Baba Ramdev’s irresponsible utterances : एलोपैथी पर योग गुरु बाबा रामदेव को आइएमए ने भेजा कानूनी नोटिस

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एलोपैथी को स्टूपिट साइंस कहने वाले योग गुरु बाबा रामदेव ने आयुर्वेद पर आस्था रखते हुये पतांजलि आयुर्वेद डायरी के संचालक सुनिल बंसल उम्र 57 वर्ष को कोरोना बीमारी से संक्रमित होेने पर 19 मई को खोया। आयुर्वेद बुरा नहीं है लेकिन योग गुरु को मालूम होना चाहिए कि आज की परिस्थिति में वह प्रभावशाली नहीं है। योग गुरु बाबा रामदेव समय-समय पर अपना संयम खो देते हैं और अनरगल बोलना शुरू करते हैं जिससे जनता को भ्रम में डाल देते हैं।

ज्ञातव्य होगा कि चुनाव के पहले उन्होंने जनता को आश्वस्त किया था कि भाजपा कि सरकार बनी तो डंके की चोट पर 40 रुपये में पेट्रोल मुहैया करायेंगे? इस तरह के तथाकथित मिथ्या तथा भ्रामक उक्तियों से बाबा रामदेव अपनी प्रतिष्ठा दावं में लगाने पर क्यों नहीं संकोच करते?

कथनी और करनी में हमेशा से भारत के योग गुरुओं में समान रहा है। उसी का उदाहरण बाबा रामदेव को जनता में पेश करना चाहिए ये इनसाईट ऑनलाइन न्यूज का छोटा सा सूझाव है।

योग गुरु बाबा रामदेव के कथित रूप से एलोपैथी को दिवालिया विज्ञान कहने पर हंगामा खड़ा हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए), दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AAIMS) व सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन ने इस पर विरोध जताया है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से उनके खिलाफ महामारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आइएमए ने रामदेव को कानूनी नोटिस भेजकर बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की है। डीएमए ने तो दरियागंज थाने में योग गुरु के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी है। वहीं, पतंजलि ने आरोपों इंकार करते हुए कहा है कि बाबा रामदेव की कोई गलत मंशा नहीं थी।

आइएमए ने अपने बयान में कहा है कि यदि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कार्रवाई नहीं की तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। आइएमए के अध्यक्ष डा. जेए जयलाल ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में देशभर में एलोपैथी के 1,200 डाक्टरों ने जान गंवाई है और लाखों लोगों की ¨जदगी बचाई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बावजूद डाक्टरों के हौसले और उनकी मेहनत के कारण ही भारत में मृत्यु दर विकसित देशों की तुलना में भी कम रही। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं को भारत के औषधि महानियंत्रक ने मंजूरी दी थी, इसलिए रामदेव ने अपने बयान से औषधि महानियंत्रक की क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं। डीएमए के महासचिव डा. अजय गंभीर ने कहा कि बाबा रामदेव के बयान से चिकित्सा जगत को आघात पहुंचा है। एलोपैथी के डाक्टर इलाज में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) व अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के दिशा निर्देशों का भी पालन करते हैं। रामदेव योग गुरु हो सकते हैं, लेकिन एलोपैथी को लेकर उनका बयान स्वीकार्य नहीं है।

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