अगले 25 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा : राजनाथ

  • भारत अपने बलबूते पर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम
  • ‘नए भारत’ का सपना साकार करने में हम किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं
  • दुनिया के बाजारों में मंदी की आशंका के बीच भारत की महंगाई काबू में

नई दिल्ली, 16 सितम्बर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा। सरकार ‘नए भारत’ के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, जिसे पूरा करने के लिए हम किसी देश पर निर्भर नहीं हैं। आज भारत अपने बलबूते पर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भविष्य के भारत की नींव ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मजबूती पर निर्भर है।

रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में यह बात चल पड़ी है कि दुनिया का ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ किसी एक देश में ही नहीं होना चाहिए। अभी तक ज्यादातर मैन्युफैक्चरिंग चीन में हो रही थी, मगर बदली हुई परिस्थितियों में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए नए ठिकाने ढूंढ रही हैं। रक्षा मंत्री ने अतीत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक समय था जब देश में महज 1900 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात होता था लेकिन आज यह निर्यात तेरह हजार करोड़ से भी पार कर चुका है। अब 2024-25 तक भारत के सिर्फ डिफेन्स सेक्टर में करीब 1.75 लाख करोड़ का कारोबार होने और कुल मिलकर कम से कम पांच बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य तय किया गया है।

राजनाथ सिंह ने 02 सितम्बर को प्रधानमंत्री के हाथों देश को सौंपे गए देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक आईएनएस विक्रांत का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाकर भारत चुनिन्दा देशों में शामिल हो गया है। इस जहाज में 76 फीसदी स्वदेशी उपकरण लगाये गए हैं। आज भारत मोबाइल फोन बनाने में दूसरे नम्बर पर है। अब तो एपल जैसी कंपनी भी भारत में फोन बना रही है। दो दिन पहले मैंने मीडिया में खबर देखी थी कि कुछ ‘चिप मेकिंग’ कंपनियां भारत में चिप बनाना चाहती हैं। अब जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अपने उत्पादन को विकेन्द्रीकृत करने के लिए नए विकल्प की तलाश कर रही है, तो भारत उस तलाश को न केवल पूरा करता है बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की भी क्षमता रखता है।

रक्षा मंत्री ने आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को गतिशील और प्रभावी बनाने का ही परिणाम है कि आज जब दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश रिकार्ड महंगाई की समस्या से जूझ रहे हैं, तो भारत की महंगाई दर बेकाबू नहीं होने पाई है। भारत जैसे विकासशील देश में महंगाई पर काबू रखने और आर्थिक सुधार करने का ही परिणाम है कि आज विदेशी निवेशक भारत की तरफ दौड़े-दौड़े चले आ रहे हैं। 2021-22 में 83 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया है। अभी केवल अगस्त महीने में 6 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश केवल भारत के स्टाक मार्केट्स में आया है।

दुनिया के बाजारों में मंदी की आशंका जोर पकड़ने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया की उम्मीदों का केन्द्र बना हुआ है। आज ब्रिटेन में 18 फीसदी के आस-पास महंगाई है। अमेरिका में यह महंगाई दर 9-10 फीसदी है। इन देशों की जनता ने दशकों से महंगाई के दर्शन नहीं किए थे जबकि भारत में महंगाई की दर अगस्त में 7 फीसदी रही है। पिछले दस वर्षों में दुनिया की ‘टॉप टेन’ अर्थव्यवस्थाओं में भारत की वापसी हुई है जब वह नौवीं पायदान पर आया है। आज 2022 में भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की ‘टॉप फ़ाइव’ इकोनॉमी में पांचवें पायदान पर है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आप यह कह सकते हैं कि भारत उस समय कमजोर था, गरीब था, इसलिए उसे विकास की राह पर रफ्तार पकड़ने में समय लगा। मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। यदि आजादी के समय से ही जिन लोगों के हाथ इस देश की सत्ता रही उन्होंने ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति पर काम किया होता तो भारत दशकों पहले ही एक विकसित देश की कतार में खड़ा होता। अब इस देश में एक वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में काम चल रहा है। आज इस तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर संभवत: चीन को छोड़ कर कहीं और नहीं है लेकिन आज वहां भी स्लो डाउन चल रहा है।

(हि.स.)

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