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बंगाल की अदालतों ने छह महीने में 6 दोषियों को सुनाई मौत की सजा, पोक्सो के मामलों पर सख्ती

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आखिरी बार करीब दो दशक पहले दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बीते छह महीनों में राज्य की विभिन्न अदालतों ने छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालतों ने पोक्सो कानून के तहत छोटी बच्चियों की हत्या और दुष्कर्म के सात में से छह मामलों को दुर्लभ से दुर्लभतम माना और दोषियों की मौत की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी पाए गए संजय रॉय को कोलकाता की अदालत ने मौत की सजा नहीं दी है। हालांकि इस मामले पर पूरे बंगाल समेत देशभर में बवाल देखने को मिला था। अदालत ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही इस साल 7 फरवरी को कोलकाता के नजदीक स्थित न्यू टाउन इलाके में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र का शव बरामद हुआ था।

पश्चिम बंगाल में आखिरी बार दो दशक पहले धनंजय चटर्जी को मौत की सजा दी गई थी। धनंजय दक्षिण कोलकाता की एक रिहायशी बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड था। धनंजय को साल 1990 में 16 साल की स्कूल छात्रा के साथ उसके ही अपार्टमेंट में दुष्कर्म और हत्या करने का दोषी पाया गया था। धनंजय को साल 2004 में स्वतंत्रता दिवस की संध्या पर बंगाल की अलीपुर जेल में फांसी दी गई थी। अब जिन लोगों को फांसी दी गई है, उन्हें बीते साल सितंबर से फरवरी के बीच सजा सुनाई गई है।

पोक्सो अदालत ने बीते साल 7 सितंबर को मोहम्मद अब्बास को अगस्त 2023 में एक 16 साल की किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। 26 सितंबर को अलीपुर जिले की पोक्सो अदालत की जज ने अशोक शॉ को मौत की सजा सुनाई थी। अशोक ने पूर्वी कोलकाता के तिलजाला इलाके में पड़ोसी की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हथौड़े से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बच्ची के शरीर पर 28 घाव मिले थे। बीते साल छह दिसंबर को बरुइपुर की पोक्सो अदालत ने 19 साल के मुस्तकीन सरदार को मौत की सजा सुनाई थी। मुस्तकीन को एक 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या का दोषी पाया गया था। 14 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के जंगीपुर की अदालत ने 35 साल के दीनबंधु हलदर को एक छोटी बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। दीनबंधु के सहयोगी सुभाजीत हलदर को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

दिसंबर में ही हुगली जिले की सत्र अदालत ने 42 साल के अध्यापक प्रमथेश घोषाल को अपने पिता, माता और बहन की हत्या के दोष में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस साल 17 जनवरी को हुगली की पोक्सो अदालत ने 42 साल के अशोक सिंह को पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर मौत की सजा सुनाई थी। मंगलवार को ही कोलकाता की पोक्सो अदालत ने राजिब घोष को भी मौत की सजा सुनाई है। राजिब पर सात महीने की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या की कोशिश के मामले में दोषी पाया गया है।

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