CEED’s Resource Centre : जस्ट ट्रांजिशन में राज्य सरकार को सहायता देगा सीड का रिसोर्स सेंटर

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झारखंड में जस्ट ट्रांजिशन के विषय पर सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच व्यापक सहमति जरूरी

रांची, 20 अक्टूबर, 2021 : सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा आयोजित ‘जस्ट ट्रांजिशन डायलॉग’ में राज्य के प्रमुख राजनीतिक पार्टियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स ने व्यापक सहमति बनाते हुए माना कि झारखंड की अर्थव्यवस्था को भावी चुनौतियों के प्रति तैयार करने एवं लोगों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जस्ट ट्रांजिशन के रास्ते पर चलने की जरूरत है. चूँकि जस्ट ट्रांज़िशन जीवाश्म ईंधन पर आधारित आर्थिक मॉडल से आगे निकल कर एक भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था के निर्माण पर जोर देता है, जिसके केंद्र में सामाजिक न्याय, सुरक्षित पर्यावरण और आजीविका सुरक्षा का उद्देश्य है, इसलिए सभी दलों ने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठ कर नए झारखंड के निर्माण का संकल्प लिया. इसी कड़ी में सीड ने ‘जस्ट ट्रांजिशन रिसोर्स सेंटर’ की शुरुआत की है, जिसका मकसद सब-नेशनल स्तर पर संवाद, शोध-अध्ययन एवं क्रियान्वयन रोडमैप तैयार करना और राज्य एवं क्षेत्रीय स्तर पर सततशील विकास को प्रोत्साहित करना है. इस कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, आजसू पार्टी के प्रमुख नेताओं समेत राज्य के प्रमुख अकादमिक संस्थानों, इंडस्ट्रीज एवं बिजनेस एसोसिएशन, रिसर्च थिंक-टैंक्स और प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संस्थानों की भी भागीदारी हुई.

जस्ट ट्रांजिशन एक नीतिगत उपाय के रूप में जीवाश्म ईंधन पर आधारित उन देशों एवं राज्यों के लिए बेहद जरूरी है, जहां प्राकृतिक खनिज संसाधन समाप्ति के कगार पर हैं और संसाधनों के दुरूपयोग से वहां पारिस्थितिकी का संकट पैदा हो गया है. झारखंड भी ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. चूँकि पूरी दुनिया में प्राकृतिक संसाधनों, खासकर कोयला, की समाप्ति का चरण शुरू हो गया है, ऐसे में खनिज से परिपूर्ण माना जानेवाला राज्य झारखंड भी आनेवाले दशकों में अर्थव्यवस्था में ह्रास और आजीविका संकट की दिशा में बढ़ रहा है. इससे निबटने के लिए एक ठोस समाधान के रूप में जस्ट ट्रांजिशन सामाजिक न्याय के साथ एक वैकल्पिक विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करता है.

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जस्ट ट्रांजिशन डायलॉग के व्यापक संदर्भ के बारे में सीड के सीईओ श्री रमापति कुमार ने कहा कि “राज्य में जस्ट ट्रांजिशन को प्रोत्साहित करने के लिए सीड ने स्टेट रिसोर्स सेंटर की शुरुआत की है, जो सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिल कर काम करेगा और राज्य सरकार को इस अनुरूप नई नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सहायता प्रदान करेगा. राज्य सरकार को ‘जस्ट ट्रांजिशन मिशन’ शुरू करना चाहिए, जो आवश्यक पॉलिसी फ्रेमवर्क, फाइनेंसिंग मैनेजमेंट और इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप तैयार करने में प्रभावी भूमिका निभाए. दरअसल सभी प्रमुख विभागों के बीच कन्वर्जेन्स तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, क्योंकि सभी विभागों और एजेंसियों को एक स्पष्ट विजन के साथ काम करने की आवश्यकता है, ताकि राज्य में आजीविका सुरक्षा के साथ समावेशी विकास का एक नया दौर शुरू किया जा सके.”

सीड की पहल की सराहना करते हुए श्री संजय सेठ (भाजपा सांसद) ने कहा कि हमारे लिए जनहित के मुद्दे सर्वोपरि प्राथमिकता हैं और चूंकि जस्ट ट्रांजिशन सामाजिक न्याय के साथ विकास का पक्षधर है, ऐसे में हम इस बदलाव के लिए सभी पक्षों के साथ जागरूकता का कार्य करें. आजीविका सुरक्षा में जस्ट ट्रांजिशन के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री लोबिन हेम्ब्रम (झामुमो विधायक) ने कहा कि राज्य सरकार उन संभावनाशील क्षेत्रों एवं आर्थिक पहलुओं पर प्राथमिकता से ध्यान दे रही है, जिससे लोगों का जीविकोपार्जन सुरक्षित हो ताकि वे बदलाव के साथ कदमताल कर पाएं. जस्ट ट्रांजिशन में सामुदायिक सहभागिता पर जोर देते हुए श्री प्रदीप यादव (कांग्रेस विधायक) ने कहा कि नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में आम लोगों को शामिल करने की जरूरत है, इसलिए जस्ट ट्रांजिशन को सही अर्थो में भागीदारीपूर्ण प्रक्रिया से क्रियान्वित करने के लिए जन जागरूकता फ़ैलाने की जरूरत है, ताकि राज्य में सततशील विकास को हासिल किया जा सके. जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था में जस्ट ट्रांजिशन के महत्व पर जोर देते हुए श्री लम्बोदर महतो (विधायक, आजसू पार्टी) ने कहा कि हमें ऐसे प्रयासों को समर्थन देना चाहिए, जो संगठित और असंगठित मजदूरों की आजीविका सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और समृद्ध परिवेश के लिए केंद्रित हो.

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जस्ट ट्रांजिशन के लिए समुचित तैयारी पर बल देते हुए प्रो एसके समदर्शी, डायरेक्टर, सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड एफीशिएंट टेक्नोलॉजी (झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय) ने बताया कि संसाधनों के खात्मे के दरम्यान नौकरियों के ह्रास की चुनौती को दूर करने के लिए वैकल्पिक आर्थिक क्षेत्रों एवं उद्योगों की पहचान जरूरी है, साथ ही नए तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों पर ठोस ढंग से काम करने की आवश्यकता है. एनर्जी ट्रांजिशन इसमें बड़ी भूमिका निभाएगा, क्योंकि अक्षय ऊर्जा एवं स्वच्छ तकनीकों को अर्थव्यवस्था के सभी मोर्चे पर समावेश से आजीविका का वैकल्पिक मॉडल तैयार होगा.

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में प्रो रमेश शरण (पूर्व कुलपति, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी एवं प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री) ने जस्ट ट्रांजिशन को मजबूत करने में सहयोगी आर्थिक पहलुओं एवं इसकी तार्किकता पर जोर दिया, वहीं प्रो तनुश्री भट्टाचार्य (बीआईटी, मेसरा) और प्रो नीतीश प्रियदर्शी (रांची विश्वविद्यालय) ने जीवाश्म ईंधन से पैदा प्रदूषण एवं पर्यावरण ह्रास को रोकने में जस्ट ट्रांजिशन को कारगर माना. सत्र के वक्ताओं ने सम्मलित स्वर से जोर दिया कि अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण एवं विविधीकरण, समावेशी विकास, सोशल एवं इकोनोमिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका सुरक्षा आदि के लिहाज से जस्ट ट्रांजिशन एक सततशील एवं व्यावहारिक समाधान है, जिस पर ठोस नीतिगत पहल होनी चाहिए.

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