Infighting deepens for the post of BPCC President : बिहार प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर घमासान

Insight Online News / चंद्र बिन्दु

पटना: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी के लिए घमासान मचा है। स्थिति एक अनार बीमार जैसी बनी हुई है। पद पाने के होड़ में कई नेता अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में कैंप कर रहे है, वही दूसरी तरफ़ अन्य वरिष्ठ नेता पार्टी आलाकमान पर इस विषय पर बात करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

बताया जा रहा है कि प्रदेश इकाई में अध्यक्ष बदलने की कवायद तेज तब हुई जब बिहार में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के इंचार्ज भक्त चरण दास ने बिहार में विगत दिनों राज्यव्यापी किसान आंदोलन और कार्यकर्ता सम्मेलन पर आधारित रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंपने की तैयारी में लगे। वैसे, पार्टी कई अन्य प्रदेशों यथा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान आदि, जहाँ चुनाव होने हैं वहाँ अध्यक्ष बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

कुछ वरिष्ठ नेताओं की मानें तो दास ने औरंगाबाद ज़िले के कुटुंबा विधायक राजेश राम को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मंसा ज़ाहिर की है। उसके साथ ही प्रदेश कमिटी में से सात लोगों का नाम कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नामित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालाँकि राजेश राम के नाम पर पार्टी में हो रहे है विरोध के चलते पार्टी ने फ़िलहाल नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव को फ़िलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

बिहार प्रभारी दास का कहना है कि फ़िलहाल अध्यक्ष पद का चुनाव को रोक दिया गया है और निवर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा को पार्टी की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ कमिटीयों, यथा वर्किंग कमिटी, कोऑर्डिनेशन कमेटी और सलाहकार समिति, जिसमे युवा और वरिष्ठ नेताओं को जगह दिया जाएगा, प्रस्तावित है। कुमार आशीष, प्रवीण सिंह कुशवाहा, पूर्व रीगा विधायक अमित कुमार टुन्ना, पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह, महिला कांग्रेस की अध्यक्षा अमिता भूषण, अखिल भारतीय कॉंग्रेस के सचिव चंदन यादव और शाकिलुर रहमान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की बात चल रही है।

वैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता सह राज्य सभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, विधायक प्रेमचंद्र मिश्रा, प्रवीण कुशवाहा अशोक कुमार, किशोर कुमार झा, अमिता भूषण और निखिल कुमार ने भी प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए दावेदारी ठोक रखी है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ये लोग अपने समर्थकों के साथ राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिलेंगे।

विगत विधानसभा में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन के बाद निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने अपने इस्तीफ़े की पेशकश कर दी थी। २०१७ में अशोक चौधरी के हटने के बाद झा अध्यक्ष बनाए गए थे। राज्य स्तरीय दौरा के दौरान प्रभारी को कार्यकर्ताओं का विरोध का सामना करना पड़ा था। विधानसभा में टिकट बँटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष को ध्यान रखते हुए प्रभारी ने कहा था कि वे शीघ्र हीं प्रदेश कमेटी का पुनर्गठन करेंगे।

लोगों का मानना है कि कमज़ोर नेतृत्व, राज्य से पंचायत स्तर पर संगठन के पुनर्गठन में विलम्ब और कर्मठ तथा पुराने नेताओं को हाशिए पर रखने के कारण पार्टी कि स्थिति राज्य में ख़राब हुई है। राष्ट्रीय नेतृत्व की बिहार को लेकर ढुलमुल रवैया के चलते भी कई वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सहित, पार्टी छोड़ कर दूसरे दल में शामिल हो चुके है।

पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा का मानना है कि अखिल भारतीय कमिटी में राज्य का सही प्रतिनिधित्व भी कहीं ना कहीं से पार्टी को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार हैं। उनका मानना है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन में बिहार से प्रतिनिधित्व में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। फ़िलहाल प्रदेश से छह नेता ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में शामिल हैं, जिसमें से चार मुस्लिम और दो यादव हैं। और तो और, चार में से तीन मुस्लिम नेता कटिहार से आते हैं। राज्य में कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाला मिथिलांचल और भोजपुर क्षेत्र से राष्ट्रीय कमिटी में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

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