Dharam Sansad: धर्म संसद में संतों ने सनातन संस्कृति की रक्षा करने का लिया संकल्प

रायपुर, 28 दिसंबर। राजधानी में दो दिनों तक चले धर्म संसद में संतों ने हिन्दू राष्ट्र बनाने, मतांतरण रोकने, गो हत्या बंद करने, गुरुकुल की तर्ज पर शिक्षा देने, भारतीय संस्कारों की अलख जगाने, स्कूलों में गीता पढ़ाने, सनातन संस्कृति की रक्षा करने का संकल्प लिया।

धर्म संसद में संतों ने आह्वान किया कि देश में उसी पार्टी को सत्ता सौंपे जो हिंदू हित के लिए समर्पित हो। हिंदू राष्ट्र घोषित किए बिना देश का कल्याण नहीं हो सकता। लाखों साल पुरानी सनातन संस्कृति को खत्म करने की साजिशें चल रही है, इसके खिलाफ सभी को एकजुट होना होगा। सनातन संस्कृति भले ही वर्तमान में खतरे में है, पर न इसे कोई मिटा सका है, न मिटा सकेगा।

संतों ने कहा कि लगभग 75 साल पहले एक लड़ाई आज़ादी की जीती थी, अब हिन्दू राष्ट्र की लड़ाई जीतनी है। सनातन संस्कृति से सभी जीवों से प्रेम करने की शिक्षा मिलती है। दूसरे धर्म के लोग इंसानाें का कत्ल करने से नहीं चूकते, हमारी संस्कृति में जानवरों से भी प्रेम करना सिखाया जाता है।

रायगढ़ से आए संत रामप्रिय दास ने कहा कि धर्म वस्त्र नहीं जो बदला जाए। जिस घर में पैदा हुए वही धर्म है, उसे बदल नहीं सकते। देश के युवा भ्रमित न हो, धर्म बदलने के लिए किसी भी तरह के लालच में न आएं। युवा अपनी शक्ति को पहचाने और हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए आगे आएं। इसके लिए सरकार पर दबाव बनाना होगा।

खरसिया के संत त्रिवेणी दास ने कहा कि पूरी दुनिया में आतंक, खून सिर्फ एक संप्रदाय विशेष के आतंकवादियाें द्वारा बहाया जा रहा है। सनातन संस्कृति का गौरवशाली इतिहास दो अरब साल पहले का है। इसे खत्म करने की साजिश चल रही है।भगवा को विश्व विजेता बनना होगा। यह हिन्दू राष्ट्र बनने से ही संभव हो सकता है। जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर अन्य धर्म को अपना लिया है, उन सभी की घर वापसी के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।

(हि.स.)

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