हसन बने कन्फर्म मंत्री, नप गए भजंत्री

श्याम किशोर चौबे

रांची: अप्रैल 2021 में मधुपुर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव जीतने के बाद हफीजुल हसन का मंत्री पद कन्फर्म हो गया लेकिन इस राजनीतिक घटना के आठ महीने बीतते-बीतते देवघर के डीसी आइएएस अधिकारी मंजूनाथ भजंत्री का नप जाना भी आश्चर्य की बात नहीं है। जिन लोगों ने मधुपुर उपचुनाव पर गौर न किया होगा, उनको आश्चर्य हो सकता है कि मतदान के पहले से लेकर मतगणना तक भजंत्री देवघर के डीसी नहीं थे, फिर भी उन पर चुनाव आयोग की गाज क्यों गिर गई।

थोड़ा और पीछे जाने पर स्पष्ट हो जाता है कि हफीजुल के अब्बाजान हाजी हुसैन अंसारी झामुमो के बड़े नेताओं में शुमार थे, जो 2019 में मधुपुर का चुनाव जीतकर मंत्री पद पर आसीन हुए थे। कोरोना-1 काल में अक्टूबर 2020 में उनका इंतकाल हो गया था।

इस कारण एक तो यह सीट खाली हो गई थी, दूसरे मंत्री पद भी रिक्त हो गया था। झामुमो नेतृत्ववाली यूपीए सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फरवरी 2021 में हफीजुल को उनके अब्बाजान की कुर्सी सौंपकर संकेत दे दिया था कि अप्रैल में संभावित उपचुनाव में झामुमो उनको ही प्रत्याशी बनाएगा। उस दौरान देवघर जिले के डीसी थे मंजूनाथ भजंत्री। मधुपुर विधानसभा क्षेत्र देवघर जिले में ही आता है।

हफीजुल हसन

जब भारत निर्वाचन आयोग ने घोषणा की कि 17 अप्रैल को मधुपुर उपचुनाव होगा तो उसके कुछ ही अरसा बाद डीसी भजंत्री, जो इस उपचुनाव के निर्वाचन पदाधिकारी भी थे, के विरूद्ध भाजपा ने कई आरोप लगाये। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से लेकर आयोग तक उसने गुहार लगायी कि भजंत्री झामुमो के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। झामुमो-भाजपा के बीच सोशल मीडिया वार भी चलता रहा। परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने भजंत्री को डीसी पद से हटाने का आदेश दिया। राज्य सरकार ने उनकी जगह पर पूर्व में देवघर की डीसी रह चुकी नैन्सी सहाय को पदस्थापित कर दिया। दो मई को आये चुनाव परिणाम में मामूली वोटों के अंतर से हफीजुल जीत गए। मुख्यमंत्री ने उनका मंत्री पद कन्फर्म कर दिया तथा भजंत्री को पुनः देवघर का डीसी बना दिया गया।

निशिकांत दुबे

असल टशन इसके बाद ही शुरू हुआ। 26 अक्टूबर को  देवघर जिले के पांच थानों देवघर नगर, मधुपुर, बुढ़ैई, देवीपुर और चितरा में संबंधित बीडीओ ने स्थानीय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के विरूद्ध आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले दर्ज कराया। यह सब डीसी भजंत्री के निर्देश पर हुआ। आधार बनाया गया उपचुनाव के दौरान सांसद दुबे द्वारा डीसी भजंत्री के विरूद्ध जारी सोशल मीडिया पोस्ट। दुबे ने इस बात की शिकायत भारत निर्वाचन आयोग से की। उनका कहना था कि डीसी ने जानबूझकर बेमतलब उन पर प्राथमिकियां दर्ज करायी। आयोग ने इस विषय पर भजंत्री को शो-काॅज किया। भजंत्री ने सफाई भी दी लेकिन संतुष्ट न होने के कारण छह दिसंबर को आयोग ने भजंत्री को देवघर के डीसी पद से हटाने, 15 दिनों के अंदर उन पर विभागीय कार्यवाही चलाने, मेजर पेनाॅल्टी तय करने और बिना आयोग की अनुमति के उनको किसी भी जिले का डीसी न बनाने का आदेश दे दिया।

रघुवर दास और योगेंद्र साव

भजंत्री पर सरकार क्या करती है, यह जल्द ही स्पष्ट होगा लेकिन लगे हाथ याद आ जाता है 2016 का राज्यसभा चुनाव। उस समय राज्य की दोनों सीटों पर भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दार विजयी हुए थे। उन दिनों राज्य में एनडीए की सरकार थी, मुख्यमंत्री थे रघुवर दास। उस समय आरोप लगा था कि कांग्रेस विधायक निर्मला देवी पर भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए दबाव बनाया गया था और उनके पति योगेंद्र साव पर चल रहे केस-मुकदमें हटा लेने का लोभ-लालच दिया गया था। इंस्ट्रूमेंट बने थे सीआइडी के तत्कालीन एडीजी आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता। माना यही जाता था कि अनुराग और रघुवर के संबंध आत्मीय थे। इस मामले से संबंधित आडियो और वीडियो रिकार्डिंग संसद से लेकर भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंचाई गई थी। आयोग ने कार्रवाई करते हुए अनुराग गुप्ता पर केस चलाने का आदेश दिया था। उस समय एसीबी ने हालांकि केस तो दर्ज कर लिया था लेकिन तफ्तीश आगे बढ़ी नहीं। 2019 में हेमंत सरकार की ताजपोशी के बाद अनुराग गुप्ता मामले में तफ्तीश तो आगे बढ़ा ही दी गई, उनको निलंबित भी कर दिया गया।

चुनाव एक बेहद संजीदा मामला है, जिसकी निगरानी ब्यूरोक्रेसी ही करती है। नौकरशाह ऐसे अवसर पर राजनीतिक राग-द्वेष पालते हैं तो वे निशाने पर आ जाते हैं। निर्वाचन आयोग अधिकार संपन्न संवैधानिक संस्था है। चुनाव हो कि उपचुनाव उसके ही नियंत्रण और दिशा निर्देश पर संपन्न होता है। उस समय नौकरशाही उसके ही अधीन काम करती है। जिसने अपना दामन नहीं बचाया, उसकी अधोगति स्वाभाविक है। राजनेता तो चुनाव जीतकर ललबतिया सुख भोगते हैं, जैसे मुख्तार अब्बास नकवी और हफीजुल हसन भोग रहे हैं लेकिन जो सरकारी बंदा लपेटे में आ जाता है, उसकी गति अनुराग गुप्ता या मंजूनाथ भजंत्री जैसी ही होती है।

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