Jharkhand High Court : झारखंड हाई कोर्ट ने छठी जेपीएससी मामले में फैसला रखा सुरक्षित

रांची, 20 अक्टूबर। झारखंड हाई कोर्ट में छठी जेपीएससी मामले में दायर अपील याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी निगाहें झारखंड हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि एकल पीठ के फैसले से राज्य सरकार सहमत है। सफल अभ्यर्थियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के प्रशांत भूषण ने पक्ष रखा, जबकि जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपलवाल, शुभाशीष सोरेन और अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, सुमीत गड़ोदिया, अपराजिता भारद्वाज और कुमारी सुगंधा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। सुनवाई के लिए जारी कॉज लिस्ट में प्रार्थी शिशिर तिग्गा और अन्य की अपील याचिका को भी सूचीबद्ध किया गया था।

इस मामले में सिंगल बेंच में याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों द्वारा पूर्व में ही हाई कोर्ट के समक्ष कैविएट दायर की जा चुकी है। छठी जेपीएससी परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से छठी जेपीएससी मामले में एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई है। प्रार्थी शिशिर तिग्गा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका में हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को गलत बताते हुए उसे निरस्त करने की गुहार लगाई गई है।

याचिका में कहा गया है कि छठी जेपीएससी के मुख्य परीक्षा में पेपर वन (हिंदी व अंग्रेजी) का अंक कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सही है। इसी आधार पर जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी की थी। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। अभी तक राज्य सरकार व जेपीएससी की ओर से एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल नहीं की गई है। अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ,अर्पण मिश्रा और अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया प्रार्थियों के अधिवक्ता हैं।

उल्लेखनीय है कि झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा ली गयी छठी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाया था। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट रद्द करते हुए 326 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अवैध करार दे दिया था। इसके बाद इस परीक्षा में सफल और असफल हुए अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है।

(हि.स.)

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