CSW: कॉर्पोरेट हस्तियों को यूएन प्रमुख का सन्देश – लैंगिक समानता समय की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने तमाम कॉर्पोरेट हस्तियों से लैंगिक समानता हासिल करने का आग्रह करते हुए, निजी क्षेत्र और पूरे समाज के लिये, इसके लाभों को भी रेखांकित किया है. यूएन प्रमुख ने, मंगलवार को, महिला स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के आयोग (CSW) के 65वें सत्र के दौरान आयोजित ‘लक्ष्य लैंगिक समानता’ कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश में, ये अपील की.

‘लक्ष्य लैंगिक समानता’, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसके तहत, व्यवसायों को, टिकाऊ और सामाजिक ज़िम्मेदार नीतियाँ अपनाने के लिये, समर्थन दिया जाता है.
यूएन प्रमुख ने कहा, “हमारी विशाल चुनौतियों का समाधान तलाश करने के लिये, दुनिया को, महिलाओं की प्रतिभाओं और दृष्टिकोणों की आवश्यकता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करने से लेकर, व्यवस्थागत नस्लवाद का मुक़ाबला करने व जलवायु परिवर्तन से निपटने तक.”
“इसीलिये, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट और संयुक्त राष्ट्र की ख़ुद की व्यवस्था के लिये, लैंगिक समानता एक रणनैतिक प्राथमिकता है. लैंगिक समानता का मतलब है – गम्भीरता. आइये, हम इसे एक वास्तविकता बनाने के लिये एकजुट हो जाएँ.”
एक नैतिक कर्तव्य
यूएन महासचिव ने दोहराते हुए कहा कि लैंगिक समानता, आवश्यक रूप से, “शक्ति का एक प्रश्न है”. चाहे, वो सार्वजनिक क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र, सभी जगह, पुरुषों का ही दबदबा है.
उन्होंने कहा, “निजी क्षेत्र के लिये, महिलाओं की समान भागीदारी और समान नेतृत्व, एक नैतिक कर्तव्य और कारोबारी अनिवार्यता, दोनों ही हैं.”
“जब महिलाओं के पास आय व संसाधन होते हैं तो वो अधिक सम्भावना के अनुसार, ऐसे विकल्पों में निवेश करने का रास्ता चुनती हैं जिनसे उनके परिवारों व समुदायों को लाभ पहुँचे. अनुभव ये भी दिखाता है कि जिन कारोबारों के कॉर्पोरेट बोर्ड्स में महिलाओं का अच्छी संख्या में प्रतिनिधित्व होता है, वो ज़्यादा स्थिर व लाभप्रद होते हैं.”
एंतोनियो गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि सैकड़ों कम्पनियाँ, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट और यूएन वीमैन द्वारा 2010 में शुरू किये गए, महिला सशक्तिकरण सिद्धान्तों को लागू कर रही हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हज़ारों अन्य कम्पनियाँ भी जल्द ही ऐसा करेंगी.
पीछे नहीं हटना है
यूएन प्रमुख ने कोविड-19 महामारी द्वारा पेश किये गए ख़तरे को देखते हुए, तुरन्त कार्रवाई किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. इस महामारी ने, महिलाओं को, सबसे ज़्यादा भीषण रूप में प्रभावित किया है. 
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “लैंगिक समानता के रास्ते पर, पीछे की ओर मुड़ना, ना केवल महिलाओं के लिये बुरा है, बल्कि इससे पूरी अर्थव्यवस्थाओं व समाजों की सहनक्षमता कमज़ोर पड़ेगी. और, ऐसा होने से, दुनिया, 2030 का टिकाऊ विकास एजेण्डा प्राप्त करने से पीछे रह जाएगी.”
$13 ट्रिलियन की बेहतरी
संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने भी, मंगलवार को ही, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यक्रम को अपने सम्बोधन में, महामारी के महिलाओं के भीषण प्रभाव का ज़िक्र किया. 
यूएन उप प्रमुख आमिना जे मोहम्मद के अनुसार, कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में, लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने से, 2030 तक, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 13 ट्रिलियन डॉलर की रक़म जुड़ सकेगी.
उन्होंने कहा कि महामारी से बाहर निकलने के लिये, संयुक्त राष्ट्र के रोडमैप में, एक न्यायसंगत और समावेशी पुनर्बहाली की पेरवी की गई है. इसमें महिलाओं के लिये, ज़्यादा वित्तीय स्थान व ज़्यादा सामाजिक संरक्षाओं की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया है.
आमिना जे मोहम्मद ने ‘Women Rise for All’ नामक कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश में कहा, “लक्षित सहायता की बदौलत, महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार – रोज़गार सृजन और आर्थिक पुनर्बहाली में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं, जिससे परिवार और कारोबार सुचारू रूप से चलते रहें.”
उन्होंने कहा, “इस अपार सम्भावना को देखते हुए, मैं उन महिला नेतृत्व कर्ताओं को देखकर प्रेरित महसूस करती हूँ जो महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों की शिनाख्त करके, उन्हें सहारा व वित्तीय सहायता देने, और कमज़ोर हालात वाले कामगारों की संरक्षा के लिये एकजुट हो रही हैं.”, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने तमाम कॉर्पोरेट हस्तियों से लैंगिक समानता हासिल करने का आग्रह करते हुए, निजी क्षेत्र और पूरे समाज के लिये, इसके लाभों को भी रेखांकित किया है. यूएन प्रमुख ने, मंगलवार को, महिला स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के आयोग (CSW) के 65वें सत्र के दौरान आयोजित ‘लक्ष्य लैंगिक समानता’ कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश में, ये अपील की.

‘लक्ष्य लैंगिक समानता’, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसके तहत, व्यवसायों को, टिकाऊ और सामाजिक ज़िम्मेदार नीतियाँ अपनाने के लिये, समर्थन दिया जाता है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “हमारी विशाल चुनौतियों का समाधान तलाश करने के लिये, दुनिया को, महिलाओं की प्रतिभाओं और दृष्टिकोणों की आवश्यकता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करने से लेकर, व्यवस्थागत नस्लवाद का मुक़ाबला करने व जलवायु परिवर्तन से निपटने तक.”

“इसीलिये, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट और संयुक्त राष्ट्र की ख़ुद की व्यवस्था के लिये, लैंगिक समानता एक रणनैतिक प्राथमिकता है. लैंगिक समानता का मतलब है – गम्भीरता. आइये, हम इसे एक वास्तविकता बनाने के लिये एकजुट हो जाएँ.”

एक नैतिक कर्तव्य

यूएन महासचिव ने दोहराते हुए कहा कि लैंगिक समानता, आवश्यक रूप से, “शक्ति का एक प्रश्न है”. चाहे, वो सार्वजनिक क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र, सभी जगह, पुरुषों का ही दबदबा है.

उन्होंने कहा, “निजी क्षेत्र के लिये, महिलाओं की समान भागीदारी और समान नेतृत्व, एक नैतिक कर्तव्य और कारोबारी अनिवार्यता, दोनों ही हैं.”

“जब महिलाओं के पास आय व संसाधन होते हैं तो वो अधिक सम्भावना के अनुसार, ऐसे विकल्पों में निवेश करने का रास्ता चुनती हैं जिनसे उनके परिवारों व समुदायों को लाभ पहुँचे. अनुभव ये भी दिखाता है कि जिन कारोबारों के कॉर्पोरेट बोर्ड्स में महिलाओं का अच्छी संख्या में प्रतिनिधित्व होता है, वो ज़्यादा स्थिर व लाभप्रद होते हैं.”

एंतोनियो गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि सैकड़ों कम्पनियाँ, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट और यूएन वीमैन द्वारा 2010 में शुरू किये गए, महिला सशक्तिकरण सिद्धान्तों को लागू कर रही हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हज़ारों अन्य कम्पनियाँ भी जल्द ही ऐसा करेंगी.

पीछे नहीं हटना है

यूएन प्रमुख ने कोविड-19 महामारी द्वारा पेश किये गए ख़तरे को देखते हुए, तुरन्त कार्रवाई किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. इस महामारी ने, महिलाओं को, सबसे ज़्यादा भीषण रूप में प्रभावित किया है. 

उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “लैंगिक समानता के रास्ते पर, पीछे की ओर मुड़ना, ना केवल महिलाओं के लिये बुरा है, बल्कि इससे पूरी अर्थव्यवस्थाओं व समाजों की सहनक्षमता कमज़ोर पड़ेगी. और, ऐसा होने से, दुनिया, 2030 का टिकाऊ विकास एजेण्डा प्राप्त करने से पीछे रह जाएगी.”

$13 ट्रिलियन की बेहतरी

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने भी, मंगलवार को ही, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यक्रम को अपने सम्बोधन में, महामारी के महिलाओं के भीषण प्रभाव का ज़िक्र किया. 

यूएन उप प्रमुख आमिना जे मोहम्मद के अनुसार, कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में, लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने से, 2030 तक, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 13 ट्रिलियन डॉलर की रक़म जुड़ सकेगी.

उन्होंने कहा कि महामारी से बाहर निकलने के लिये, संयुक्त राष्ट्र के रोडमैप में, एक न्यायसंगत और समावेशी पुनर्बहाली की पेरवी की गई है. इसमें महिलाओं के लिये, ज़्यादा वित्तीय स्थान व ज़्यादा सामाजिक संरक्षाओं की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया है.

आमिना जे मोहम्मद ने ‘Women Rise for All’ नामक कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश में कहा, “लक्षित सहायता की बदौलत, महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार – रोज़गार सृजन और आर्थिक पुनर्बहाली में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं, जिससे परिवार और कारोबार सुचारू रूप से चलते रहें.”

उन्होंने कहा, “इस अपार सम्भावना को देखते हुए, मैं उन महिला नेतृत्व कर्ताओं को देखकर प्रेरित महसूस करती हूँ जो महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों की शिनाख्त करके, उन्हें सहारा व वित्तीय सहायता देने, और कमज़ोर हालात वाले कामगारों की संरक्षा के लिये एकजुट हो रही हैं.”

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