Congress always retain its national status: कांग्रेस की राष्ट्रीय छवि अनेक उथल-पुथल के बाद भी आने वाले समय में बरकरार रहेगी

रोशी की रिपोर्ट

कांग्रेस से समय-समय पर विछुब्ध होकर बड़े या छोटे नेता पिछले दो दशकों से या तो दूसरी पार्टियों का दामन थाम रहे हैं अथवा अपनी निजी पार्टी बना रहे हैं। अपनी पार्टी बनाने के बाद किसी-किसी राज्य में सत्ता भी हासिल करने में कामयाब हो रहे हैं। वैसे तो नेताओं की सूची बहुत बड़ी है पर जो बड़े नेता छोड़कर गये और उन्होंने पार्टी बनाई उनमें प्रमुख हैं शरद पवार, ममता बनर्जी और हाल में गये कैप्टन अमरिंदर सिंह।

शरद पवार ने जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की स्थापना की थी उसका नाम है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और वो पूरे देश में अपनी उपस्थिति नहीं दर्ज कर पाई और महाराष्ट्र में सिमट कर रह गई। आज की परिस्थिति में वो महाराष्ट्र में गठबंधन का एक हिस्सा है। इसके पूर्व भी वो राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बनी।

ममता बनर्जी ने क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिम बंगाल को मद्देनजर रखते हुये तृणमूल कांग्रेस का गठन किया और जो पश्चिम बंगाल में 2011 को सत्ता में काबिज हुई। ये एक क्षेत्रीय पार्टी की सफलता का बेमिशाल सफर है। अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए एन-केन-प्रकारेण, जोड़-तोड़ कर रही हैं। छिटपुट सफलता भी मिल रही है पर ऐसा नहीं लगता कि तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैंठ बना पायेगी। इस तोड़-जोड़ में जहां बीजेपी से भी घुसपैठियों को जगह-जगह खींच रही हैं वहीं कांग्रेस से भी बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं। मुख्य उद्देश्य यह लगता है कि वो राष्ट्रीय स्तर पर विरोधी दलों में तृणमूल कांग्रेस को सबसे अग्रणी पार्टी के रूप में पेश करना चाहती है या बनाना चाहती है।

पिछले दो दशकों में देश में बहुत से उतार-चढ़ाव हुये और आजादी के बाद भी जब कांग्रेस सत्ता में आई तो भी कुछ दशकों बाद कांग्रेस में मतभेद उभरे तथा असामान्य रूप से टूट-फूट हुई लेकिन कांग्रेस की राष्ट्रीय पहचान पर कोई आंच नहीं आई।

निष्कर्ष

भावार्थ यह है कि कांग्रेस से निकले नेताओं की जो फौज और अन्य मुख्य विरोधी दलों का गठजोड़ भी राष्ट्रीय पैमाने पर कांग्रेस बिना भाजपा को सत्ता से बेकाबू नहीं कर सकता, ना ही कांग्रेस की राष्ट्रीय पहचान आने वाले समय में मिटाने में कामयाब हो सकता है।

कांग्रेस की पहचान देश की आजादी की पहचान है जो आज भी जनमानस के दिलों-दिमाग में विचरण करती है। इसलिए ममता बनर्जी या शरद पवार सरिके नेतागण कांग्रेस की राष्ट्रीय छवि को आने वाले अन्य चुनावों में भी नहीं धुमिल कर पायेंगे और राष्ट्रीय छवि अभी बरकरार रहेगी ये मानना है इनसाईट ऑनलाइन न्यूज का। इसलिए अतिशयोक्ति यह कहने में नहीं है कि कांग्रेस सदा से राष्ट्रीय पार्टी थी और रहेगी।

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