Congress Update : केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों के रीढ़ पर प्रहार किया है -आरपीएन सिंह

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किसान अधिकार दिवस पर कांग्रेस का राजभवन मार्च

रांची, 15 जनवरी : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर शुक्रवार को प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव व विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के नेतृत्व में पार्टी की ओर से रांची में किसान अधिकार दिवस का आयोजन किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमत को वापस लेने, बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने को लेकर आयोजित राजभवन मार्च में रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता, सांसद गीता कोड़ा, प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये हजारों कार्यकर्ता शामिल हैं। इस दौरान मोरहाबादी मैदान से लेकर राजभवन मार्च तक आयोजित प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ता तीन नये कृषि कानून, बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल कानून के खिलाफ अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लिये हुए थे।

मौके पर आरपीएन सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों के रीढ़ पर प्रहार किया है। अब बिना विलंब किये केंद्र सरकार इस नये काले कानून को वापस लें। उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार ने अपने वायदे के मुताबिक किसानों का ऋण माफ किया। केंद्र में भी जब-जब कांग्रेस की सरकार बनी किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी किया गया। यूपीए सरकार में 70 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किये गये, लेकिन अब केंद्र की भाजपा सरकार किसानों के साथ वादाखिलाफी में जुटी है।

रामेश्वर उरांव ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर संविधान को मानते हैं, तो उन्हें किसानों की मांग को तुरंत मांग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग जायज है और हर तरीके से उचित है। उन्होंने कहा कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य को जारी रखने, मंडी को बचाने और कांट्रेक्ट फॉर्मिंग का विरोध कर रहे है। किसानों की यह तीनों मांगों को तत्काल मान लेना चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा नेताओं की ओर से यह अफवाह फैलाने की कोशिश की जा रही है कि इस किसान आंदोलन से झारखंड का कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन आज राजभवन मार्च में गांव-देहात से आ रहे किसानों को देख कर यह सहर्ष समझा जा सकता है कि यह आंदोलन पूरे देश के किसानों का है। सभी केंद्र सरकार के इस काले कानून से खासे नाराज है। उरांव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूरे ऑर्डर को पढ़ने के बाद आंदोलनरत किसान संतुष्ट नहीं है। सुप्रीमो कोर्ट ने तीनों कृषि कानून पर स्टे जरूर लगाया है, लेकिन उसके बाद क्या होगा। इसे लेकर अनिश्चितता बरकरार है। यदि समिति में शामिल चार में से तीन विशेषज्ञ भी यह मान ले कि कानून सही है, तो फिर उच्चतम न्यायालय का अगला कदम क्या होगा।

इसे लेकर सभी चिंतित है।इसलिए किसान की मांग पूरी हो, इसके लिए पहले इन कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। यदि मंडी में कोई खामी है, तो उसे दूर करने का प्रयास होना चाहिए। इस मौके पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि 51 दिन से किसान आंदोलनरत है। तीनों काले कानून को वापस लिया जाना ही इसका समाधान है। उन्होंने कहा कि बार-बार किसान प्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार बातचीत कर रही है, लेकिन इसका कोई फलाफल नहीं मिल पा रहा है। इसलिए पार्टी भी यह मांग करती है कि जल्द से जल्द तीनों नये कृषि कानून को वापस ले लिया जाए। केंद्र सरकार किसानों को विश्वास में लेने में पूरी तरह से असफल हो चुकी है।

हिन्दुस्थान समाचार

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