एक हजार फर्जी सिम एक्टिवेट करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नई दिल्ली, 17 मई। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने फर्जी आईडी पर लोगों को सिमकार्ड मुहैया कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान तनवीर हुसैन के रूप में हुई है, जो जैतपुर इलाके का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अब तक करीब एक हजार लोगों को सिमकार्ड मुहैया करा चुका है। पुलिस ने आरोपित के पास से 10 फर्जी सिमकार्ड, दो मोबाइल और अन्य सामान बरामद किया है।

अपराध शाखा के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश निवासी 39 साल के विजय कुमार ने एक मामले को लेकर शिकायत दी थी, जिसमें बताया था कि उसके पास एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने कहा कि आपका पार्सल आया है, इसके बदले 12 जनवरी को 32 हजार 800 रुपये और 86 हजार रुपये और 13 जनवरी को 41 हजार 700 रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

पीड़ित ने यह रकम रिंकू मोदी नाम के एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी। इस मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर अनिल शर्मा की टीम ने पाया बैंक अकांउट में मोटी रकम डाली गई थी, जिसे एटीएम के जरिए निकाला गया। अपराध शाखा इस रैकेट में शामिल एक विदेशी नागरिक सहित चार लोगों को पहले ही पकड़ चुकी थी।

पुलिस की एक टीम ने तुगलकाबाद एक्सटेंशन की गली नंबर दो में रेड की। धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल हुआ मोबाइल नंबर इस गली में ही लक्ष्मीकांत के नाम पर रजिस्टर्ड था। उसने बताया वह तुगलकाबाद एक्सटेंशन में एक मोबाइल शॉप पर गया था, जहां उसने मोबाइल सिम अपडेट कराने के लिए दुकान के मालिक को अपना आधारकार्ड दिया था। जांच में पता चला कि इस मोबाइल के सिम नंबर को जैतपुर निवासी तनवीर ने एक्टीवेट किया था।

पुलिस ने उसके पते पर दबिश डाली, जहां से पता चला यहां तनवीर चार पांच महीने पहले तक किराए पर रहता था। पुलिस ने तनवीर के बारे में जानकारी जुटाई और फिर उसे तुगलकाबाद एक्सटेंशन गली नंबर 14 स्थित एक दुकान से गिरफ्तार कर लिया। जांच में मालूम हुआ है कि तनवीर हुसैन साल 2017 में काम की तलाश में दिल्ली आया था।

उसने सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर वोडाफोन के लिए काम किया। बाद में उसने खुद ही दुकान खोल ली और वह फर्जी आईडी पर मोबाइल नंबर एक्टिवेट करने लगा। उसने पुलिस को बताया वह इस तरह करीब पांच सौ से एक हजार फर्जी सिम बीते दो साल में एक्टीवेट कर चुका है। लक्ष्मीकांत नाम का एक ग्राहक उसकी दुकान पर सिम को पोर्ट कराने के लिए आया था। इस काम के लिए उसने पीड़ित की तस्वीर और आईडी व फोटो ले ली थी। बाद में इसी पहचान पर एक सिम कार्ड एक्टीवेट कर उसे नाईजीरिया के एक शख्स को दे दी थी, जिसका इस्तेमाल चीटिंग के लिए किया गया।

(हि.स.)

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