Jharkhand Congress : देश पर जब भी किसी ने बुरी नजर डाली, किसान भाई-बहन सबसे आगे रहे हैंं : रामेश्वर

रांची, 07 अक्टूबर : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा कि देश पर जब भी किसी ने बुरी नजर डाली है, किसान भाई-बहन सबसे आगे रहे हैंं। ऐसे ही एक किसान आंदोलन की धरोहर को जिंदा करने का प्रयास है ये एपिसोड। उरांव बुधवार को राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की 16वीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि अफ्रीका से शुरु हुई महात्मा गांधी के सत्याग्रह की लौह चंपारण होते हुए खेड़ा पहुंच चुकी थी और इस मशाल को थामा लोह इरादों वाले सरदार बल्लभ भाई पटेल ने। 1917- 1918 में मुंबई प्रेसिडेंसी ने करों में 23 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी। उस समय गुजरात का खेड़ा डिवीजन सूखे, हैजे और प्लेग की चपेट में था। इसने किसानों की आजीविका को पूरी तरह खत्म कर दिया, लिहाजा किसानों की मांग थी कि वसूली से राहत मिले। यही मांग लेकर 11 मार्च 1918 को महात्मा गांधी और पटेल साहब नडियाद के कलक्टर से मिले लेकिन तानाशाह हुकूमत कहां सुनने वाली थी। इधर 22 मार्च को गांधी ने सत्याग्रह का आह्वान करते हुए किसानों से कहा कि अगर एक चौथाई से कम फसल होती है तो कर का भुगतान ना करें।

उधर सरदार पटेल ने गांव-गांव घूम घूम कर किसानों से प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर कराया कि वे खुद को झूठा कह लाने और स्वाभिमान को नष्ट कर टैक्स देने के बजाय अपनी भूमि को जब्त कराने के लिए तैयार हैं। सरकार किसानों के मवेशी तथा अन्य वस्तुएं जब्त करने लगी। अंग्रेजी सरकार खेड़ा के किसानों की हिम्मत तोड़ना चाह रही थी। लेकिन खेड़ा के किसान अपने सरदार की प्रतिज्ञा से कहां पीछे हटने वाले थे। गांधी ने किसानों से जब्त किए के खेतों से फसल काटकर लाने का आह्वान किया। किसानों को गिरफ्तार किया गया, मुकदमे दर्ज हुए, यातनाएं दी गई। लेकिन खेड़ा का किसान झुकने को तैयार नहीं था।

उरांव ने कहा कि महात्मा गांधी के मार्गदर्शन और सरदार पटेल साहब के नेतृत्व में खेड़ा सत्याग्रह ने अंग्रेजी हुकूमत की नींदें उड़ा दी। अंततः 27 जून को अंग्रेज हुकूमत ने घुटने टेक दिए और दो सालों के लिए न केवल वसूली स्थगित की गई बल्कि किसानों की जमीन भी लौटा दी। किसानों पर ब्रिटिश हुकूमत के उस वार में भी कांग्रेस अन्नदाता के साथ खड़ी थी। स्थितियां आज भी वैसी ही हैं। तानाशाही आज भी जारी है लेकिन किसान की एकता हर तानाशाही पर भारी है। यही देश की असली धरोहर है जिसको बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम, प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डॉ राजेश गुप्ता छोटू ने भी अपने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया।

एजेंसी

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