Bengal Election Update : मंतेश्वर में पार लगेगी सिद्दिकुल्ला चौधरी की नैया !

कोलकाता, 19 अप्रैल । मंगलकोट के निवर्तमान विधायक एवं ममता सरकार के मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी इस बार के चुनाव में सीट बदल कर पूर्व बर्दवान जिले की मंतेश्वर सीट से भाग्य आजमा रहे हैं। किसी ना किसी तरह सुर्खियों में रहने का शौक रखने वाले सिद्दिकुल्ला चौधरी का विवादों से गहरा नाता रहा है।

सिद्दिकुल्ला चौधरी की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो उसमें कई पडाव नजर आते हैं। ‘जमीयत उलेमा ए हिंद’ नामक पार्टी बनाने वाले सिद्दिकुल्ला राजनीतिक अवसरों का लाभ उठाने में दक्ष माने जाते हैं। 1984 एवं 1989 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर बर्दवान की कटवा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके सिद्दिकुल्ला नंदीग्राम आंदोलन के समय राज्य की राजनीति में अहम किरदार के तौर पर उभरे थे।

2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने निखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा उम्मीदवार के तौर पर बसीरहाट सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार गये। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तृणमूल उम्मीदवार के तौर पर मंगलकोट विधानसभा सीट से प्रतिद्वंदिता की और चुनाव जीतने में सफल रहे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीआई के शाहजहां चौधरी को तकरीबन 12 हजार मतों से पराजित किया था। बाद में ममता बनर्जी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर जन शिक्षा, पुस्तकालय एवं संसदीय मामलों का प्रभार दिया।

विवादों से रहा है नाता

सिद्दिकुल्ला चौधरी अपने विवादास्पद बयानबाजी को लेकर अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में यदि मुस्लिम हिस्सा नहीं लेते तो भारत को स्वाधीन होने में और सौ साल लग जाते। उनका एक और बयान काफी सुर्खियों में रहा था जब उन्होंने कहा था कि यदि भारत को हिंदू राष्ट्र में परिणत कर दिया गया तो भारत टूटकर बिखर जायेगा।

अगस्त, 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को प्रतिबंधित कर दिया तो उस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्दिकुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि इस निर्देश को स्वीकार करना संभव नहीं है। मुस्लिम सरिया कानून का ही अनुसरण करेंगे। 2017 में वीआईपी वाहनों पर लाल बत्ती लगाए जाने पर रोक संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि वह अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती जरूर लगाएंगे।

हालांकि सिद्दिकुल्ला यह भी कहते हैं कि अगर भारत में रहना है तो भारत के कानून का पालन करना होगा। “हिन्दुस्थान समाचार” से बातचीत में उन्होंने कहा, “इस संबंध में मेरी सोच बिल्कुल स्पष्ट है। मैं एक भारतीय हूं और हमेशा मेरी पहचान यही रहेगी।” एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया की टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम नूर उर रहमान बरकती पर पाकिस्तान के साथ संबंध रखने के आरोप लगे थे। उस वक्त मैंने उनका खुलकर विरोध किया था, जिसके बाद बरकती को उनके पद से हटाया गया।

खटक रही अब्बास सिद्दिकी और ओवैशी की मौजूदगी
बंगाल की राजनीति में अल्पसंख्यक चेहरा बनने की होड़ में सबसे आगे नजर आने वाले सिद्दिकुल्ला को आसन्न विधानसभा चुनाव में आईएसएफ तथा एमआईएम की उपस्थिति खटक रही है। आईएसएफ नेता अब्बास सिद्दीकी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि ये लोग कभी भी राजनीति से जुड़े हुए नहीं थे। इन्होंने फुरफुरा शरीफ की मिट्टी को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है।इनका रिमोट किसी और के हाथ में है और ये इशारों पर नाचने वाले हैं।

अब्बास सिद्दिकी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जो अपने तालाब में तैरना नहीं जानता वह कह रहा है कि इंग्लिश चैनल पार कर विश्व चैम्पियन बनूंगा। एम आई एम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोलते हुए सिद्दिकुल्ला ने कहा कि एम आई एम की एक परंपरा रही है कि भाजपा को छोड़कर दूसरी पार्टियों को किसी भी तरह हराना है। हैदराबाद के उडते हुए पंछी की बंगाल में कोई जरूरत नहीं है।

जीत का है भरोसा
मंतेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए सिद्दिकुल्ला ने बताया यहां सुकून से प्रचार कर पा रहा हूं। मतदान भी अच्छा गया। मैं जीत को लेकर पूरी तरह आशावादी हूं। वैसे मंतेश्वर सीट के आंकड़ों की बात करें तो 2011 के चुनाव में माकपा के मोहम्मद हिदायतुल्लाह ने यहां से जीत हासिल की थी। हालांकि 2016 में तृणमूल के सजल पांजा ने हिदायतुल्लाह को शिकस्त देकर यह सीट तृणमूल के कब्जे में ला दिया। माकपा ने इस बार यहां से अनुपम घोष को टिकट दिया है जो किसी भी तरह पार्टी की खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने पूर्व तृणमूल विधायक सजल पांजा के बेटे सैकत पांजा को टिकट देकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। सैकत भी भाजपा की जीत के दावे कर रहे हैं। मंतेश्वर में गत 17 अप्रैल को मतदान हो चुका है। अब चुनाव परिणाम किसके चेहरे पर मुस्कुराहट लाएगा यह दो मई को ही पता चलेगा।

(हि.स.)

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