Budget Update : पेट्रोल पर 2.5 और डीजल पर 4 रुपए एग्री सेस का प्रस्ताव, इंश्योरेंस सेक्टर में 74% तक एफडीआई, जानें बजट की बड़ी बातें

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आम बजट पेश किया। सरकार ने पेट्रोल पर 2.5 रुपए और डीजल पर 4 रुपए एग्री सेस का प्रस्ताव रखा है। साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की लिमिट 49% से बढ़ाकर 74% कर दी गई है।

बजट में मिडिल क्लास खाली हाथ ही रहा। सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, न ही कोई छूट दी।

हालांकि, किफायती घर खरीदने वालों को ब्याज में 1.5 लाख रुपए की एक्स्ट्रा छूट का समय एक साल बढ़ाकर मार्च 2022 तक कर दिया। वहीं 75 साल से ज्यादा उम्र वाले पेंशनर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट भी दी है।

टैक्स से जुड़े ऐलान

  • वित्त मंत्री ने कहा कि आजादी की 75वीं सालगिरह पर हम 75 साल और उससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजंस को राहत देना चाहते हैं। उन्हें अब IT रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी।
  • अभी टैक्स रिअसेसमेंट 6 साल और गंभीर मामलों में 10 साल बाद भी केस खोले जा सकते थे। अब इसे घटाकर 3 साल किया जा रहा है। गंभीर मामलों में जब एक साल में 50 लाख से ज्यादा की इनकम छिपाने की बात होगी, तभी 10 साल तक केस खोले जा सकेंगे। प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर ही इसकी मंजूरी देंगे।
  • 85 हजार करोड़ रुपए के टैक्स डिस्प्यूट हाल ही में खत्म हुए हैं। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन कमेटी बनाई जाएगी। 50 लाख तक की इनकम और 10 लाख तक की विवादित इनकम वाले लोग इस कमेटी के पास जा सकेंगे। ये कमेटी फेसलेस होगी। नेशनल फेसलेस अपीलेट ट्रिब्यूनल भी बनेगा।
  • अगर अभी टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा हो जाता है तो टैक्स ऑडिट कराना होता है। 95% डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों के लिए यह छूट बढ़ाकर पिछली बार 5 करोड़ टर्नओवर की गई थी। इसे बढ़ाकर अब 10 करोड़ किया जा रहा है।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सभी के लिए घर हमारे लिए प्रायोरिटी है। होम लोन पर ब्याज में 1.5 लाख रुपए की कटौती का प्रावधान था। अब किफायती घर के लिए ब्याज में 1.5 लाख रुपए की एक्स्ट्रा छूट 31 मार्च 2022 तक मिलेगी।

इंश्योरेंस-बैंकिंग सेक्टर के लिए

  • इंश्योरेंस एक्ट 1938 में बदलाव होंगे। इंश्योरेंस सेक्टर में FDI को 49% से बढ़ाकर 74% किया जाएगा।
  • IDBI के साथ-साथ दो बैंक और एक पब्लिक सेक्टर कंपनी में विनिवेश होगा। इसके लिए कानून में बदलाव होंगे। LIC के लिए भी IPO लाया जाएगा।
  • सरकारी बैंकों में 20,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, बैंकों को NPA से छुटकारा दिलाने के लिए एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी और एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाई जाएगी।

असम-बंगाल की टी-वर्कर्स महिलाओं के लिए 1000 करोड़

  • वित्त मंत्री ने कहा, “अगली जनगणना पहली डिजिटल जनगणना होगी। इस पर इस साल 3768 करोड़ रुपए खर्च होंगे। गोवा पुर्तगाल से आजादी का डायमंड जुबली ईयर सेलिब्रेट कर रहा है। इसके लिए 300 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। असम और बंगाल की महिला टी-वर्कर्स और उनके बच्चों के लिए 1000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।”

एजुकेशन के लिए

  • एनजीओ, राज्य सरकारों और प्राइवेट सेक्टर की मदद से 100 नए सैनिक स्कूलों की शुरुआत होगी।
  • लद्दाख में हायर एजुकेशन के लिए लेह में सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी।
  • आदिवासी क्षेत्रों में 750 एकलव्य मॉडल स्कूलों में सुविधाओं का सुधार होगा।
  • अनुसूचित जाति के 4 करोड़ बच्चों के लिए 6 साल में 35219 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • आदिवासी बच्चों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप भी लाई जाएगी।

हेल्थ के लिए

  • कोरोना वैक्सीन पर 2021-22 में 35,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो और ज्यादा फंड दिया जाएगा।
  • न्यूट्रिशन पर भी ध्यान दिया जाएगा। मिशन पोषण 2.0 शुरू किया जाएगा। वॉटर सप्लाई भी बढ़ाएंगे। 5 साल में 2.87 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • शहरी इलाकों के लिए जल जीवन मिशन शुरू किया जाएगा। शहरी स्वच्छ भारत मिशन पर 1.48 लाख करोड़ 5 साल में खर्च होंगे।
  • निमोकोक्कल वैक्सीन को देशभर में शुरू किया जाएगा। इससे 50 हजार बच्चों की हर साल जान बचाई जा सकेगी।
  • 64,180 करोड़ रुपए के बजट के साथ प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना शुरू होगी। यह बजट नई बीमारियों के इलाज के लिए भी होगा।
  • 70 हजार गांवों के वेलनेस सेंटर्स को इससे मदद मिलेगी। 602 जिलों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल शुरू होंगे। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल को मजबूत किया जाएगा।
  • इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल शुरू किया जाएगा ताकि पब्लिक हेल्थ लैब्स को कनेक्ट कर सकें। 15 हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स शुरू किए जाएंगे। 9 बायो सेफ्टी लेवल 3 लैब शुरू होंगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट की जरूरत है।
  • इसके लिए एक बिल लाया जाएगा। 20 हजार करोड़ रुपए इस पर खर्च होंगे ताकि 5 लाख करोड़ रुपए का लैंडिंग पोर्टफोलियो 3 साल में बनाया जा सके।
  • पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मॉनेटाइज करने पर ध्यान दिया जाएगा। नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च होगी। इसका एक डैशबोर्ड बनेगा ताकि इस मामले में हो रही तरक्की को देखा जा सके।
  • नेशनल हाईवेज अथॉरिटीज भी अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करेंगी। रेलवे भी फ्रेट कॉरिडोर को मॉनेटाइज करेगी। आगे जो भी एयरपोर्ट बनेंगे, उनमें भी मॉनेटाइजेशन पर ध्यान दिया जाएगा।

कस्टम ड्यूटी

  • 400 पुरानी छूट का रिव्यू जाएगा। यह सलाह-मशविरे के जरिए होगा। इस साल 1 अक्टूबर से रिवाइज्ड कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर शुरू होगा।
  • आयरन एंड स्टील पर कस्टम ड्यूटी घटाई जा रही है ताकि मेटल रिसाइकलर्स को मदद मिल सके। कॉपर स्क्रैप में भी ड्यूटी हटाई जाएगी।
  • गोल्ड एंड सिल्वर पर अभी 12.5% कस्टम ड्यूटी है। इसे रेशनलाइज किया जाएगा। ऑटो पार्ट्स पर 15% कस्टम ड्यूटी होगी।
  • किसानों की मदद के लिए कॉटन पर 10%, कच्चे रेशम और रेशम सूत पर 15% कस्टम ड्यूटी होगी।

सोना-चांदी सस्ता होगा, मोबाइल फोन महंगे हाेंगे

  • 4 साल में सरकार ने मोबाइल फोन से जुड़े प्रोडक्ट पर औसतन 10% तक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई, इससे प्रोडक्शन तीन गुना बढ़ा है
  • अभी तकरीबन 90% प्रोडक्ट्स GST स्लैब में आते हैं, इन्हीं के जरिए कम-ज्यादा होती है कीमत

बजट आ चुका है। हर बार की तरह इस बार भी कुछ चीजें सस्ती हुई हैं, तो कुछ महंगी। लेकिन ऐसी बहुत सारी चीजें नहीं हैं, जिन पर असर पड़ा हो। जैसा बहुत पहले हुआ करता था। सोना-चांदी, बर्तन, लेदर के सामान सस्ते होंगे, जबकि मोबाइल, सोलर इनवर्टर और गाड़ियां महंगी होंगी। दरअसल तीन साल पहले आए GST ने सामानों और सर्विसेज को महंगा-सस्ता करने की ताकत बजट से छीन ली है। अब 90% चीजों की कीमत GST तय करता है।

लेकिन विदेश से मंगाई जाने वाली वस्तुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी का असर रहता है और इसकी घोषणा बजट में की जाती है। इसलिए पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स जैसे- शराब, फुटवियर, सोना-चांदी, इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट्स, मोबाइल, कैमिकल, कारें, टोबेको जैसी चीजों की कीमत पर बजट घोषणाओं का असर पड़ता है। इन पर ही सरकार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाती या घटाती है। इस बजट में भी वित्त मंत्री ने यही किया है।

आइए अब जानते हैं कि इस बजट के कारण क्या महंगा हुआ है और क्या सस्ता

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ ऑटो पार्ट्स पर 15% तक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है, इससे गाड़ियां महंगी होंगी। सोलर इनवर्टर महंगा होगा, क्योंकि इस पर इंपोर्ट ड्यूटी 20% बढ़ाई गई है। मोबाइल फोन के चार्जर और हेडफोन पर इंपोर्ट ड्यूटी 2.5% बढ़ाई है। इससे ये चीजें भी महंगी होंगी।
  • सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 12.5% कम की गई है। इससे ज्वैलरी सस्ती होगी। स्टील प्रोडक्ट पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करके 7.5% कर दी गई है। तांबे पर इंपोर्ट ड्यूटी 2.5% घटाई गई है। चुनिंदा लेदर को कस्टम ड्यूटी से हटा दिया गया है। इससे लेदर के प्रोडक्ट सस्ते होंगें।

मोबाइल से जुड़े उपकरणों पर 2.5% तक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है

मोबाइल, चार्जर, हेडफोन और महंगे होंगे। क्योंकि सरकार ने विदेश से आने वाले मोबाइल और उससे जुड़े उपकरणों पर इंपोर्ट ड्यूटी 2.5% तक बढ़ा दी है। पिछले 4 साल में सरकार ने इन प्रोडक्ट्स पर औसतन करीब 10% तक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है। इससे देश में मोबाइल फोन का प्रोडक्शन करीब तीन गुना तक बढ़ गया है, लेकिन ये चीजें महंगी हुई हैं। 2016-17 तक देश में 18,900 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन बनते थे। 2019-20 में देश में 1.7 लाख करोड़ रुपए के फोन बनने लगे।

-Agecny

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