Jhakrhand News Update : झारखंड सरकार में 5.25 लाख सृजित पदों में से 3.29 लाख रिक्त

रांची: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में 5.25 लाख सृजित पदों में से 3.29 लाख पद रिक्त हैं। योजना सह वित्त विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभिन्न विभागों में 525115 पद सृजित है, जिसमें से मात्र 195255 पद भरे है, शेष 329860 पद रिक्त पड़े है, जिसके कारण कार्य क्षमता भी बुरी तरह से प्रभावित है और एक-एक अधिकारी-कर्मचारी पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता विधि व्यवस्था को दुरुस्त करना होता है, लेकिन राज्य में गृह , कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में ही 151407 स्वीकृत पदों में से 73938 पद रिक्त है। उसी तरह से शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल है, लेकिन इन विभागों में भी  बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े है।
स्कूली शिक्षा विभाग में 150577 सृजित पदों में से 104096 पद रिक्त है, उसी तरह से कृषि विभाग में करीब 3500 पद रिक्त है, वहीं स्वास्थ्य विभाग में 45525 में से 35322 पद, विधि विभाग में 8905 में से 4036 पद रिक्त है। पेयजल स्वच्छता विभाग में 5516 सृजित पद में से 3464, पथ निर्माण में 3793 में से 1729, ग्रामीण विकास में 10374 में से 7341, जल संसाधन विभाग में 10803 में से 5119,  पंचायती राज में 9729 में से 6696 पद रिक्त है।

महिला बाल विकास विभाग में 5021 में से 2762 और एनआरईपी में  4407 में से 2765 पद रिक्त पड़े है। सबसे बड़ी बात है कि जहां से लोगों को  न्याय की उम्मीद होती है, उस हाईकोर्ट प्रशासन में भी सृजित  1541 में से  सिर्फ 923 बल कार्यरत है।
सूचना जनसंपर्क विभाग में  961 में से 117, श्रम विभाग में 4313 में से 1001, उद्योग विभाग में 2078  में से 431, उच्च शिक्षा में 48 में से 15, वन विभाग में 7548 में से 3596,  खाद्य आपूर्ति में 1311 में से 498, वाणिज्य कर में 1100 में से 386,  योजना सह वित्त विभाग में 1250 में से 300, उत्पाद विभाग में 1365 में से  384, ऊर्जा विभाग में 254 में से 154, निगरानी में 762 में से 366, भवन में  1748 में से 724,,  कार्मिक में 588 में से 302, विधानसभा में 1282 में से  941, एसटी,एससी,ओबीसी विभाग में 63 में से दो, खान भूतत्व में से 956 में  से 318 , राजस्व निबंधन में 11442 सृजित में से 6739 पद ही कार्यरत है।
इस तरह से लगभग सभी विभागों में सृजित पद के विरूद्ध आधे से भी कम बल  कार्यरत रहने के कारण वहां काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों पर काम का  अतिरिक्त बोझ है, जिसके कारण कई विकास योजनाओं के प्रभावित होने के साथ ही  राजस्व संग्रहण का काम भी प्रभावित हो रहा है।

वार्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *