कांग्रेस ने किया था वक्फ को संविधान से ऊपर शक्ति देने का पापः अमित शाह
नई दिल्ली, 2 अप्रैल । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वक्फ विधेयक में 2013 में संशोधन कर वक्फ को संविधान से भी ऊपर असीमित शक्ति देने का पाप किया था । इसके कारण 2013 से 2025 तक वक्फ की संपत्ति में बड़ा इजाफा हुआ है। साथ ही उस समय हड़पी गई जमीन के खिलाफ पीड़ित का न्यायालय के पास जाने का अधिकार भी छीन लिया गया था।
गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन के बाद से 2025 के बीच में वक्फ संपत्ति में 21 लाख एकड़ जमीन की वृद्धि हुई है जबकि यह 2013 तक केवल 18 लाख एकड़ थी।
उन्होंने कहा, “सरकार या संगठन का कोई निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे हो सकता है? जिस व्यक्ति की जमीन ली गई है, वह कहां जाएगा? कांग्रेस ने वोट-बैंक की राजनीति के लिए ऐसा किया और हम इसे अस्वीकार कर रहे हैं। शिकायतों वाला कोई भी व्यक्ति अदालत से संपर्क कर सकता है।”
शाह ने कहा कि विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाया गया है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्ति का बेहतर प्रबंधन है ताकि इससे होने वाली आमदनी को बढ़ाया जा सके। आमदनी का इस्तेमाल मुसलमानों के विकास के लिए होगा लेकिन वर्तमान में पैसा चोरी हो रहा है। संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद इस चोरी को रोकेंगे।
इस संबंध में उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2001-12 के बीच दो लाख करोड़ की वक्फ की संपत्ति निजी संस्थानों को सौ साल की लीज पर हस्तांतरित कर दी गई। बेंगलुरु में उच्च न्यायालय को बीच में दखल देना पड़ा और 602 एकड़ भूमि को जब्त करने से रोकना पड़ा। ये पैसा देश के गरीब मुसलमानों का है, ये धन्नासेठों की चोरी के लिए नहीं है।
गृह मंत्री ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बयान का उल्लेख किया और कहा कि तब उन्होंने कहा था कि वह वक्फ पर एक सख्त कानून चाहते थे और उन लोगों को जेल में डालना चाहते थे, जो चोरी कर रहे थे। नरेन्द्र मोदी ने लालू प्रसाद यादव की इच्छाओं को पूरा किया है।
विपक्ष पर भ्रम फैलाने और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी पिछड़े वर्गों या मुसलमानों के बारे में चिंतित नहीं हैं। वर्षों से उन्होंने जातिवाद और तुष्टीकरण के आधार पर काम किया। इन समुदायों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय एक सोची समझी रणनीति के माध्यम से परिवार-केंद्रित राजनीति को बढ़ावा दिया। 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जातिवाद, तुष्टीकरण और भाई -भतीजावाद को मिटा दिया है और बजाय विकास की राजनीति की स्थापना की है।
शाह ने इस दौरान स्पष्ट किया कि संसद सर्वोपरि है और उसमें पारित कानून को सभी को मानना होगा। एक सदस्य ने कहा था कि अल्पसंख्यक समुदाय इस कानून को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “कोई भी कैसे कह सकता है, ‘हम इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे’? यह भारत सरकार का एक कानून है, और यह सभी पर लागू होता है। यह सभी के लिए बाध्यकारी है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।”
गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ की अवधारणा इसके उपयोग पर आधारित होनी चाहिए और उपयोग की जा रही भूमि का अभी तक पंजीकरण हो जाना चाहिए था । लेकिन मुगल काल की प्रथाओं के आधार पर आज किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता।
गैर मुस्लिम को शामिल किए जाने पर शाह ने वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों कानून के तहत किसी द्वारा वक्फ को दान की गई संपत्ति की प्रशासन देखभाल करेगा और सुनिश्चित करेगा कि सही मकसद के लिए उसका इस्तेमाल हो। इसके अलावा मुस्लिमों की धार्मिक गतिविधियों के लिए दान के माध्यम से गठित ट्रस्ट में सरकार का हस्तक्षेप का कोई इरादा नहीं है। मुतावल्ली और वकीफ मुस्लिम समुदाय से होगा।
अमित शाह ने कहा कि विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाया गया है। 2013 में हुए संशोधन में दोनों सदनों में 5.4 से 5.5 घंटे चर्चा की गई थी। इसके विपरीत हम विधेयक पर लोकसभा और राज्यसभा में मिलाकर कुल 16 घंटे चर्चा करायेंगे।