्कि उनके ही मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। अन्नाद्रमुक की सहयोगी भाजपा को यहां भी महज तीन सीटों पर ही जीत हासिल हुई।

हवा में उड़े कोविड प्रतिबंध
निर्वाचन आयोग की तरफ से कोरोना महामारी को ध्यान में रखकर विजय जुलूसों और वाहन रैलियों पर लगाया गया प्रतिबंध कई जगह हवा में उड़ता दिखाई दिया। विभिन्न दलों के समर्थकों की भीड़ अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत पर जश्न मनाती दिखाई दीं।

एजेंसी

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