हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय शक्ति और सुरक्षा देने वाले देशों में उभरा भारत : रक्षा मंत्री

  • एचएडीआर अभ्यास ‘समन्वय’ में आसियान देशों के प्रतिनिधियों ने भी लिया हिस्सा
  • प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए संसाधन एवं उपकरण साझा करने का आह्वान

नई दिल्ली, 30 नवम्बर। वायु सेना स्टेशन आगरा में आसियान देशों के साथ वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास ‘समन्वय’ बुधवार को खत्म हो गया। तीन दिन तक चले इस अभ्यास में आपदा प्रबंधन पर संगोष्ठी, स्थिर और फ्लाइंग डिस्प्ले, टेबल टॉप, बहु एजेंसी अभ्यास शामिल किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अभ्यास के दूसरे दिन क्षमता प्रदर्शन कार्यक्रमों में शामिल हुए और विश्वास व्यक्त किया कि ‘समन्वय’ में मित्र राष्ट्रों के साथ राष्ट्रीय हितधारकों की भागीदारी आपदा प्रबंधन क्षमताओं में और वृद्धि करेगी।

आगरा के वायु सेना स्टेशन में वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास के दौरान नियोजित क्षमता प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘समन्वय’ अभ्यास ने नागरिक प्रशासन, सशस्त्र बलों, एनडीएमए, एनआईडीएम, एनडीआरएफ, डीआरडीओ, बीआरओ, आईएमडी, एनआरएस और आईएनसीओआईएस सहित आपदा प्रबंधन में शामिल विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय एजेंसियों के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में सक्षम रहा। अभ्यास का उद्देश्य भाग लेने वाले आसियान सदस्य देशों के साथ डोमेन ज्ञान, अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करना था।

क्षमता प्रदर्शन कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत अपने नागरिकों के साथ-साथ क्षेत्रीय भागीदारों को मानवीय सहायता एवं आपदा राहत प्रदान करने की क्षमता के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमने क्षेत्रीय ढांचों के माध्यम से जुड़ाव पैदा करके बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत किया है। इसने संकट की स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया को सक्षम करने के लिए अंतर-क्षमता में सुधार किया है। रक्षामंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘समन्वय’ में मित्र राष्ट्रों के साथ राष्ट्रीय हितधारकों की भागीदारी आपदा प्रबंधन क्षमताओं में और वृद्धि करेगी। राजनाथ सिंह ने श्रीलंका, नेपाल, इंडोनेशिया, मोजाम्बिक, मालदीव तथा मेडागास्कर में राहत कार्यों के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की भूमिका को सराहा।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी के साथ-साथ एक बड़ी आबादी तक सूचना का प्रसार और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना होता है, जिसके लिए एक सशक्त तंत्र की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देशों की अलग-अलग क्षमताएं होने के कारण आपदाओं से निपटने के लिए सहयोगी तैयारी की आवश्यकता है। राजनाथ सिंह ने संसाधनों, उपकरणों और प्रशिक्षण को साझा करके प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राष्ट्रों से एक साथ आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एचएडीआर में क्षेत्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए जानकारी साझा करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समग्र विकास के लिए आपदा राहत तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

इस अभ्यास में आसियान देशों के प्रतिनिधि और नागरिक प्रशासन, सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (एनआरएससी) एवं भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) सहित आपदा प्रबंधन में शामिल विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और अन्य वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

(हि.स.)

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