Jharkhand govt Update :झारखंड में सरकार गिराओ अभियान: कमजोर कड़ी कांग्रेस

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विशेष संवाददाता

हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड की बहुमत वाली यूपीए सरकार के अस्तित्व में आने के डेढ़ साल बाद इस महीने सामने आये प्रकरण में उसे अस्थिर करने की साजिश का राज पूरी तरह से बेपर्द होना बाकी है। जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं, उसमें कमजोर कड़ी कांग्रेस है। कांग्रेस पहली बार 16 विधानसभा सीटें जीत कर आयी है लेकिन उसमें झलक रही कमजोरी विधायकों की महत्वाकांक्षाएं दर्शाती है।

22-23 जुलाई की दरम्यानी रात पुलिस द्वारा राजधानी रांची के
होटल ली-लैक से तीन लोगों की गिरफ्तारी के साथ जो सियासी बम फूटा, उससे हर किसी की आंखें फटी रह गईं। बंदी बनाये गये तीनों लोग हालांकि बहुत ही लो प्रोफाइल के हैं लेकिन पुलिस ने ही कहा कि ये लोग राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए सत्ताधारी विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के टूल हैं। उनके पास से दो लाख रुपये नकद और तीन मोबाइल जब्त करने की बात पुलिस ने कही।

अब जो कहानी सामने आ रही है, उसमें महाराष्ट्र के दो भाजपा विधायकों चंद्रशेखर राव बावनकुले और चरण सिंह राज्य के कांग्रेसी विधायकों की कथित
खरीद-फरोख्त की साजिश के सूत्रधार थे। पुलिस ने जिन तीन लोगोें अभिषेक दुबे, निवारण महतो और अमित सिंह को गिरफ्तार किया है, वे सभी झारखंडी हैं। अभिषेक दुबे ने पुलिस को बयान दिया है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त कर विधानसभा के मानसून सत्र में वोटिंग के दौरान सरकार गिराने की तैयारी थी। उसने 15 जुलाई को इन तीनों के अलावा राज्य के तीन विधायक इंडिगो फ्लाइट से दिल्ली गये थे। वहां एक होटल में ये लोग रूके लेकिन लेन-देन पक्की न होने के कारण वापस लौट गये। उस दिन इंडिगो से बरकट्ठा के निर्दलीय विधायक अमित कुमार यादव, उनकी पत्नी सरिता देवी, बरही के कांग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला, उनका एक करीबी हर्षवर्धन और जामताड़ा के कांग्रेसी विधायक, जो प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं, इरफान अंसारी दिल्ली गये थे। जैसा कि बताया गया है, महाराष्ट्र के विधायक चंद्रशेखर राव के भांजे जयकुमार बलखेड़े उर्फ बालकुंडे ने इन विधायकों को दिल्ली एयरपोर्ट पर
रिसीव किया था। उसी के साथ ये लोग द्वारका स्थित होटल विवान्ता गये थे। इनको एक-एक करोड़ रुपये पेशगी देने की बात हुई थी।

इधर 21 जुलाई को महाराष्ट्र के विधायक चंद्रशेखर राव के भांजे जयकुमार और मोहित भारतीय के रांची के होटल ली-लैक में ठहरने की बात सामने आयी है।
इनके साथ ही आशुतोष ठक्कर, अमित कुमार यादव भी थे। मोहित को बड़ा बिजनेसमैन और भाजपा के कई नेताओं से संबंध होने की बात भी कही जा रही है।
यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने जब उस होटल में छापा मारा तो ये दोनों बिना चेकआउट किये निकल गये।

इस बीच कोलेबिरा के कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने यह कहकर बड़ा
ट्विस्ट ला दिया है कि काफी पहले अमित सिंह और कुछ लोगों ने उनको दल-बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये और मंत्री पद की आॅफर की थी लेकिन उन्होंने फटकार कर भगा दिया था। उनका कहना है कि उसी समय उन्होंने मुख्यमंत्री, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य सक्षम नेताओं को जानकारी दे दी थी। यह भी ठीक है कि प्रायः उसी समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, जो वित्त मंत्री भी हैं, ने सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची जाने की बात कही थी।

कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह ने 22 जुलाई को कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत की थी कि कुछ लोग हवाला के पैसे के जरिये
सत्ताधारी विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकार गिराने की साजिश कर रहे हैं।
ऐसे कई संदिग्ध लोग राजधानी के होटलों में डेरा डाले हुए हैं। उनको पकड़कर सच्चाई का पता लगााया जाय। संभवतः इसी आवेदन पर पुलिस सक्रिय हुई। अनूप ने सादे कागज पर यह  आवेदन दिया था।

एक ट्विस्ट और है। कहा यह भी जा रहा है कि निवारण महतो और अमित सिंह को 22 जुलाई को बोकारो से उठाया गया था लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी रांची के
होटल से बता रही है।

दूसरी ओर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और सांसद निशिकांत दुबे ट्वीटर हैंडल से और मीडिया से बातचीत में
इसे सरकार के अंदर का ही खेल बता रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा को बदनाम करने के लिए ऐसी कहानी रची जा रही है। होटल से गिरफ्तार तीन लोगों
के हवाले से दो लाख रुपये मिलने पर दीपक प्रकाश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि हमें मालूम ही न था कि कांग्रेसी विधायक इतने सस्ते हैं। ऐसी ही बात निशिकांत दुबे ने ट्विटर पर लिखी थी। बाबूलाल मरांडी ने 25 जुलाई को
प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह यूपीए का टूल बनने से बाज आये, नहीं तो दूसरी सरकार उस पर ही जांच बैठा
देगी। पुलिस उन तीनों को रिहा करे। इसका जवाब देते हुए झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बाबूलाल बिना जांच हुए बंदी बनाये गये लोगों को क्लिन चीट किस आधार पर दे रहे हैं? जिन विधायकों का इस पूरी कहानी में नाम आ रहा है, वे सफाई देते फिर रहे हैं कि उनको जानबूझकर फंसाया जा रहा है।

ट्विस्टों से भरी इस राजनीतिक कहानी में कुछ खास पता नहीं चलता। हां, कांग्रेस की कमजोरी जरूर झलकती है। विधायकों पर संगठन का दबाव नहीं लगता।
जहां तक सदन में संख्याबल का सवाल है, भाजपा को विगत राज्यसभा चुनाव में मिले 31मतों को भी उसके साथ मान लिया जाय तो उसे सरकार बनाने के लिए कम से कम अतिरिक्त 11 विधायकों की जरूरत होगी। …तो क्या कांग्रेस के चार मंत्रियों और किसी एक विधायक को छोड़कर बाकी सभी 11 विधायकों को तोड़ने की हिमाकत की जा रही है? यदि एक निर्दलीय अमित कुमार को भी जोड़ लिया जाय तो
कम से कम दस विधायकों को तोड़ना होगा। यह बहुत आसान नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस इतनी कमजोर हो गई है कि हर गुनाह उसके ही माथे थोपा
जाता है?

सियासी हलकों में यह बात भी चल रही है कि विक्षुब्धों पर नकेल कसने का यह एक तरीका है लेकिन जिन संज्ञेय धाराओं में तीन लोगों को गिरफ्तार किया
गया है, क्या वे भी इस तिलिस्म में शामिल हैं? … और सरकार ने पूरे
प्रकरण की तफ्तीश के लिए एसआइटी बनाकर चार एंगल पर जांच करने को रवाना किया है, वह क्या है? इस रहस्यमय कहानी का रोमांच तो बना हुआ है लेकिन

अंजाम पता चलना बाकी है। झारखंड में दूसरी बार बहुमत की सरकार बनी है, वह भी ऐसे लफड़ों में फंसी तो सरकार ही नहीं, राज्य का भी ईश्वर ही मालिक।

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