कोरोना स्वाभिमानी है

चीन से चला और पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर भारत पहुंच गया है

ये जो कोरोना है, बहुत स्वाभिमानी है। इसका न रूप है न रंग। कोई आकृति भी नहीं है। लेकिन आपके बुलाने से नहीं आएगा। चाहे निमंत्रण पत्र भेजिए या वाट्सएप, हरगिज नहीं आएगा। टेलीफाने, मोबाइल उठाता ही नहीं है। अखबार पढ़ता नहीं है। वह टीवी भी नहीं देखता है। इसलिए उसे बुलाने के लिए इश्तेहार देना भी फिजूल है। आप घर में रहते हुए लाख जतन कीजिए, नहीं आएगा। ऐसे मगरूर को बुलाना ही क्यों? ऐसों की मेहमाननबाजी की बेवकूफी क्यों? फिर भी यदि कोई इसके लिए बेचैन है तो उसे भीड़ में जाना होगा।

कोरोना ने जिसका अतिथ्य स्वीकार किया है, उसके नजदीक जाना होगा। उससे हाथ मिलाना होगा। वह हाथ जोड़कर नमस्ते करने से नहीं मानता है। वह विदेशी जो विदेशों में हाथ मिलाने और आलिगन की परम्परा है। इस परम्परा का निर्वहन करने वालों पर वह पसीज जाता है। वह ऐसे स्वागकर्ताओं का हाथ पकड़ता है तो छोड़ता नहीं है। उसके नाक का बाल बन जाता है।

आंखों का तारा बन जाता है। अंततः वह गले पड़ जाता है। फिर गले में उतर जाता है और फेफड़ों में समा जाता है। जब तक आपको अपनी भूल का पता चलेगा, तब तक आपकी सांस बंद कर देगा। यह शरीर पर सवार होकर आता है और शहीर ही खत्म कर देता है। यह एक विषबेल है। विषबेल को तो हम जानते हैं, पहचानते हैं। लेकिन यह रूपहीन है।

इसके पैर नहीं, लेकिन चलता है बहुत तेज। देखाई नहीं दे रहा हैं, चीन से चला और पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर भारत पहुंच गया है। इसके मुंह नहीं हैं, लेकिन इसका भोजन सिर्फ और सिर्फ मानव शरीर है। खाता भी बहुत तेजी से है। यह अगम-अगोचर है। पूरी दुनिया इसके रहस्यीइघटन में लगी है।

बड़े-बड़े नामी लोग, संस्थान अभी नेती-नेती ही कह रहे हैं और यह अद्टहास कर रहा है। इसके कारक और कारण का भी किसी को ज्ञान नहीं है। जब ज्ञान होगा, तक तक यह भारी नुकसान कर चुका होगा। बताया जा रहा है कि साबुन से रगड़-रगड़ कर हाथ धोइए तो यह घबराकर भाग जाएगा। लेकिन जब हम इसे स्वागत-सत्कार के साथ अपने शरीर पर लाकर घर में ले आएंगे तो यह साबुन या सेनेटाइजर से नहीं भागेगा। यह घर में आ जाये और कुछ करे नहीं, ऐसा हो नहीं सकता।

इसके निशाने पर अमूमन सीनियर सिटिजन और शुगर, बीपी वाले होते हैं। लेकिन यह अपनी औकात पर आ जाए तो उम्र-जाति और धर्म, भेद नहीं करता है। इसलिए इसे दावत मत दीजिए। बेमतबल बाहर मत निकलिए। दवाई, दूध, सब्जी, ग्रोसरी वगैरह के लिए निकलना भी पड़े तो भीड़ से बचिए। काहे कि यह कोरोना है, जरा फासले से मिला करो।

यह मेहमान खुद आपके दरवाजे पर दस्तक नहीं देता है। लेकिन अगर आप इसे बाहर से लादकर घर ले आएंगे तो यह दो काम जरूर करेगा या तो आपको अस्पताल भेज देगा या अड़ जाए तो फोटो फ्रेम में। इसलिए घर पर रहिए, ऐसे जानलेवा मेहमान को ले आने वाली भीड़ में मत जाइए। आज कल कभी अच्छे लोग सही कह रहे हैं।

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