HindiNationalNewsPolitics

टैरिफ के असर को समझना अभी मुश्किल, कुछ भी कहना जल्दबाजी : शशि थरूर

नई दिल्ली । अमेरिका के 26 प्रतिशत टैरिफ को लेकर पूरी दुनिया में खलबली मची है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का दौर जारी है। इस टैरिफ को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि अभी बहुत सारे हिसाब-किताब बाकी हैं, इसलिए भारत के नुकसान को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 को भारत से आयात पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे भारतीय निर्यात पर असर पड़ सकता है।

शशि थरूर ने कहा कि अमेरिका का 26 प्रतिशत टैरिफ भारत के लिए शुरुआत में बुरी खबर लगती है, लेकिन इसका पूरा असर अभी समझना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि अगर भारतीय निर्यात पर यह टैरिफ लागू होता है, तो सामान महंगा हो सकता है और हमारी प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे प्रतिद्वंद्वी देशों पर भी ऐसा ही टैरिफ लगता है या नहीं। अगर उनकी कीमतें भी बढ़ती हैं, तो भारत और वे एक ही स्थिति में होंगे। ऐसे में भारत को खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन अमेरिकी उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पास अभी मौका है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान दोनों देशों को अक्टूबर 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार सौदे पर बातचीत का समय दिया गया था। यानी सात महीने बाकी हैं, जिसमें भारत इस टैरिफ को कम करने की कोशिश कर सकता है।

थरूर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन अभी भारत के पक्ष में है, जो करीब 45 अरब डॉलर का है। भारत नहीं चाहेगा कि यह संतुलन बिगड़े। इसके लिए भारत को भी अपने टैरिफ में कुछ छूट देनी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि अभी बहुत सारे हिसाब-किताब बाकी हैं, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत को कितना नुकसान होगा।

वक्फ बिल पर शशि थरूर ने कहा कि यह बिल हाल ही में लोकसभा में पास हुआ है, लेकिन इसे लेकर उनकी पार्टी कांग्रेस का रुख साफ है। उन्होंने बताया कि केरल में कई लोग इस बिल के पक्ष में थे और इसे लागू करने की मांग कर रहे थे। कुछ लोग इसे समर्थन भी दे रहे हैं।

थरूर के अनुसार इसमें कुछ खामियां हैं। उन्होंने कहा, “इसमें कई ऐसी बातें हैं, जो अल्पसंख्यकों को निशाना बनाती हैं, इसलिए कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। बिल में सुधार की जरूरत है और इसका कोई समाधान निकाला जाना चाहिए।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *