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गार्सेटी ने इसरो प्रमुख से की मुलाकात, विभिन्न अंतरिक्ष अभियानों पर चर्चा

चेन्नई, 26 मई : भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने रविवार को इसरो प्रमुख एस.सोमनाथ से मुलाकात की और उनसे विभिन्न अंतरिक्ष अभियानों तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच चल रहे सहयोग पर चर्चा की।

अंतरिक्ष एजेंसी ने एक अपडेट बयान में कहा कि यह बैठक बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में हुई और इसरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिकी राजदूत और प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

श्री गार्सेटी की यात्रा ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच चल रहे सहयोग पर प्रकाश डाला।

इन चर्चाओं में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन हेतु जी-20 उपग्रह के लिए भारत के प्रस्ताव में नासा की भागीदारी, एनआईएसएआर के लिए अनुवर्ती अभियान के रूप में एक उन्नत इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर उपग्रह और त्वरित एवं ज्यादा प्रभावी परिणामों के लिए दोनों देशों की वाणिज्यिक कंपनियों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना, आईएसएस (अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) को कार्गो के हस्तांतरण के विकल्प के रूप में गगनयान कार्गो मॉड्यूल आदि शामिल रहे।

इसरो ने कहा कि अमेरिकी राजदूत ने क्वाड उपग्रह का भी प्रस्ताव रखा। श्री सोमनाथ ने अमेरिका-भारत शैक्षणिक संस्थानों के साथ उन्नत डिटेक्टर और पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के अवसर की भी बात की।

उन्होंने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों में डॉकिंग इंटरफेस के निर्माण और मानकीकरण पर भी बल दिया जिससे अन्य देशों द्वारा अंतरिक्ष प्लेटफार्मों के उपयोग को सक्षम बनाया जा सके और चंद्रमा पर या तो कक्षा में या सतह पर एक नेविगेशन प्रणाली बनाने की दिशा में हाथ मिलाया जा सके।

चर्चाओं में अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में दोनों देशों के आपसी हितों और साझा लक्ष्यों पर प्रकाश डाला गया। विभिन्न संयुक्त कार्य समूहों, आर्टेमिस संधि, एनआईएसएआर और चंद्रयान-3 पर लेजर रिफ्लेक्टोमीटर ऐरे के उपयोग पर भी चर्चा की गई।

अमेरिकी राजदूत ने इसरो की उपलब्धियों और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में इसकी भूमिका की प्रशंसा की। दोनों पक्षों के पेशेवरों की आपसी यात्राओं, गुब्बारे प्रयोगों की निरंतरता और मील के पत्थरों की पहचान सहित भविष्य के कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई।

इसरो ने सहयोगी अभियानों में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण घटकों और वस्तुओं तक पहुंच को संबोधित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राजदूत गार्सेटी ने वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने में अंतरिक्ष विभाग द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस बारे में विस्तार से बात करते हुए श्री सोमनाथ ने कहा कि पहली बार इसरो प्रयोगशालाओं से बाहर स्थित भारतीय सुविधाओं में पेलोड प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष में जाने वाले हार्डवेयर का निर्माण किया जा रहा है। इसरो भारतीय कंपनियों से अपने कार्यक्रमों के लिए पेलोड और उपग्रह प्राप्त करने और उन्हें वैश्विक बाजार में प्रवेश करने में सक्षम बनाने की योजना बना रहा है।

यह यात्रा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुई। बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोगात्मक प्रयासों के लिए आशा व्यक्त किया।

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