Farmer Protest : नए कृषि कानूनों को लेकर तेलंगाना सरकार का यू टर्न, अभी तक कर रही थी विरोध

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कहा-नियंत्रित कृषि पद्धति से पीछे हटेगी राज्य सरकार

तेलंगाना, 28 दिसम्बर : केंद्र सरकार के पारित किए गए नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति सरकार ने यू टर्न ले लिया है। इससे साफ है कि तेलंगाना सरकार केंद्र के नए कृषि कानूनों के समर्थन में है क्योंकि उसे परंपरागत खेती से उपज की खरीदी में बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है।रविवार देर रात मुख्यमंत्री केसीआर के आवास प्रगति भवन में हुई कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में चालू वर्ष की वर्षा कालीन मौसम में लागू की गई नियंत्रित खेती पद्धति को रद्द करने को बेहतर बताते हुए यह संकेत दिए हैं।

कृषि विभाग ने बीती रात एक जारी किए गए अपने प्रेस नोट में कहा है कि तेलंगाना राज्य के गठन से अब तक धान, मकई, ज्वार, तूअर और चना दाल, सनफ्लावर, उड़द आदि की खरीदी करने में सरकार को लगभग 75000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समर्थन मूल्य देकर खरीदे गए इन उत्पादों की मार्केट में अपेक्षित खपत नहीं होने के कारण सरकार उनको कम दामों पर बेचना पड़ा। इसके चलते सरकारी खजाने को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री केसीआर को बताया गया कि मात्र धान की खरीदी से ही सरकार को अब तक 3935 रुपये करोड़ का घाटा हुआ है। अलग-अलग उत्पादन के खरीदी और अन्य खर्च को मिलाकर देखा जाए तो और राज्य सरकार को 75000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष किसानों को भारी नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने गांव में खरीदी केंद्र का गठन कर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनके उत्पाद खरीदे थे किंतु प्रत्येक वर्ष ऐसा करना मुमकिन नहीं है। समीक्षा बैठक में कहा गया कि सरकार कोई व्यापारिक संस्था नहीं है। खाद्य पदार्थों का क्रय-विक्रय सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह भी कहा गया कि अगले वर्ष गांव में खाद उत्पादों के खरीदी केंद्रों का गठन करना संभव नहीं होगा। देश में लागू किए गए नए कृषि कानूनों से किसानों को अपने खाद उत्पादों को कहीं और भी बेचने का मौका मिल रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार के गांवों में फसलों के खरीद केंद्रों का गठन करने की जरूरत नहीं है। यह जरूरी है कि कृषि बाजारों में क्रय-विक्रय से संबंधित विषयों को सुचारू रूप से व्यवस्थित किया जाएगा।

कृषि विभाग के जिम्मेदारियों को लेकर विचार विमर्श हुआ, जिसमें कहा गया कि कृषि क्षेत्र में तेजी से विकास होने के चलते अधिकारियों के जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। एक अन्य कारण यह कि राज्य में सिंचाई की सुविधा में बड़े पैमाने पर वृद्धि होने के चलते खेती की जमीनों का विस्तार काफी हुआ है। इसे देखते हुए कृषि विभाग को और अधिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि अधिकारियों को प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए राज्य सरकार प्रेरित किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार

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