Jharkhand Assembly Madhupur by-election: झारखंड विधानसभा मधुपुर उपचुनाव

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मधुपुर विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के पूर्व ही झामुमो ने अपनी राजनीति विषात बिछानी शुरू कर दी है और इसी कड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव के पूर्व ही दिवंगत मंत्री रहे हाजी हुसैन अंसारी के पुत्र हफीजुल हसन को मंत्री पद सौंप कर इसके संकेत भी दे दिये हैं। इसे मुख्यमंत्री का मास्टर स्ट्रोक भी माना जा रहा है। संकेत साफ है कि हफीजुल हसन ही यूपीए गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार होंगे। हाल ही में हुये झारखंड विधानसभा के दो उपचुनावों में यूपीए को भारी सफलता मिली जिससे यूपीए की बांछे खिली हुई है और उनका मनोबल बहुत उंचा है।

अब रही मधुपुर विधानसभा में उपचुनाव की बात, तो स्थिति कुछ इस प्रकार बयान करती है। 2005 और 2014 में भाजपा के राजपलिवाल मधुपुर विधानसभा चुनाव में काबिज थे और वहीं 2009 और 2019 में जेएमएम के दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी का कब्जा रहा है। मधुपुर विधानसभा की सीट पर सदा मतों का ध्रुवीकरण रहा है और यदि सीधी लड़ाई होती है तो जेएमएम हमेशा नुकसान में रहती है। ऐसा पूर्व के चुनावी आंकड़े बोलते हैं।

2019 के चुनाव में मतों का ध्रुवीकरण नहीं हो पाया जहां जेमएमए के दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी 88115 मत प्राप्त कर विजयी घोषित हुये थे वहीं दूसरे स्थान पर भाजपा के राजपलिवाल को 65046 मत प्राप्त हुये थे तथा गंगा नारायण राय आजसू को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ था और उन्हें 45620 मत प्राप्त हुये थे। आज की परिस्थिति में आजसू पुनः एनडीए के घटक में शामिल हो गया है। 2019 के यदि आजसू और भाजपा के मतों को जोड़ा जाये तो वो लगभग 110666 हो जाते हैं जहां जेएमएम को 2019 के चुनाव में 88115 मत प्राप्त हुये थे अर्थात आजसू और भाजपा के मतों को जोड़ा जाये तो जेएमएम 22551 मतों से पीछे था।

दिलचस्प बात यह है कि तीसरे स्थान पर होने के बावजूद एनडीए में आजसू ने अपना दावा ठोक रखा है। इस उपचुनाव में सीट आजसू को मिले या फिर भाजपा को पर यदि एनडीए से कोई संयुक्त उम्मीदवार उतारा गया और एनडीए का आपसी तालमेल सही रहा अर्थात किसी भी भीतरघात की संभावना से परे रहा तो यूपीए के संयुक्त जेएमएम उम्मीदवार हफीजुल हसन के लिए मुकाबला बहुत कड़ा हो जायेगा।

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