Jharkhand : चुनाव आयोग ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जल्द अपना मंतव्य करें सार्वजनिक: झामुमो

रांची,16 सितम्बर । झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्या ने कहा कि चुनाव आयोग को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अधिवक्ता की ओर से पत्र लिखकर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जल्द अपना मंतव्य सार्वजनिक करने को कहा गया है।

अधिवक्ता की ओर से भारत निर्वाचन आयोग को पत्र देकर यह कहा गया है कि जब 18 अगस्त को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में सुनवाई पूरी हो गयी तो उसके एक महीने बाद भी यह नहीं पता चला कि निर्वाचन आयोग का मंतव्य क्या है? भट्टाचार्य ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम लोगों को यह अंदेशा है कि जिस तरह गुरुवार को भाजपा की बैठक के बाद का बयान प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने दिया वह धमकी भरा है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल से मिलकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में राजनीतिक असमंजस की स्थिति दूर करने की मांग की थी। इससे पूर्व एक सितम्बर को यूपीए शिष्टमंडल से मुलाकात के बाद राज्यपाल ने भरोसा दिलाया था कि दो दिन में अपना फैसला सुना देंगे लेकिन 16 दिन बाद भी स्थिति ऐसी ही बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि अगर राजभवन से और न्यायाधिकरण से हमें संरक्षण नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? 22 साल बाद पिछड़ों को उचित आरक्षण मिला है। आदिवासियों मूलवासियों को पहचान मिली है। बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री रहते और सुदेश महतो के मंत्री रहते 2001 में पिछड़ों का आरक्षण 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया था। बाबूलाल मरांडी ने बिना लोगों को विश्वास में लिए राज्य में डोमिसाइल लागू किया और राज्य धधक गया था। वह भी भाजपा की साजिश थी। रघुवर दास के शासनकाल में आजसू के मंत्री रहते 1985 को स्थानीय नीति का आधार बनाया गया।

उन्होंने कहा कि भाजपा इस राज्य का मीरजाफर है और आजसू जयचंद है। उन्होंने ने कहा कि अब जब झारखंड अपने सभी संसाधन के साथ आगे बढ़ रहा है तो साजिश रची जा रही है। इसलिए झामुमो एक बार फिर मांग करता है कि राज्यपाल अपना मंतव्य जल्द चुनाव आयोग को भेजे और वहां से जो निर्णय आये उससे मुख्यमंत्री को अवगत कराएं ताकि हम लीगल सहायता ले सके।

हिन्दुस्थान समाचार

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