Covid-19 Vaccine: वैक्सीन की दो अरब ख़ुराकों की ख़रीदारी तय

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने शुक्रवार को कहा है कि कोविड-19 महामारी का अन्त सामने नज़र आने लगा है, मगर साथ ही हमें ये नहीं भूलना होगा कि ऐहतियात अब भी बहुत ज़रूरी है. संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने इस ख़बर का भी स्वागत किया कि वैश्विक वैक्सीन गठबन्धन-कोवैक्स ने महामारी की वैक्सीन की लगभग 2 अरब ख़ुराकों की ख़रीदारी के लिये तैयारियाँ की हैं.

कोवैक्स 190 देशों के समर्थन से शुरू गई एक वैश्विक पहल है जिसके तहत कोविड-19 महामारी की वैक्सीन सभी देशों को समानता के स्तर पर मुहैया कराने का लक्ष्य है, और इस कार्यक्रम के तहत ये वैक्सीन वर्ष 2021 की पहली तिमाही के दौरान उपलब्ध हो जाने की उम्मीद जताई गई है.

इस कार्यक्रम के तहत, अगले वर्ष के मध्य तक, कोविड-19 महामारी की वैक्सीन की इतनी ख़ुराकें उपलब्ध करा दी जाएँगी कि सभी भागीदार देशों में स्वास्थ्य व सामाजिक देखभाल कर्मियों की हिफ़ाज़त की जा सकेगी.
ये वो देश होंगे, जिन्होंने इस समय सीमा के भीतर वैक्सीन की उपलब्धता की इच्छा प्रकट की है.
अन्य देशों की लगभग 20 प्रतिशत आबादी की ज़रूरतें पूरी करने के लिये, समुचित मात्रा में वैक्सीन, वर्ष 2021 के अन्त और बाक़ी वर्ष 2022 में मुहैया कराई जाएगी.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को एक वर्चुअल प्रेस वार्ता में कहा, “ये एक बहुत अच्छी ख़बर है और वैश्विक स्वास्थ्य का रास्ते में एक मील का पत्थर भी.”
“ये समय कुछ तसल्ली देने वाला है कि महामारी का अन्त नज़दीक नज़र आ रहा है, मगर ये ख़याल रखने का भी है कि हम अपनी ऐहतियात बरतने में कोई क़सर ना छोड़ें.”
“ख़ुद को, और दूसरों को सुरक्षित व स्वस्थ रखने के प्रयासों में, हम सभी बराबर के ज़िम्मेदार हैं, यहाँ तक कि अवकाश व छुट्टियों के दौरान भी.”
महानिदेशक टैड्रॉस ने कहा, “आज की ख़बर के साथ, सुरंग की दूसरे छोर पर नज़र आने वाली रौशनी कुछ और ज़्यादा चमकीली हो गई है, मगर हम अभी वहाँ तक नहीं पहुँचे हैं. और हम सब वहाँ एक साथ ही पहुँचेंगे.”
उड़ान के लिये मुस्तैद
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि वो वर्ष 2021 में, हर महीने कोविड-19 की वैक्सीन की 850 टन ख़ुराकों का परिवहन करने के लिये सक्षम व मुस्तैद है. ये क्षमता, संगठन की आम औसत ढुलाई क्षमता से दोगुना ज़्यादा होगी.
संगठन ने कहा है कि इसमें से ज़्यादातर ढुलाई मौजूदा व्यावसायिक हवाई उड़ानों के ज़रिये की जा सकेंगी, मगर जहाँ ज़रूरत हुई, वैकल्पिक चार्टर उड़ानों का सहारा भी लिया जाएगा.
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हैनरिएटा फ़ोर का कहना है, “यह एक विशाल और ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है. इस कार्य की विशालता परेशान करने वाली है, और दाँव पर भी बहुत कुछ लगा है, शायद अतीत से कहीं ज़्यादा, मगर हम इस ज़िम्मेदारी को निभाने के लिये पूरी तरह मुस्तैद हैं.”
यूनीसेफ़ के अनुसार, वैश्विक वैक्सीन गठबन्धन – गावी के समर्थन से, निम्न आय वाले देशों में 70 हज़ार शीतल आपूर्ति फ़्रिजों की ख़रीद और उन्हें वर्ष 2021 के अन्त तक स्थापित किया जाएगा. इनके ज़रिये कोविड-19 महामारी की वैक्सीन की उपलब्धता का दायरा बढ़ाया जाएगा जिसके लिये 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान की ज़रूरत होती है.

यूनीसेफ़ ने बताया है कि इनमें से लगभग आधे फ़्रिज सौर ऊर्जा से चलेंगे.
WHO के महानिदेशक ने कहा है कि ये समझना बहुत ज़रूरी है कि वैक्सीन मौजूदा ऐहतियाती उपायों का ही हिस्सा बनेगी, नाकि उनकी जगह लेगी, यानि वायरस को फैलने से रोकने और ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये इसके संक्रमण को रोकने के लिये फिलहाल किये जा रहे उपायों को अपनाते रहना बहुत ज़रूरी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को कहा था कि कोवैक्स के ज़रिये वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही इस समय, सबसे किफ़ायती सौदा है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने शुक्रवार को कहा है कि कोविड-19 महामारी का अन्त सामने नज़र आने लगा है, मगर साथ ही हमें ये नहीं भूलना होगा कि ऐहतियात अब भी बहुत ज़रूरी है. संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने इस ख़बर का भी स्वागत किया कि वैश्विक वैक्सीन गठबन्धन-कोवैक्स ने महामारी की वैक्सीन की लगभग 2 अरब ख़ुराकों की ख़रीदारी के लिये तैयारियाँ की हैं.

कोवैक्स 190 देशों के समर्थन से शुरू गई एक वैश्विक पहल है जिसके तहत कोविड-19 महामारी की वैक्सीन सभी देशों को समानता के स्तर पर मुहैया कराने का लक्ष्य है, और इस कार्यक्रम के तहत ये वैक्सीन वर्ष 2021 की पहली तिमाही के दौरान उपलब्ध हो जाने की उम्मीद जताई गई है.

इस कार्यक्रम के तहत, अगले वर्ष के मध्य तक, कोविड-19 महामारी की वैक्सीन की इतनी ख़ुराकें उपलब्ध करा दी जाएँगी कि सभी भागीदार देशों में स्वास्थ्य व सामाजिक देखभाल कर्मियों की हिफ़ाज़त की जा सकेगी.

ये वो देश होंगे, जिन्होंने इस समय सीमा के भीतर वैक्सीन की उपलब्धता की इच्छा प्रकट की है.

अन्य देशों की लगभग 20 प्रतिशत आबादी की ज़रूरतें पूरी करने के लिये, समुचित मात्रा में वैक्सीन, वर्ष 2021 के अन्त और बाक़ी वर्ष 2022 में मुहैया कराई जाएगी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को एक वर्चुअल प्रेस वार्ता में कहा, “ये एक बहुत अच्छी ख़बर है और वैश्विक स्वास्थ्य का रास्ते में एक मील का पत्थर भी.”

“ये समय कुछ तसल्ली देने वाला है कि महामारी का अन्त नज़दीक नज़र आ रहा है, मगर ये ख़याल रखने का भी है कि हम अपनी ऐहतियात बरतने में कोई क़सर ना छोड़ें.”

“ख़ुद को, और दूसरों को सुरक्षित व स्वस्थ रखने के प्रयासों में, हम सभी बराबर के ज़िम्मेदार हैं, यहाँ तक कि अवकाश व छुट्टियों के दौरान भी.”

महानिदेशक टैड्रॉस ने कहा, “आज की ख़बर के साथ, सुरंग की दूसरे छोर पर नज़र आने वाली रौशनी कुछ और ज़्यादा चमकीली हो गई है, मगर हम अभी वहाँ तक नहीं पहुँचे हैं. और हम सब वहाँ एक साथ ही पहुँचेंगे.”

उड़ान के लिये मुस्तैद
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि वो वर्ष 2021 में, हर महीने कोविड-19 की वैक्सीन की 850 टन ख़ुराकों का परिवहन करने के लिये सक्षम व मुस्तैद है. ये क्षमता, संगठन की आम औसत ढुलाई क्षमता से दोगुना ज़्यादा होगी.

संगठन ने कहा है कि इसमें से ज़्यादातर ढुलाई मौजूदा व्यावसायिक हवाई उड़ानों के ज़रिये की जा सकेंगी, मगर जहाँ ज़रूरत हुई, वैकल्पिक चार्टर उड़ानों का सहारा भी लिया जाएगा.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हैनरिएटा फ़ोर का कहना है, “यह एक विशाल और ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है. इस कार्य की विशालता परेशान करने वाली है, और दाँव पर भी बहुत कुछ लगा है, शायद अतीत से कहीं ज़्यादा, मगर हम इस ज़िम्मेदारी को निभाने के लिये पूरी तरह मुस्तैद हैं.”

यूनीसेफ़ के अनुसार, वैश्विक वैक्सीन गठबन्धन – गावी के समर्थन से, निम्न आय वाले देशों में 70 हज़ार शीतल आपूर्ति फ़्रिजों की ख़रीद और उन्हें वर्ष 2021 के अन्त तक स्थापित किया जाएगा. इनके ज़रिये कोविड-19 महामारी की वैक्सीन की उपलब्धता का दायरा बढ़ाया जाएगा जिसके लिये 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान की ज़रूरत होती है.

यूनीसेफ़ ने बताया है कि इनमें से लगभग आधे फ़्रिज सौर ऊर्जा से चलेंगे.

WHO के महानिदेशक ने कहा है कि ये समझना बहुत ज़रूरी है कि वैक्सीन मौजूदा ऐहतियाती उपायों का ही हिस्सा बनेगी, नाकि उनकी जगह लेगी, यानि वायरस को फैलने से रोकने और ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये इसके संक्रमण को रोकने के लिये फिलहाल किये जा रहे उपायों को अपनाते रहना बहुत ज़रूरी है.

साभार : UN News Hindi

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