Jharkhand : लोकमान्य तिलक के राष्ट्रवाद से प्रेरणा लेने की आवश्यकता : रामेश्वर उरांव

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह खाद्य आपूर्ति तथा वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का राष्ट्रवाद हमें बताता है कि हमेशा देश प्रथम होना चाहिए। स्वराज की जो लहर कांग्रेस ने शुरू की थी लोकमान्य तिलक उसके बहुत बड़े खेवईया बनकर उभरे यह देश की धरोहर है हम सबको इन्हें संजोना है।

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा रामेश्वर उराँव आज राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की ग्यारहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक एवं ट्विटर पर जारी पोस्ट को शेयर करने के उपरांत मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा की 1906 के कांग्रेस अधिवेशन से शुरू हुई स्वराज्य की लहर 1916 आते-आते पूरे देश में अपना प्रभाव जमा चुकी थी। 1916 के होमरूल लीग आंदोलन से इस लहर के नए प्रणेता बनकर उभरे भारतीय राष्ट्रवाद के पुरोद्धा कांग्रेस नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक। राष्ट्रवाद की ऐसी खनकती, दमकती आवाज जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की आंख में आंख डालकर कहा स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा। 1916 में एक तरफ लोकमान्य तिलक जी ने होम रूल की स्थापना की वहीं दूसरी तरफ एनी बेसेंट ने 1916 का यह साल भारतीय इतिहास में होमरूल यानी स्थानीय नागरिकों की शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में याद किया जाता है। इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को आक्रामक बना दिया होमरूल आंदोलन अपने स्वभाव में भले ही आक्रमक था लेकिन इसमें हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं थी। लोकमान्य तिलक के आंदोलन का भी मूल आधार अहिंसा ही था, उन्होंने टुकड़ियाँ बनाकर देश भर में होमरूल का प्रचार प्रसार किया और जनता को सुशासन का मतलब समझाया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने विस्तारपूर्वक बताते हुए कहा लोकमान तिलक जी के उन दिनों बढ़ते प्रभाव से अंग्रेज भयभीत हो रहे थे। चूँकि होमरूल लीग का भी उद्देश्य कांग्रेस की तरह स्वराज्य प्राप्ति था, इसलिए होमरूल लीग का कांग्रेस में विलय हो गया और दोनों एक ही रास्ते से आजादी की मंजिल की ओर निकल पड़े। इसी के साथ भारतीय उपमहाद्वीप में कांग्रेस की ताकत और प्रभाव दोनों बढ़ते जा रहे थे। विलय से पहले गांधीजी इंडियन होम रूल लीग के अध्यक्ष रह चुके थे । होम रूल आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत को साफ संकेत दे दिया कि अगर लोगों ने एक साथ आने का फैसला कर लिया तो वह कुछ भी हासिल कर सकते हैं। आज भी हमें लोकमान्य तिलक   के राष्ट्रवाद से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है जहां राष्ट्र ही सर्वप्रथम हो, जहां देश के लोगों की उन्नति, खुशहाली और भाईचारा ही सबकुछ हो। कांग्रेस इसी  राष्ट्रवाद की ध्वज वाहक बन कर उभरी जहां से आजादी का सपना साकार हो सका।

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