Defection and President Rule Update : चार साल में कांग्रेस सहित टीएमसी के 170 विधायकों ने भी पार्टी छोड़कर थामा दूसरों दलों का दामन, जानिए भाजपा से कितने गए

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झारखंड सहित कई प्रदेशों में भी क्या भाजपा आने वाले समय में ऐसे प्रयोग करेगी?

नई दिल्ली: कांग्रेस के कदम चिह्नों पर चलती हुई राजनीतिक दलों में जोड़-तोड़ करने में महारथ के गुणों से भरपूर होती जा रही है भाजपा। भाव यह है कि अपने सत्ताकाल में कांग्रेस भी ऐसा करने से नहीं चूंकती थी, लेकिन भाजपा ने अपने कार्यकाल में किसी भी सरकार पर राष्ट्रपति शासन नहीं थोपा, वहीं कांग्रेस ने इतिहास रचते हुए अपने कार्यकाल में 91 बार अलग-अलग प्रांतों में राष्ट्रपति शासन लगाया।

चुनावी एवं राजनीतिक सुधारों की पैराकार संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिकट रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने अपनी एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। एडीआर की इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016-2020 के दौरान हुए चुनावों के समय कांग्रेस के 170 विधायक दूसरे दलों में शामिल हो गए जबकि भाजपा के सिर्फ 18 विधायकों ने दूसरी पार्टियों का दामन थामा।

  • दूसरे दलों में हुए शामिल

एडीआर की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2016-2020 के दौरान पाला बदलकर फिर से चुनावी मैदान में उतरने वाले 405 विधायकों में से 182 भाजपा में शामिल हुए तो 28 विधायक कांग्रेस और 25 विधायक तेलंगाना राष्ट्र समिति का हिस्सा बने। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पांच लोकसभा सदस्य भाजपा को छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हुए तो 2016-2020 के दौरान कांग्रेस के सात राज्यसभा सदस्यों ने दूसरी पार्टियों में शामिल हुए।

  • भाजपा के 18 विधायकों ने बदला पाला

एडीआर की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-2020 में हुए चुनावों के दौरान कांग्रेस के 170 विधायक दूसरे दलों में शामिल हो गए तो इसी अवधि में भाजपा के सिर्फ 18 विधायकों ने दूसरी पार्टियों का दामन लिया।एडीआर ने कहा, ‘यह गौर करने वाली बात है कि मध्य प्रदेश, मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में सरकार का बनना-बिगड़ना विधायकों का पाला बदलने की बुनियाद पर हुआ।’

  • राज्यसभा के सांसद भी पीछे नहीं

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिकट रिफॉर्म्स की इस रिपोर्ट के अनुसार, 2016-2020 के दौरान पार्टी बदलकर राज्यसभा चुनाव फिर से लड़ने वाले 16 राज्यसभा सदस्यों में से 10 भाजपा में शामिल हुए।

झारखंड सहित कई प्रदेशों में भी क्या भाजपा आने वाले समय में ऐसे प्रयोग करेगी?

-Agency

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