Chief Minister Hemant Soren : राज्य में स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना जल्द : हेमंत

मुख्यमंत्री ने सेफ एड रिसपॉसब्ल माइग्रेशन इनटीवेटिव का किया शुभारम्भ

रांची, 16 दिसंबर । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कौशल विकास के तहत हुनर एवं रोजगार की बेहतर व्यवस्था तलाशने का काम सरकार निरंतर कर रही है। राज्य सरकार स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित किए जाने को लेकर विचार कर रही है। जल्द ही राज्य में स्किल यूनिवर्सिटी की भी स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री गुरुवार को झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में आयोजित सेफ एड रिसपॉसब्ल माइग्रेशन इनटीवेटिव के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जीवन के बेहतरी के लिए गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान, हम-आप सभी लोग माइग्रेट करते हैं। हमारे झारखंड राज्य से भी रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर श्रमिकों का दूसरे राज्यों एवं देशों में पलायन होता है लेकिन आज तक प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित और जवाबदेह पलायन के लिए कोई ठोस नीति अथवा व्यवस्था नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार का प्रयास है कि झारखंड से जो भी श्रमिक भाई एवं अन्य लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य अथवा देशों में जाते हैं, उनका हम पूरा डाटा बेस तैयार कर सके और नीति के तहत उन्हें विपत्ति के समय मदद पहुंचा सकें।

बेहतर जीवन के लिए माइग्रेट करना स्वाभाविक प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार के बेहतर साधन के लिए राज्य के लोग देश के अलग-अलग राज्यों एवं विदेशों में भी पलायन करते हैं। अपने जीवन स्तर को सकारात्मक दिशा की ओर ले जाने के लिए स्वाभाविक है कि हमें दूसरे जगहों पर पलायन करना पड़ता है। इन सभी चीजों को मद्देनजर रखते हुए माइग्रेशन पर राज्य सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए ठोस नियम-व्यवस्था बनाने का कार्य प्रतिबद्धता के साथ कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अधिकतर मजदूर एक निश्चित समय-सीमा के लिए पलायन करते हैं, परंतु कुछ ऐसे भी मजदूर हैं, जो लंबे समय तक दूसरे जगहों पर बसने भी जाते हैं। जो मजदूर एक निश्चित समय अवधि के लिए रोजगार के लिए बाहर जाते हैं उनके साथ क्या बीतता है यह कोरोना काल के समय हम सभी को एहसास हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक संक्रमण काल में भी राज्य सरकार ने कंट्रोल रूम की स्थापना कर प्रवासी मजदूरों को हर संभव सहायता प्रदान करने की कोशिश की है, जो मजदूर वापस घर आना चाहते थे उन्हें विभिन्न माध्यमों से घर लाने का भी कार्य सरकार ने किया था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी प्रवासी श्रमिक भाइयों की मृत्यु से संबंधित अप्रिय खबरें भी आती हैं। अगर दुर्भाग्यवश किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु होती है तो राज्य सरकार उनके दिवंगत शरीर को वापस उनके घर लाने की व्यवस्था करेगी तथा अंत्येष्टि का पूरा खर्चा राज्य सरकार ही वहन करेगी। इसके लिए सभी जिलों में कॉरपस फंड की व्यवस्था की जा रही है।

श्रमिकों के संरक्षण के लिए ई-श्रम पोर्टल कारगर

हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूरों को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के तहत प्रवासी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है ताकि विपत्ति के समय राज्य सरकार उन्हें तत्काल मदद पहुंचा सके। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रवासी श्रमिक भाइयों से अपील किया कि इस पोर्टल में वे अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य कराएं। वैसे प्रवासी श्रमिक जो दूसरे देशों में काम करते हैं उन्हें कैसे संरक्षित कर सके इस निमित्त केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे तो राज्य सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलायी जा रही है, जिससे यहां के श्रमिकों को उनके घर आसपास में ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

प्रवासी महिला श्रमिकों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रोजगार दी गई

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के बाद ऐसा भी देखा गया है कि सैकड़ों प्रवासी मजदूर राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़े हैं तथा बेहतर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। हाल के दिनों में पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या में भी कमी भी आयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश इत्यादि राज्यों से रेस्क्यू कर लाई गई युवतियों एवं महिलाओं को भी टेक्सटाइल इंडस्ट्री में रोजगार देने का काम राज्य सरकार ने हाल के दिनों में किया है। दो हजार नियुक्ति पत्र टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांटे गए थे, जिसमें 80 प्रतिशत महिलाएं थीं। इन सभी को दूसरे राज्यों की अपेक्षा ज्यादा वेतन एवं सुविधाओं से जोड़ने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रवासी श्रमिकों के लिए सम्मानजनक जीवन के साथ-साथ आवास, स्वास्थ्य और बीमा सहित अन्य सेवाओं को मजबूत करने की इच्छा जताई।

संक्रमण के दौरान झारखंड में सबसे बेहतर काम हुआ

इस अवसर पर श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में पूरे करना संक्रमण काल में झारखंड ने सबसे बेहतर कार्य कर दिखाया है। राज्य में आज तक प्रवासी श्रमिकों का सही-सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं था, परंतु हमारी सरकार ने वैश्विक महामारी के दौरान एक-एक प्रवासी श्रमिकों का डाटाबेस तैयार करने का काम किया है। कोविड-19 जब चरम पर था उस समय मुख्यमंत्री ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया तथा प्रवासी श्रमिकों को ट्रेन, बस, हवाई जहाज इत्यादि सेवाओं से घर वापस लाने का काम कर दिखाया।

राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने सेफ एड रिसपॉसब्ल माइग्रेशन इनटीवेटिव के सभी सहयोगियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव ने कहा कि ह्यूमन माइग्रेशन के कई पहलू हैं। माइग्रेशन सिर्फ नकारात्मक ही नहीं बल्कि सकारात्मक भी होता है। माइग्रेशन पुराने जमाने से चला आ रहा है। कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से में रह सकता है। लोग जीवन की बेहतरी के लिए पलायन करते हैं। राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को सुरक्षित बनाने हेतु पॉलिसी बनाने का काम किया है। मुझे विश्वास है कि सेफ एड रिसपॉसब्ल माइग्रेशन इनटीवेटिव मजदूरों के सुरक्षित पलायन में मील का पत्थर साबित होगा।

इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बीओसीडब्ल्यू के अंतर्गत विवाह सहायता योजना, मातृत्व प्रसुविधा योजना, अंत्येष्टि सहायता योजना, झारखंड निर्माण कर्मकार मृत्यु या दुर्घटना सहायता योजना एवं मेधावी पुत्र-पुत्री छात्रवृत्ति सहायता योजनाओं का लाभ सभागार में उपस्थित लाभुकों के बीच वितरित किया।

प्रवासी श्रमिकों को किस प्रकार मिलेगा सहायता

वर्तमान में सेफ एड रिसपॉसब्ल माइग्रेशन इनटीवेटिव पायलट प्रोजेक्ट के तहत दुमका, पश्चिमी सिंहभूम तथा गुमला के श्रमिकों के पलायन को ध्यान में रखकर नीति बनाई गई है। इन तीन जिलों से दिल्ली, केरल और लेह-लद्दाख इत्यादि जगहों में रोजगार के लिए गए प्रवासी श्रमिकों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इन सभी राज्यों से समन्वय स्थापित कर प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी हक सुनिश्चित किए जाएंगे। प्रवासी श्रमिकों का किसी भी प्रकार से शोषण न हो सके इस निमित्त नियम बनाई गई है। शुरुआती दौर में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद व्यवस्था के दायरे को और बड़ा बनाया जा सकेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो, मनरेगा आयुक्त बी.राजेश्वरी, श्रम आयुक्त ए. मुथुकुमार, एसआरएमए के सहयोगी फिया फाउंडेशन के स्टेट हेड जॉनसन टोपनो, एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस हैदराबाद डॉ अश्विनी, निदेशक सीएमआईडी विनय पीटर, एसोसिएट इन्वेस्टमेंट ओमीदयर नेटवर्क इंडिया एवं पीडीएजी के प्रतिनिधि एवं अन्य उपस्थित थे।

(हि.स.)

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