Dumka by Election : दुमका उपचुनाव, झामुमो और भाजपा में जोरदार मुकाबला

आकलन एवं संभावनाएं

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ डेस्क /फहीम-प्रशांत

दुमका विधानसभा सीट में उपचुनाव पर इनसाईट ऑनलाइन न्यूज के भाग-1 में आकलन एवं संभावनाओं पर विश्लेषण किया था। चुनाव की घोषणा हो चुकी है और 3 नवंबर को मतदान होगा तथा 10 नवंबर को नतीजा आयेगा।

दुमका चुनाव में भाग-1 के आकलन में हमने लिखा था कि भाजपा लगभग अपने पूर्व के उम्मीदवार लुइस मरांडी पर ही पुनः दांव लगायेगी। वहीं झामुमो के संभावित उम्मीदवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुज का नाम उछाला जा रहा है और हुआ भी वही। भाजपा की तरफ से लुइस मरांडी और जेएमएम के तरफ से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुज बसंत सोरेन चुनाव में आमने-सामने हैं और इन्होंने पर्चा भी दाखिल कर दिया है।

2019 के विधानसभा चुनाव में जेएमएम, कांग्रेस और राजद गठबंधन और भाजपा के बीच में जो मुकाबला हुआ उसमें भाजपा का आजसू से गठबंधन नहीं हो पाया। इस उपचुनाव में आजसू और भाजपा में पुनः गठबंधन स्थापित हो गया। आजूस का दुमका विधानसभा क्षेत्र में बहुत प्रभाव नहीं है पर एक मतदाताओं के बीच गठबंधन का संदेश ही कहीं न कहीं लाभ पहुंचाने का काम करेगा।

भाजपा और जेएमएम तथा उनके सहयोगी दलों ने चुनाव में नामांकन के बाद से ही पूरी ताकत झोंक दी है। उपचुनाव में सत्ताधारी दल को मतदाताओं को रिझाने में सत्ता का भरपूर लाभ मिलता है।

दुमका विधानसभा क्षेत्र जो कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है में आदिवासी मतदाताओं के साथ-साथ गैरआदिवासी मतदाताओं तथा अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या भी काफी है। 2019 के चुनाव में मुस्लिम एवं क्रिश्चियन समुदाय के मतदाताओं ने एक मूस्त मत झामुमो गठबंधन को दिये थे और इस बार के उपचुनाव में भी यही संभावना है।

2019 में गैरआदिवासी मतदाताओं ’’पिछड़े समुदाय सहित’’ के बड़े भाग ने जेएमएम के पक्ष में मतदान किया था, जिससे जेएमएम को अप्रत्याशित विजय हासिल हुई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2019 और वर्तमान की स्थिति में मतदाताओं के रूख में काफी बदलाव आया है तथा गैरआदिवासी मतदाताओं ’’पिछड़े समुदाय सहित’’ का अधिकतर झुकाव भाजपा की तरफ जाता दिखाई दे रहा है। वहीं बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी के बाद भाजपा को आदिवासी मतों में भी अच्छे प्रतिशत के लाभ होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में सत्ताधारी गठबंधन और भाजपा गठबंधन के बीच में कांटे की टक्कर होने की स्थिति बनती नजर आ रही है।

जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे स्थिति साफ होती चली जायेगी। एक तरफ जहां भाजपा ने झामुमो से सीट छीनने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है वहीं झामुमो भी अपनी प्रतिष्ठित सीट को समेटने में कोई कोर कसर बाकि नहीं छोड़ेगा, पर मतदाताओं की चुप्पी सत्ताधारी दल के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
आकलन और संभावनाओं के अनुसार गैरआदिवासी मतदाताओं के झुकाव का लाभ सत्ताधारी दल को मिलता नहीं दिख रहा है।

जारी….

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