Captain Amarinder Singh : भाजपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे पर चर्चा किसानाें के मुद्दों के हल के बाद: अमरिंदर

चंडीगढ़, : पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी नयी पार्टी के गठन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन की कोशिशों में जुटे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सीट बंटवारे पर कोई भी चर्चा चुनाव के नजदीक आने के बाद ही होगी, और इसके लिए केंद्र सरकार को पहले किसानों के मुद्दों का हल निकालना होगा।

कांग्रेस में ‘अपमानित’ महसूस करने के कारण पद छोड़ने का दावा करने वाले कैप्टन सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने पंजाब में अपनी जमीन खो दी है और नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी अध्यक्ष बनाकर माहौल खराब कर दिया है। उन्होंने कहा “हम भाजपा से चुनाव नजदीक आने के बाद सीट समायोजन के बारे में बात करेंगे लेकिन ऐसा होने के लिए, भाजपा को पहले किसानों के मुद्दों को हल करना चाहिए … अगर भाजपा किसानों के मुद्दे को हल करती है, तो मुझे उनसे कोई समस्या नहीं है।”

कैप्टन अमरिंदर ने कहा है कि उनमें अभी दम है और वह राज्य के लिये लड़ते रहेंगे और जब वह समझेंगे कि राजनीति में और आगे नहीं जा सकते तो रिटायर हो जाएंगे।
कैप्टन सिंह ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह अभी लड़ने के मूड में हैं और अपने प्रदेश के लिये लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने के उनके ऐलान के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने उनसे सम्पर्क कर फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था लेकिन वह समझते हैं हर इंसान अपना जमीर और सोचने की शक्ति होती है। उन्होंने जब फैसला ले लिया है तो इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए पूरे दमखम के साथ पार्टी के लिये काम किया और अब जब पार्टी उन्हें नहीं चाहती है तो वह इसे छोड़ देंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं वह घर बैठ जाएंगे। वह जबरदस्ती किसी पद पर बने नहीं रहना चाहते। पार्टी हाईकमान ने उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था तो उन्हें इसे राज्यपाल को सौंप दिया। इस पर उन्होंने एक बार भी हाईकमान से सवाल नहीं किया। “लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं नाराज होकर घर बैठ जाऊं। मुझमे अभी दम है और लड़ने के मूड में हूँ। मैं कभी संसद में नहीं गया और प्रदेश में ही रह कर इसके लिये लड़ता रहा हूँ। जब मुझे लगेगा कि समय आ गया है तो राजनीति से रिटायर हो जाऊंगा लेकिन अभी तो मैं लड़ूंगा।”

उन्होंने कहा कि वह राज्य विधानसभा चुनावों के लिये समान विचारधारा वाले दलों और लोगों से गठबंधन करेंगे। इस बारे में सभी विकल्प खुले रखेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी बैठक के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने किसानों के विरोध पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “तीन विवादास्पद विधेयक हैं… हमने इतने संशोधन किये हैं… इन कृषि कानूनों में हम एक और संशोधन क्यों नहीं कर सकते?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “उच्चतम न्यायालय जाना कोई समाधान नहीं है… कृषि कानून एक राजनीतिक मामला है। किसान कुछ गारंटी और सुरक्षा चाहते हैं। मैं गृह मंत्री से मिला … उनसे कहा कि यह बात हाथ से नहीं जानी चाहिए।”
उन्होंने यह भी आशंका जतायी कि किसान आंदोलनकारियों में से आईएसआई और खालिस्तानी भर्ती कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लेकर उन्होंने कहा कि वह उनकी सरकार में साढ़े चार साल तक तकनीकी शिक्षा और सांस्कृतिक मंत्री रहे और मंत्री के रूप में उन्होंने अच्छा काम किया जबकि नवजोत सिंह सिद्धू एक बेकार मंत्री थे। उनके पास सात महीने तक फाइलें पड़ी रहती थीं और उन्हें अपने मंत्रालय के काम के बारे में कुछ भी पता ही नहीं होता था। इसलिये उन्होंने सिद्धू को सरकार से बाहर कर दिया। सिद्धू को जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा रहा था तब भी उन्होंने पार्टी हाईकमान को लिख कर उसे बताया था कि यह व्यक्ति पार्टी को तंग करेगा और जब तक इसका अहसास होगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

कैप्टन सिंह ने कहा कि उन्होंने हाईकमान से कहा था कि पार्टी को उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने देना चाहिये और अगर पार्टी सत्ता में आती है तो वह मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहेंगे और राजनीति से रिटायर हो जाएंगे और अपनी सीट से भी इस्तीफा दे देंगे। इससे उन्हें यह खुशी होती कि वह जीत कर पार्टी से बाहर आये हैं…निकाला नहीं गया है।

वार्ता

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