वैवाहिक जीवन की कामक्रीड़ा युगलों के लिए पूर्ण सुखदायी पूर्ण स्वास्थ्यप्रद

पुरुषों में बढ़ती है धैर्यवान होने की क्षमता

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वैश्विक स्तर पर अलग-अलग देशों के अलग-अलग समाजों में यौन-जीवन में संतुलन और नियमितता के सुखदायक और संतोषप्रद माना जाता है। समाजशास्त्री और मनोविज्ञानी यह स्वीकार करते हैं कि यौन-जीवन को उत्मोतम बनने में विवाह का पहत्वपूर्ण स्थान है।

विवाह से परिवार की नींव खड़ी होती है जिससे स्त्री-पुरुष अब पति-पत्नी के रूप में निर्द्धन्द्व काम क्रीड़ा का आनंद लेते हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार की वर्जना नहीं होती। विशेषकर भारत सहित परंपरागत जीवन मूल्यों के साथ पारिवारिक जीवन जीने वाले देशों में स्त्री-पुरुषों का यौन-जीवन अधिक सक्रिय और स्वास्थ्यप्रद होता देखा गया है। ऐसा इसलिए कि विवाह के साथ पति-पत्नी के बीच यौन-क्रीड़ा पूरी तरह निःसंकोच हो।

इसका विवाहित स्त्री-पुरुषों के स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव दिखता है। नवविवाहित युवतियों के शरीर के हर अंग खिल जाते हैं तो पुरूष भी अधिक उत्फुल दिखते हैं और उनका शरीर सौष्ठन भी देखते बनता है। कृशकाय स्त्री भी विवाह के बाद नियमित यौन सुख भोगते ही अधिक रमणीय और लावण्या पूर्व हो जाती है। इसका कारण निश्चित रूप से शरीर की अंतःश्राणी ग्रंथियों में स्वास्थ्यप्रद स्राव होने लगता है जो संतोषप्रद और सुखकर काम-कीड़ा का प्रभाव माना जाता है।

ऐसे जीवन पर नकारात्मक रासायनिक स्रावों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। जबकि व्यभिचार पूर्ण या बिना विवाह के किसी भी साथ के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करते हुए दिन या जीवन काट रहे स्त्री-पुरुषों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त, अनियमित और अवसाद से भरा होता है। ऐसा जीवन व्यभिचार की श्रेणी में आता है। ऐसे जीवन के उजड़ने में कतई देर नहीं लगती। इससे यौन-जीवन भी असंतुलित और अनियमित हो जाता है। रोग भी ग्रस लेते हैं।

हांलाकि कुछ विशेषज्ञ उपरोक्त मान्यता के अलग अपने विचार स्थापित करने में पीछे नहीं हैं। यह अनुसंधान भी मानता है कि शादी के बाद अक्सर लोगों का वजन बढ़ जाता है। आपने भी शायद ध्यान दिया होगा कि शादी के 3 से 6 महीने के भीतर ही आपका भी थोड़ा वजन बढ़ा था और दोस्तों ने इसका कारण सेक्स बताया था। आपने उनकी बात पर विश्वास कर लिया था, लेकिन उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुए थे। तो इसके पीछे क्या है सही कारण और कौन है जिम्मेदार सेक्स या कुछ और आइए जानते हैं।

अगर आप सोचते हैं कि सेक्स के कारण वजन बढ़ता है, तो यह बिल्कुल गलत है। यह एक बहुत बड़ा मिथक है। वजन बढ़ने का सेक्स से कोई कनेक्शन नहीं है, पर आपके सेक्स हार्मोंस से है। सेक्स हार्मोंस में असंतुलन के कारण ही वजन बढ़ता है। क्योंकि सेक्स अपने आप में एक बेहतरीन वर्कआउट है। इससे कैलोरीज बर्न होती हैं, इसलिए इसका आपके वजन बढ़ने से कोई संबंध नहीं।

  • क्यों असंतुलित होते हैं हार्मोंस?

हार्मोंस के असंतुलन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-जेनेटिक्स, स्ट्रेस, डायट, लाइफस्टाइल, अन्य हार्मोंस आदि। सेक्स हार्मोंस एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टोस्टेरॉन और डीएचइए आदि। इइके अलावा महिलाओं में बढ़ते वजन का कारण पीसीओडी या प्रीमैच्योर पेरीमेनोपॉज भी हो सकता है।

  • जानें सेक्स हार्मोंस के बारे में

डीएचइए: यह एक ऐसा हार्मोन है, जो महिलाओं व पुरुषों के सेक्स हार्मोंस के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। इसकी कमी के कारण भी वजन बढ़ता है।

एस्ट्रोजन: महिलाओं की ओवरीज और एड्रेनल ग्लैंड से मिलनेवाले इस हार्मोन के कारण भी महिलाओं का वजन बढ़ता है।

प्रोजेस्टेरॉन: यह भी एस्ट्रोजन की तरह ही काम करता है। महिलाओं की सेक्सुअल मैच्योरिटी को बढ़ाने के साथ ही यह प्रेग्नेंसी के लिए महिलाओं के शरीर को मजबूत बनाता है। अगर शरीर में प्रोजेस्टेरॉन की कमी है, तो एस्ट्रोजन अनियंत्रित हो जाता है, जिसके कारण वजन बढ़ना है।

हार्मोंस असंतुलित होेने के लक्षण

  • मर और जांघों के पास फैट्स जमा होना
  • पीरियड्स की डेट का आगे-पीछे होना
  • हॉॅट फ्लैशेज
  • वेजाइना का ड्राई होना
  • नींद न आना
  • मूड स्विंग्स
  • सेक्स ड्राइव में कमी आना
  • एंजायटी या डिप्रेशन
  • लाइफस्टाइल में बदलाव

शादी के बाद अक्सर लोग कंफर्ट जोन में चले जाते हैं और फिटनेस को पीछे छोड़ देते हैं, जिसके कारण भी उनका वजन बढ़ता है। साथ ही शादी के शुरूआती दिनों में कपल्स काफी घूमते-फिरते और बाहर खाते हैं, जिसके कारण भी वजन बढ़ता है।
हार्मोंस संतुलित रहें, उसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। स्ट्रेस, एंजायटी और डिप्रेशन से बचने की कोशिश करें। जंक फूड और तला-भुना हुआ खाना अवॉइड करें।

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