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लोकसभा में आप्रवासन और विदेशियों से जुड़ा विधेयक पारित

नई दिल्ली, 27 मार्च । लोकसभा ने गुरुवार को आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक-2025 चर्चा के बाद ध्वनि मत से पारित कर दिया। विधेयक का उद्देश्य देश में आप्रवासन से जुड़े कानूनों को नए सिरे से परिभाषित करना है। विधेयक का उद्देश्य केंद्र सरकार को भारत में प्रवेश करने और भारत से प्रस्थान करने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों की आवश्यकता और विदेशों से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए कुछ शक्तियां प्रदान करना है।

विधेयक अधिनियम बनने पर विदेशियों और आप्रवास से संबंधित मामलों के वर्तमान के चार अधिनियमों- विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 और आप्रवास (वाहक दायित्व) अधिनियम-2000, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम-1939 का स्थान लेगा।

विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक देश की सुरक्षा, अर्थतंत्र की मजबूती, उत्पादन में वृद्धि तथा व्यापार, शिक्षा प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता और 2047 तक देश को दुनिया में सर्वोच्च बनाने के लिए जरूरी है। इससे आव्रजन प्रणाली सिंप्लीफाई, सिस्टमेटिक और सिक्योर (सुरक्षित) बनेगी। वर्तमान में चार मौजूदा अधिनियमों के प्रावधानों में ओवरलैप हैं और कई जगह कमियां हैं। नया विधेयक पहले के चार अधिनियमों को निरस्त कर एक कानून बनाकर इन्हें दूर करेगा।

उन्होंने लोकसभा में कहा कि आप्रवासन देश से जुड़े कई विषयों से जुड़ा है। इसे अलग नहीं देखा जा सकता। देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि हमें पता रहे कि सीमा में कौन, कब, कितनी अवधि और किस उद्देश्य के लिए आता है। वे आश्वासन देते हैं कि इसके माध्यम से भारत में आने वाले सभी विदेशी नागरिकों का लेखा-जोखा रखने का काम होगा और इसके माध्यम से देश का विकास भी सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि विधेयक की धारा 3 राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा समझे गए व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है। कुछ सदस्यों ने इस प्रावधान का विरोध किया है। हमारा मानना है कि देश में बेरोकटोक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती है। शाह ने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन में कहीं भी विदेशियों को प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं मिलता है। आप्रवासन अधिकारी ही इस पर निर्णय लेते हैं। पहले भी इस तरह के प्रावधान थे। हमने नए विधेयक में सुनिश्चित किया है कि सभी बिन्दुओं पर समग्रता से विचार कर ही किसी को प्रवेश से रोका जाए।

भारत के समृद्ध शरणार्थी इतिहास का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि ‘माइक्रो माइनोरिटी’ दुनिया में सबसे अधिक सम्मान भारत देश में ही पाती है। इसी दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) बनाया। शर्णार्थियों और घुसपैठियों में अंतर करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और विकास में योगदान देने वालों का देश मे स्वागत है। देश कोई धर्मशाला नहीं है। देश की शंति को बाधित करने वाले जैसे कि रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

शाह ने अपने वक्तव्य में तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सदस्यों के सवालों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर तृणमूल सरकार को घेरा और पूछा कि इन्हें पहचान के दस्तावेज मुहैया कौन कराता हैं। साथ ही उन्होंने तमिल शरणार्थियों के मुद्दे पर द्रमुक पर केन्द्र सरकार में रहते हुए कुछ नहीं करने की बात कही। शाह ने कहा कि हमने तमिल शरणार्थियों से जुड़ी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। अगर उनकी ओर से कोई सुझाव मिलता है तो इस विषय पर विचार किया जाएगा।

शाह ने कहा कि विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे किसी भी समिति को भेजे जाने की आवश्यकता नहीं है। ‘डेमेज पासपोर्ट’ के विषय पर उन्होंने कहा कि इससे जुड़े मुद्दों में लगातार बदलाव होता है। इसी कारण से विधेयक में इसकी व्याख्या नहीं की गई है और बाद में नियमों के माध्यम से इसे स्पष्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की वीजा की प्रक्रिया बहुत पुरानी है। हम इसमें सुधार लाए हैं। 2010 में 5 देशों के नागरिकों को पर्यटन वीजा ऑनलाइन देने की शुरुआत हुई। 2010-2014 के बीच में 7 देशों को बढ़ाया गया और अब इस सुविधा को 169 देशों तक बढ़ाया गया है लेकिन इसके लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा।

विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी ने कहा कि विधेयक संविधान में दिए मूलभूत अधिकारों से जुड़े कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है। विधेयक किसी विदेशी या भारतीय मूल के व्यक्तियों को भारत में प्रवेश से रोकने का अधिकार आप्रवासन अधिकारियों को देता है जिसके खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। उन्होंने सरकार से मांग की कि विधेयक को संयुक्त समिति को भेजा जाए। तिवारी ने कहा कि अवैध आगमन और घुसपैठ रोकना जरूरी है लेकिन नागरिक अधिकार और उनकी सुरक्षा की दृष्टि से संयम की भी जरूरत है। विधेयक में अस्पष्टता है और यह सरकार को शक्ति देता है जिसका वैचारिक दृष्टि से दुरुपयोग संभव है और ऐसा अतीत में होता रहा है। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण दिया। तिवारी ने कहा कि विधेयक में डेमेज पासपोर्ट की व्याख्या नहीं किया है। इसके अलावा भी कई सदस्यों ने विधेयक के विरोध में अपने विचार रखे।

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