Challenge to the Society to Control Rape : समाज में महिलाओं के प्रति कब बदलेगी सोच?, कैसे दूर होगा मानसिक संक्रमण और कब थमेगी यौन हिंसा

Insight Online News

बलात्कार एक ऐसा अपराध है, जिसके बारे में सोचकर भी हमारी रूह कांप जाती है परंतु वर्तमान परिदृश्य में हमारे कानों में हर तरफ बलात्कार, अवैध संबंध, लिव इन रिलेशनशिप, समलैंगिक संबंध जैसे शब्द ही सुनाई पड़ते हैं। न जाने आजकल के इंसान पर हवस का कैसा भूत सवार है, जो इस समाज को व हमारी संस्कृति को पतन की ओर ले जा रहा है।

खूबसूरत इंसानी शरीर के भूखे दरिंदों के द्वारा सरेबाजार महिलाओं के साथ छेड़खानी व बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दिए जाना व वहाँ मौजूद लोगों द्वारा आँखें मूँदकर वहाँ से पलट जाना यही सिद्ध करता है कि आज का आदमी कितना स्वार्थी हो चुका है, जो केवल अपनी जान बचाने के लिए इन लफड़ों-पचड़ों से बच-निकलने के चक्कर में इंसानियत से भी कन्नी कर जाता है।

घटनाएं तो लगातार पूरे देश में बढ़ती ही जा रही है जिसकी चर्चा मीडिया में बनी रहती है समाज के लिए यह एक बहुत ही शर्मसार है। सामाजिक बंधन ही इसको रोक सकता है। बढ़ती घटनाओं ने वैशी हरकतें ज्यादा रिपोर्ट में आती है जिसका एक ज्वलंत उदाहरण है निम्नलिखित घटना।

घटना

झारखंड के गुमला स्थित सिसई प्रखंड के पूसो थाना क्षेत्र के एक 12 वर्षीय नाबालिग आदिवासी युवती का अपहरण कर दुष्कर्म करने का मामला प्रकाश में आया है। दुष्कर्म के मामले को लेकर पीड़ित युवती ने पूसो थाना में दो युवकों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है।

प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने त्वारित करवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर शनिवार को जेल भेज दिया। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पीड़िता अपने एक नाबालिग सहेली के साथ 17 नवम्बर को अरको सेमर टोली जतरा देखने गईं थी। जतरा से दोनो रात के करीब आठ बजे घर लौट रही थी। इसी दौरान अरको सेमर टोली से कुछ दूरी पर सुरसा गांव निवासी उत्तम उरांव (30) व रवि उरांव (22) दौड़ते हुए आए और पीडिता को पकड़ लिया। उसकी सहेली वहां से भागने में सफल रही। पीडिता चिलाने लगी तो ,उत्तम उसके मुंह को अपने हथेली से कस कर दबा दिया और रवि चाकू निकालकर मेरे गले मे सटाते हुए चिलाने पर चाकू गला में घुसेड़कर जान से मारने की धमकी देने लगा।

जिससे डर कर वह चुप हो गई। जिसके बाद दोनो पीडिता उठा कर वहां से दूर सुरसा कोठारी पब्लिक स्कूल ले गए। जहां उत्तम स्कूल के गेट पर खड़ा हो कर पहरा देने लगा और रवि ने स्कूल के बरामदे में पीडिता के साथ मारपीट करते हुए दुष्कर्म करने लगा। करीब तीन चार घंटे के बाद किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देकर उसे छोड़ दिया। रवि पहले भी एक बार चाकू का भय दिखाकर मेरे साथ दुष्कर्म किया था। डर से परिवारवालों को नहीं बताई थी।

ऐसी घटनाओं से तो यही प्रतीत होता है कि आज भी महिलाएं कहीं न कहीं असुरक्षा की शिकार हैं।

कई परिवारों में तो ऐसी घटनाओं के खौफ के कारण ही महिलाओं को शिक्षा व बाहर की दुनिया से वंचित रखा जाता है तथा उसे जल्दी ही विवाह के बंधन में बाँध दिया जाता है। चंद लोगों की काली करतूतों की सजा उन हजारों बेगुनाह महिलाओं को दे दी जाती है, जो बुलंद हौसलों के साथ कुछ कर दिखाने के सपनों के लेकर घर की चहारदीवारी से बाहर निकलने की ख्वाहिश करती है।

क्या समाज के वो सभी कायदे-कानून आज ताक में रख दिए गए हैं, जो यह कहते हैं कि पर स्त्री को बुरी नजर से देखना व उसे छूना एक असामाजिक कृत्य है? समाज की वो मान-मर्यादा व भारतीय संस्कृति का वो चोला कहाँ गया जिसमें इंसानियत व सम्मान का भाव समाहित था? कैसे हमने वो चोला उतारकर जंगलराज को अपना लिया और मनमाने ढंग से अपने कानून बनाकर घर की बहू-बेटियों की इज्जत को सड़कों पर उछाल दिया?

आज जरूरत है कुछ ऐसे सख्त कानून बनाने की, जो महिलाओं के साथ आए दिन होती इन घटनाओं पर अंकुश लगा सकें व महिलाओं में अपने घरों से बाहर निकलकर अपने सपनों को पूरा करने के हौसले को मरने से बचा सके। आज महिलाओं की सुरक्षा का ठेका केवल महिला आयोग का ही नहीं बल्कि इस समाज के हर नागरिक का है, जिसके सहयोग के बगैर यह असंभव सा है।

15 सितम्बर 201 को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी ) की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2020 में हर दिन औसतन भारत भर में बलात्कार के लगभग 77 मामले दर्ज किए गए। वहीं, पूरे एक साल की बात करें तो रेप का कुल 28,046 ऐसी घटनाएं हुईं।

एनसीआरबी ने कहा है कि कुल मिलाकर, पिछले साल देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,71,503 मामले दर्ज किए गए, 2019 में 4,05,326 और 2018 में 3,78,236 मामले दर्ज किए गए थे। 2020 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल मामलों में से 28,046 बलात्कार की घटनाएं हुईं।
कुल पीड़ितों में से, 25,498 वयस्क थे, जबकि 2,655 की उम्र 18 साल से कम थी। वहीं, पिछले कुछ सालों की बात करें तो 2019 में 32033, साल 2018 में 33356 और साल 2017 में 32557 मामले सामने आए थे। वहीं, साल 2016 में बलात्कार के 38947 मामले सामने आए थे।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो साल 2020 में बलात्कार के मामले में राजस्थान पहले नंबर पर रहा है। राजस्थान में बलात्कार के सबसे अधिक 5,310 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश (2,769), मध्य प्रदेश (2,339), महाराष्ट्र (2,061) और असम (1,657) हैं।

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