Hindu Temples Must be Freed From Goverment Control : मंदिरों से सरकारी अधिग्रहण 2024 से पहले खत्म हो: विश्व हिंदू परिषद

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वाराणसी। मंदिर आराधना स्थल मात्र नहीं हैं। सनातन संस्कृति, सभ्यता व संस्कारों को संजोते हैं मंदिर। कभी समाज का पूरा तंत्र मंदिरों के जरिए संचालित होता था। उसी व्यवस्था को लागू करने की मुखर आवाज उठी संस्कृति संसद में। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने समस्त राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि 2024 से पहले मंदिरों से सरकारी अधिग्रहण खत्म किया जाए। ऐसा नहीं हुआ तो विहिप लड़ाई लड़ेगी। दैनिक जागरण व गंगा महासभा की ओर से रुद्राक्ष सम्मेलन केंद्र में आयोजित संस्कृति संसद के अंतिम दिन रविवार को आलोक कुमार की ओजस्वी वाणी सुनकर रुद्राक्ष सम्मेलन केंद्र करतल ध्वनि व हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा।

अखिल भारतीय संत समिति व श्रीकाशी विद्वत परिषद के मार्ग दर्शन में भारतीय संस्कृति के प्रमुख चिंतक व स्व. नरेन्द्र मोहन की स्मृतियों को समर्पित विचार मंथन में आलोक कुमार ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद अनौपचारिक रूप से विहिप का नया एजेंडा तय कर दिया। कहा कि मंदिरों के साथ पहले गुरुकुल चलता था। गुरुकुल में बच्चों के पढने, रहने, खाने व पहनने का निश्शुल्क प्रबंध होता था। अधिकतर बच्चे ओबीसी, अनुसूचित जाति के होते थे। इसके जरिए समाज का हर वर्ग एकजुट रहता था। मुगलों और अंग्रेजों ने उस परंपरा को खत्म कर दिया। अंग्रेजों ने बेहतर प्रबंधन व प्रशासन का हवाला देकर मंदिरों का अधिग्रहण कर लिया। कुछ राज्यों में अधिग्रहण तो अभी तक है। अंग्रेजों के समय तीन प्रतिशत दिया जाने वाला टैक्स बढ़ते-बढ़ते 18 प्रतिशत हो गया है। मंदिर प्रबंधन को आडिट शुल्क अलग से देना होता है। यह व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। भारत के संविधान में जितना अधिकार अल्पसंख्यकों को दिया गया है, उतना ही ङ्क्षहदुओं को मिले।

बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय ने नई पीढ़ी को उसकी संस्कृति व संस्कारों से जोडने पर बल दिया। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि जैसे मदरसों में मनचाही शिक्षा देने की छूट है, वैसी सुविधा मठ-मंदिरों को मिलनी चाहिए। विहिप के संत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने अधिगृहीत किए गए मंदिरों पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। बोले, जब मंदिरों का अधिग्रहण किया गया, उस समय कितनी संपत्ति थी और अब कितनी है, इसे स्पष्ट किया जाए। अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष आचार्य अविचल दास ने मंदिरों की न्यायिक, धार्मिक व आर्थिक स्थिति स्पष्ट करते हुए उसे समस्त बंधनों से मुक्त करने पर जोर दिया।

-Agency

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