Drishyam in Jharkhand : तीसरी पास वीरचंद बॉर्डर और टेक्नोलॉजी का करता था सही इस्तेमाल

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रामगढ़, 02 जून : बॉलीवुड की मशहूर फिल्म दृश्यम में चौथी पास विजय सरगांवकर ने पुलिस सिस्टम के लूप होल पर प्रहार किया था। कुछ ऐसा ही किरदार जिले के गोला थाना क्षेत्र अंतर्गत बंदा टोला पिपराजारा गांव निवासी वीरचंद मांझी का था।

वह सिर्फ तीसरी पास था लेकिन 2 जिलों के बॉर्डर का सही इस्तेमाल कर लगातार पुलिस को चुनौती दे रहा था। उसने अपहरण की तीन वारदातों को इतनी सफाई से अंजाम दिया था कि उसे पकड़ पाना लगभग नामुमकिन था। लेकिन रामगढ़ एसपी प्रभात कुमार और डीएसपी हेड क्वार्टर संजीव कुमार मिश्रा ने ऐसा जाल बिछाया की फिल्मी किरदार से अलग वीरचंद मांझी सलाखों के पीछे पहुंच गया।

वीरचंद ने अपने साथी जागो मांझी के साथ मिलकर एक ऐसा गिरोह तैयार किया था, जिसे टेक्नोलॉजी से कोई प्यार नहीं था। यही उनका सबसे बड़ा हथियार था। इन दोनों ने जानबूझकर गवार लोगों को टीम में शामिल किया था, ताकि जल्दी कोई उन पर शक ना करें। ना कोई मोबाइल फोन, ना फेसबुक और ना ही कोई सोशल मीडिया पर एक्टिव था।

वीरचंद मांझी और जागो मांझी ने नक्सलियों तथा बाजीराम नामक अपहरणकर्ता से प्रेरित होकर अपना गैंग तैयार किया था। वह निर्माण कार्य में लगे कंपनियों के कर्मचारियों को अगवा करता था। उसे बोकारो और रामगढ़ जिले के बॉर्डर के आसपास ही छुपा कर रखता था। अपहरणकर्ताओं में से किसी भी सदस्य के पास कोई मोबाइल नहीं होता था। अपहरण करने के बाद हर व्यक्ति की ड्यूटी बस समय के आधार पर होती थी।

किस वक्त फिरौती के लिए फोन करना है, यह वीरचंद और जागो ही तय करते थे। वह फोन भी सिर्फ अपहृत व्यक्ति के मोबाइल से ही किया जाता था। बोलने का लहजा इस कदर था मानो कोई साहित्यकार बात करता हो। तकनीकी ज्ञान से कोसों दूर इन अपहरणकर्ताओं के द्वारा जब भी फिरौती के लिए फोन किया जाता था वे तत्काल उस स्थान को छोड़कर दूसरे जिले के निर्जन स्थान पर पहुंच जाते थे। इससे हमेशा पुलिस भ्रमित रहती थी।

अपहृत व्यक्ति को छुपाने के लिए यह गिरोह बंद पड़े खदान और कोयला तस्करों द्वारा बनाए गए अवैध मुहावरों का प्रयोग करता था। अवैध मकानों की गुफाओं में ना तो कोई ग्रामीण जाते हैं और ना ही कोई चरवाहा ही उधर गुजरता है। उसकी निगरानी के लिए हमेशा दो से तीन लोग मौजूद हुआ करते थे। गिरोह के सभी सदस्यों के पास टांगी और फरसा जैसी चीज हुआ करती थी। जब भी कोई उधर से गुजरे तो उसे सिर्फ यह लगता था कि कोई लकड़ी काटने वाला ग्रामीण उधर काम कर रहा है। मजदूरों के वेश में यह गिरोह पुलिस की नजरों से लगातार बचता आ रहा था।

हिन्दुस्थान समाचार

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