बाबा रामदेव उनका पतंजलि उद्योग और दिव्य कोरोनिल दवा विवादों के घेरे में

Insightonlinenews Team

बाबा रामदेव शारीरिक योग क्रिया के भारत सहित पूरे विश्व में जहां-जहां लोगों को योगा के विषय में जानकारी है उसमें महारथ हासिल है। पूरी दुनिया में योगा से संबंधित कई विशेषज्ञ हैं परन बाबा रामदेव को विशेषज्ञता का उच्च दर्जा प्राप्त है और इस उच्च दर्जे तक पहुंचने के लिए उन्हें इस देश के मीडिया एवं भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दल के समर्थन की मुख्य भूमिका रही है। हिंदू धार्मिक मत-मतांतर के अनुसार योगा एक बहुत ही पुरानी शारीरिक पद्धती है और इस पद्धती को अध्यात्म से जोड़ने का काम हिंदू धार्मिक संतों और महात्माओं ने कालान्तर में किया है।

मीडिया के प्रचार-प्रसार के माध्यम से बाबा रामदेव भारतवर्ष के क्षीतिज पर एकाएक बड़े तामझाम के साथ उभर कर आये और उन्होंने अपनी प्रभुता को आज तक बरकरार रखा है। बाबा रामदेव भाजपा के मुखर प्रचारक भी माने जाते हैं और उसका लाभ चुनावों में भाजपा को प्राप्त होता रहता है।

भाजपा जो देश की सत्ता में है, उसके बहुत करीबी होकर उन्होंने पतंजलि के नाम आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा के खाद्यानों का बड़ा उद्योग स्थापित कर लिया है। जब भाजपा सत्ता में नहीं थी तो इनके द्वारा निर्मित कुछ दवाओं में व्यापक जांच के आदेश केंद्र सरकार ने दिये थे और शिकायतकर्ताओं का दावा कि कुछ आयुर्वेदिक दवाओं में हड्डियों का चुरा मिलाया जाता है, भाजपा की सरकार के आते ही जांच फाइलों में दब कर रह गई।

आज की तिथि में पतंजलि उद्योग भारतवर्ष का बड़ा उद्योगिक घराना हो गया है और इनके खिलाफ कोई भी टिका-टिप्पणी करना गोदी मीडिया और केंद्र सरकार को पसंद नहीं है।
मीडिया में पतंजलि उद्योग के भरपूर विज्ञापन रहते हैं इसलिए मीडिया इनके विरूद्ध कुछ भी कहने और लिखने से गुरेज करता है।

बाबा रामदेव ने अपने पतंजलि उद्योग द्वारा कोविड-19 की दवा दिव्य कोरोनिल 23 जून को एक प्रेस कांफ्रेंस कर लाॅन्च कर पूरे विश्व को भौचक्के में डाल दिया और दावा किया कि इस दवा का प्रयोग 280 लोगों पर किया जा चुका है और ये दवा 1 महीने के लिए 545 रुपये में उपलब्ध है।

बाबा रामदेव ने इस दवा की घोषणा अपने मजबूत केंद्र सरकार में राजनीतिक संबंधों के कारण बिना आयुष्मान मंत्रालय की स्वीकृति के कर दी। परिणामस्वरूप देश में जगह-जगह इसकी आलोचना हो रही है और मुकदमे भी धारा 420, 120 बी, 270, 504-34 भा.द.वि. में दर्ज किये जा रहे हैं। उन प्राप्तों में जहां गैर भाजपा सरकारें हैं वहां इस दवा को बेचने पर बैन कर दिया गया है।
केंद्र सरकार ने भी इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है और विदेशों में बहुत देशों के जानकार लोगों ने इसकी भरपूर र्भत्सना की है।

बाबा रामदेव जो एक बड़ी छवि लेकर भाजपा के लिए एक बड़े बं्राड के रूप में जाने जाते हैं क्या इस तरह के बिना सरकारी अनुमति के कार्य उनकी और सरकार की छवि को ठेस नहीं पहुंचायेंगे!
कोरोना महामारी जिससे भारत सहित पूर विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है और एक से एक विशेषज्ञ उसकी दवा की तलाश में दिन-रात एक किये हुए हैं ऐसे समय में इतने हल्के ढंग से पतंजलि द्वारा तथाकथित बनाई गई दवा की घोषणा आमजनों के साथ एक मजाक प्रतित होता है!

ऐसी परिस्थिति में केंद्र सरकार और भाजपा के नेताओं की इस हल्के या खोखले लगने वाले बाबा रामदेव के दावे को सहमति देंगे!

  • यदि बाबा रामदेव द्वारा लाॅन्च की कोरोनिल दवा कामयाब नहीं होती है तो बाबा रामदेव के बाकि आयुर्वेदिक दवाओं और सामग्रियों पर भी प्रश्न चिह्न लग जायेगा!

बाबा रामदेव को अपनी सरकारी पहुंच की वजह से बहुत जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी तथा अपनी प्रतिष्ठा का भी ख्याल रखना चाहिए था।

यदि सचमुच में उनकी दवा कारगार सिद्ध होती है तो पूरे विश्व में बाबा रामदेव जहां योग पुरुष के नाम से जाने जाते हैं वो ऐतिहासिक पुरुष के नाम से जाने जायेंगे।

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