CNI Church Ranchi controversy: सीएनआई सिनाॅयड (synod) ने छोटानागपुर के बिशप बीबी बास्के के निर्णय को सही ठहराया

Insightonlinenews Team

पिछले कई महीनों से समाचार पत्रों के माध्यम से आमजनों में रांची के प्रतिष्ठित सीएनआई चर्च के विवादास्पद समाचार लोगों के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। पुरोहितों और अन्य पदाधिकारियों के बीच हो रहे विवाद से सीएनआई चर्च के निष्ठावान अनुयायी बहुत सतके में थे। दबीजुबान में जगह-जगह इस विवाद को तूल देने और चर्च की मर्यादा को धूमिल करने की पूरी जवाबदारी चर्च के एक पदाधिकारी जयंत अग्रवाल पर डाल रहे थे।

चर्च के पदाधिकारी जयंत अग्रवाल धीरे-धीरे अपनी पैठ बनाते हुए चर्च के बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हो गये थे और उसका भरपूर दुरूपयोग कर रहे थे इसी संदर्भ में बिशपों के समूह को उसपर कार्रवाई करनी पड़ी। उस कार्रवाई को भी सीएनआई चर्च के सिनाॅयड ने रोक दिया था लेकिन स्थिति स्पष्ट होने के बाद उस कार्रवाई पर सिनाॅयड ने अपनी मुहर लगा दी जो इस प्रकार हैं-

छोटानागपुर डायसिस के बिशप बीबी बास्के द्वारा लिए गए निर्णय को सीएनआई (चर्च ऑफ नार्थ इंडिया) सिनोड ने सही ठहराया है। इस संबंध में सिनोड दिल्ली के महासचिव रेव्ह एसडी लाल ने छोटानागपुर डायसिस के लिए गठित मॉडरेटर कमिश्नरी रेव्ह जोलजस कुजूर को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 10 जुलाई 2020 को सिनोड ने जो पत्र जारी किया था, उसे वापस लेते हैं जिसमें बिशप द्वारा प्रोफेसर जयंत अग्रवाल को डायसिस के सभी पदों से हटाए जाने पर रोक लगाई गई थी और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के आने तक डायसिस के निर्णय को कुछ दिनों तक रोके जाने की बात कही थी।

परंतु अब सिनोड ने स्पष्ट कर दिया कि डायसिस का निर्णय सही है और सिनोड की ओर से कोई भी जांच दल छोटानागपुर डायसिस नही जाएगा। साथ ही सीएनआई मेल-मिलाप की दिशा में काम करेगा। ज्ञात हो कि जयंत अग्रवाल को लेकर पूरे डायसिस में असंतोष पनप गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिशप ने जयंत को डायसिस के 18 पदों से हटा दिया था। इसके बाद सिनोड ने डायसिस के इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज की थी। परंतु इस अपत्ति को सिनोड ने वापस ले लिया और जयंत अग्रवाल के मामले में डायसिस और बिशप द्वारा लिए गए निर्णय को कलीसिया हित में सही ठहराया है।

ज्ञातव्य हो कि जयंत अग्रवाल को जिन रांची सीएनआई डायसिस के 18 महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया गया था उनमें से कुछ एक इस प्रकार हैं- संत पाॅल काॅलेज सचिव, छोटानागपुर एजुकेशन सोसाइटी सचिव, बिशप स्कूल ग्रुप सचिव और अन्य।

सीएनआई चर्च के अनुयायियों एवं पुरोहितों का मनना था कि जयंत अग्रवाल चर्च की प्रतिष्ठा को लगातार धूमिल कर रहे थे। जयंत अग्रवाल जहां कुछ चर्च विरोधी हथकंडे अपना रहे थे वहीं चर्च में शांति व्यवस्था को भंग करने के लिए गुटबाजी में लीन थे जिसका प्रतिकूल प्रभाव चर्च की मर्यादा और धार्मिक आस्था पर पड़ रहा था। ऐसी स्थिति में बिशपजनों ने मिलकर जो निर्णय लिया उसका अधिकांश चर्च के अनुयायीयों ने स्वागत किया।

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