Health Benefits of Beetroot : औषधीय गुणों से भरपूर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है चुकंदर

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स्वास्थ्य प्रदाता एक पौष्टिक खादय पदार्थों की सूची में आहार विशेषज्ञों ने चुकुन्दर को एक बेहतरीन कंद के रूप में शामिल किया है। चुकुन्दर में भरपूर औषधीय गुण है। आयुर्वेदिक पुस्तकों में चुकुन्दर को प्याज से भी अधिक आर्द्रता वाला तथा सबसे अधिक रसदार बताया गया है। यह जमीन के अंदर पनपने और बढ़ने वाला है। यह शर्करा (मिठास) का भंडार है। इससे शक्कर भी बनाई जाती है।

यह प्रचुर खनिज लवणों से भी सम्पन्न है। इसमें पोटैश्यिम, सल्फर, क्लोरीन, सोडियम, आयोडीन, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी आदि प्रार्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं।
चुकुन्दर में मौजूद इन्हीं पदार्थों के कारण किडनी और गॉल ब्लाडर की सफाई करने की चमत्कारिक क्षमता होती है। विशेषज्ञ वैधों का दावा है कि चुकुन्दर, गाजर और खीरा का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से किडनी या पित्ताशय की पथरी कुछ दिनों में ही गलाकर मूत्र मार्ग से गलकर निकल जाती है। इस औषधीय प्रयोग में चुकुन्दर महप्वपूर्ण घटक होता है।

यही नहीं स्वास्थ्य लाभ के लिए चुकुन्दर को किसी भी रूप में खाने की सलाह दी गई है। इसे सलाद के रूप में या सब्जी के रूप में भी खाया जाता है। इसकी चटनी भी खूब स्वादिष्ट लगती है। चुकुन्दर का अचार भी बनाता है जिसका स्वाद सबको पंसद आता है।

आहर विद्वानियों के चुकुन्दर और इसकी पत्तियों को खूब बढ़िया से धोकर खाने और पकाने की सलाह दी है। चुकुन्दर पाचन संबंधी सभी रोगों में लाभ पहुंचाता है। प्रकृतिक चिकित्सक, आयुर्वेदाचार्य एवं आहार विज्ञानी एकमत हैं कि चुकुन्दर का रस पाचन संबंधी विभिन्न प्रकार के वर्णित रोगों को जड़ से खैत्म देता है। प्रातरू एक बार खाली पेट चुकुन्दर का लगभग 200 ग्राम रस पीने की सलाह दी गई है।

इस तैयार रसादार में चुकुन्दर के रस के साथ थेड़े से अदरख का रस, एक नींबू का रस और लगभग 20 ग्राम शहद मिलाकर पीने से इस आहार की गुणवता बढ़ जाती है। कम से कम सात दिनों तक लगातार सेवन करने से ही फायदा महसूस होने लगता है। पेट में अल्सर या जलन होने पर चुकुन्दर के रस में नींबू का रस मिलाने से मना किया गया है। यह रसदार यकृति की कमजोरी, पित्त की अधिकता, उल्टी की शिकायत, खड़ी डकार आना, बार-बार जौन्डिस होना, कब्ज और बवासीर की शिकायत, पेट में गैस्ट्रिक, अल्सर होना तथा भोजन की नली में जलन होना आदि अनेक रोग ठीक करता है।

वैधों का मानना है कि रक्त कोशिकाओं की शक्ति एवं सक्रियता कढ़ाने में भी चुकुन्दर एक लाभकर आहार है। इसके लिए चुकुन्दर की पत्तियों और चुकुन्दर से लगभग 200 ग्राम रस निकालकर इसमें अलग से 20 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन प्रातरू दो सप्ताह तक खाली पेट सेवन करना होगा। इस पथ्य से किसी भी व्यक्ति की रक्ताल्पता दूर हो जाती है। रक्ताल्पता को ही एनीमिया भी कहते हैं। चुकुन्दर के रस का सेवन करने से चर्मरोग भी दूर होते हैं।

सिर के बाद के रोगों के निदान में चुकुन्दर महौषधी के रूप में लाभ पहुंचाता है। यह सिर के बालों से रूसी खत्म कर देता है। यदि चुकुन्दरका रस सिर के बालों की जड़ों में रात में सोने से पहले अंगुलियों द्वारा मिलाकर लगाया जाये और प्रातरू सिर को धो लिया जाए तो एक सप्ताह में ही सिर के बाल स्वस्थ, चमकीले, मुलायम और घने होने लगते हैं। रूसी और फुसली गायब हो जाते हैं। चुकुन्दर और इसकी पत्तियों के रस में अदरख का रस मिला लिया जाये तो यह रस बालों के लिए सोने में सुहागा हो जाता है। तो फिर देर क्या, बाजार से चुकुन्दर लाएं या अपने किचेन गार्डेन में लगे चुकुन्दर का उपयोग बना हिचक के शुरू कर दें, लाभ होगा ही।

  • रक्तशोधक चुकुन्दर औषधीय गुणों के कारण बाजीकारक भी होता है अर्थात यौन संबंधी सिथिलता को दूर करते हुये वैवाहिक जीवन को भी संतोषप्रद और सुखमय बनाता है। इसलिए अपलब्धता के आधार पर वैद्यों और आहार वैज्ञानियों ने इसके नियमित सेवन की सलाह दी है।

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