Bihar Assembly Election : बिहार विधानसभा में जातीय समीकरण में एनडीए का पलड़ा भारी

  • बिहार में जातीय समीकरण की राजनीति में राजद-कांग्रेस का यूपीए गठबंधन पिछड़ता नजर आ रहा

INSIGHT ONLINE NEWS TEAM

इनसाईट ऑनलाइन न्यूज ने अपने बिहार विधानसभा चुनाव के आकलन एवं संभावनाओं के भाग-3 में लिखा था कि ’’जदयू जिस गठबंधन के साथ चुनाव में आता है वही गठबंधन पुर्ण बहुमत प्राप्त करता है।’’ तीन चरणों में 1 अक्टूबर से होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित हो जायेंगे।

बिहार विधानसभा के चुनाव में सदा से जातीय समीकरण प्रभावशाली रहे हैं तथा समीकरण का पलड़ा जिसके पक्ष में भारी होता है उसी की सरकार बनती है। जातीय समीकरण के बनते-बिगड़ते खेल राजद-कांग्रेस का यूपीए गठबंधन पिछड़ता नजर आ रहा है। यूपीए गठबंधन की ओर यादव समाज और अल्पसंख्यक समाज का झुकाव है किन्तु इस समाज के मतों में भी एनडीए के घटक जदयू द्वारा सेंधमारी संभव है। संभावना है कि जदयू को यादव समाज के मतों के साथ-साथ अल्पसंख्यक मतों के भी प्राप्त होने की संभावना है। वहीं एनडीए के घटक भाजपा को भी यादव समाज के मतों का कुछ हिस्सा प्राप्त होना भी निश्चित है।

समीकरण में एनडीए की बड़ी बढ़त है और उसकी ओर अतिपिछड़ा वर्ग, पासी समाज, मुसहर समाज के मतों का पूर्ण झुकाव है। भाजपा ने बहुत सधी हुई चाल चलते हुए अतिपिछड़ा वर्ग के सर्वमान्य नेता मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी से समझौता कर उसकी पर्टी को एनडीए के खाते में अपने हिस्से की सीटों में से 11 सीटें दी है। अब 11 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार के रूप में लड़ेगी मुकेश साहनी की पार्टी।

मुकेश सहनी जो निषाद समाज से आते हैं और जिसका उत्तर बिहार में 14 प्रतिशत से अधिक मतों पर प्रभाव है का लाभ सीधा एनडीए को मिलेगा वहीं अन्य अतिपिछड़ा वर्ग भी मुकेश सहनी के नेतृत्व में पूर्व में भी आस्थावान रहा है और इन सब को मिलकार किसी-किसी सीट पर 40 प्रतिशत से भी अधिक मत इस समाज के हैं। वहीं जदयू ने मुुसहर समाज के बड़े नेता जीतनराम मांझी से 9 सीटों पर समझौता कर बिहार में नीतीश कुमार ने इन मतों को एनडीए के पक्ष में गोलबंद कर दिया है। इनता ही नहीं नीतीश कुमार की सूझबूझ से पासी समाज और उससे जुड़े अन्य पिछड़े वर्ग में भी एनडीए के पक्ष में माहौल बना है जैसे ही नीतीश कुमार ने इस समाज के बड़े नेता अशोक चैधरी को जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष पर स्थापित किया।

बिहार में सदा से पिछड़े वर्ग के मतों पर आधारित राजनीति का खेल चलता रहा है और इसमें कोई संदेह नहीं कि नीतीश कुमार के एनडीए गठबंधन ने बढ़त बना ली है। जहां तक अपर कास्ट मतों का सवाल है ये पहले से ही भाजपा के साथ जुड़े हुये हैं। पिछड़ी जातियों में बहुल समाज माने जाने वाले कुड़मी और कोयरी बिरादरी का भी झुकाव नीतीश कुमार की तरफ है। सारे वर्तमान के समीकरण नीतीश कुमार के नेतृत्व में सकार बनने की ओर संकेत देते हैं।

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