Bihar land Mutation Update: बिहार में अप्रैल माह से जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही हो जाएगा म्यूटेशन, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

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म्यूटेशन मामलों में भ्रष्टाचार रोकने पर बिहार सरकार का क्रांतिकारी फैसला, क्या झारखंड में भी होगा

म्यूटेशन मामलों में बिहार-झारखंड सदा से ही विवादों के घेरे में रहे हैं और समय-समय पर विभिन्न पदाधिकारियों पर घूस के नाम पर गाज गिरती रही है क्योंकि म्यूटेशन के मामलों में उपरी कमाई की चर्चा हमेशा आमजनों में रहती है जो सरकार को हमेशा कटघरे में खड़ी करा देता है। सरकारी भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बिहार ने एक अद्भुत और जनहित में क्रांतिकारी निर्णय लिया है जो बहुत ही स्वागत योग्य है।
क्या झारखंड भी बिहार की तर्ज पर इस तरह के जनहित वाले निर्णय से प्रेरणा लेकर कोई कदम उठायेगा? यदि झारखंड में ऐसा कदम उठता है तो समय-समय पर जो पदाधिकारियों पर गाज गिरती है एक तो वह बंद होगी और समर्पित सरकारी पदाधिकारियों को नियम के अनुकूल काम करना पड़ेगा।

पटना कार्यालय से म्यूटेशन पर विशेष खबर

सरकार म्यूटेशन से जुड़े विवादों को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। रजिस्ट्री के साथ जमीन के म्यूटेशन का फैसला पहले हो गया था। यह एक अप्रैल 2021 से यह लागू भी हो रहा है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री ऑफिस से दस्तावेज की कापी अपने आप अंचल के राजस्व कर्मी की पहुंच में आ जाएगी। जमीन के साथ नक्शा और चैहद्दी की भी रजिस्ट्री होगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की आइटी शाखा, एनआइसी पटना एवं निबंधन विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय 31 मार्च का इस योजना को हरी झंडी देंगे। एक अप्रैल से योजना लागू हो जाएगी। पहले चरण में इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जो जमाबंदीदार रैयत (जिनके नाम से जमाबंदी कायम है।) से जमीन की खरीद करेंगे। ऐसे विक्रेता, जिनके नाम से जमाबंदी कायम नहीं है। रसीद नहीं कटता है। उनसे जमीन खरीदने पर पहले की तरह म्यूटेशन के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। दूसरे चरण में इस श्रेणी के विक्रेता से जमीन खरीदने पर भी यह सुविधा मिलेगी।

जमीन के विक्रेता और खरीददार रजिस्ट्री के समय एक फार्म भरेंगे। इसके जरिए, जमीन, जमाबंदी और खरीद-बिक्री करने वाले का पूरा ब्यौरा दिया जाएगा। यह सहमति पत्र होगा। एनआइसी के तकनीकी निदेशक संजय कुमार के मुताबिक रजिस्ट्री का डाटा और सहमति पत्र उसी दिन अपने आप म्यूटेशन पोर्टल पर चला जाएगा। वहां से कर्मचारी के लॉगिन में चला जाएगा। जमीन के दस्तावेज का पीडीएफ फार्मेट निबंधन कार्यालय के साफ्टवेयर में रहेगा। लेकिन, उसका लिंक राजस्व विभाग की पहुंच में रहेगा। उसी से म्यूटेशन का प्रमाण दे दिया जाएगा। इससे पहले रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन देना होता था।

विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि अगर सभी रैयत अपने नाम से जमाबंदी कायम करा लेते हैं तो जमीन की खरीद-बिक्री में मदद मिलेगी। साथ में जमाबंदी कराने के विभाग के प्रयासों को भी बल मिलेगा। उन्होंने बताया कि नई प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद आॅनलाइन म्यूटेशन की सुविधा जारी रहेगी। पहले की तरह सामान्य मामलों में 35 दिन और आपत्ति अथवा विवाद की सूरत में 75 दिन के भीतर म्यूटेशन के आवेदन का निबटारा होता रहेगा।

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