Jharkhand : दलित विरोधी है हेमंत सरकार, दोषियों का कर रही संरक्षण – अमर बाउरी

रांची, 20 सितम्बर ।  भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक अमर कुमार बाउरी ने कहा कि राज्य में हो रहे भूख से मौत और दलितों के ऊपर हो रहे अत्याचार मामला काफी गंभीर है। बाउरी रविवार को  पार्टी के प्रदेश कार्यालय में  संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं, जो मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। 6 मार्च को बोकारो जिला के कसमार में भूखल घासी की मौत भूख के कारण हो जाती है। इसका प्रमाण अखबारों और मीडिया में आई खबरों से मिलता है। मामले को लेकर उस वक्त चल रहे विधानसभा सत्र में भी मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकृष्ट करवाया गया था। बावजूद इसके अधिकारियों का दबाव लगातार भूखल घासी के परिजनों पर बनाया जा रहा था। उन्हें कहा जा रहा था कि वे अखबारों और मीडिया में कहे कि भूखल घासी की मौत का कारण बीमारी है।

 बाउरी ने कहा कि इसके ठीक दो महीने के बाद भूखल घासी के बेटे की मौत बीमारी के दौरान हो जाती है और फिर अगस्त महीने में उसकी बेटी की भी मौत भी हो जाती है। तीन मौतों के बाद भूखल घासी के परिवार को तीन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। अब स्थिति यह है कि बाकी के बचे परिवार को डर है कि अगर उनके साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना होती है तो सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी। 

 बाउरी ने कहा कि  विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और सरकार को इस बात का डर है कि कहीं भूखल घासी का मामला विधानसभा में फिर से ना आ जाये इसलिए भूखल घासी के परिवार को बोकारो परिसदन में अतिथि के तौर पर रखा गया है। अब यह तो सरकार ही जाने कि उन्हें बतौर अतिथि रखा गया है या फिर उन्हें हाईजैक करके सरकारी संरक्षण में रखा गया है। 

 उन्होंने एससी एसटी एक्ट मामले में दर्ज केस के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि दुमका में रंजीत तुरी ने एससी एसटी एक्ट में केस दर्ज किया। जिसे दबाने के लिए राज्य के मुखिया के भाई जिला के अधिकारियों पर दबाव बनाते नजर आए। और कोई करवाई नही होने दिया। वहीं झरिया की लीलू बाउरी ने जब एक अधिकारी पर गाली गलौज का मामला एससी एसटी एक्ट में दर्ज करवाया तो उसके बाद भी उसके इस केस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए कोरोना के दौरान सड़क हादसे में 9 मजदूरों की मौत का मामला भी मीडिया के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड के इस हादसे में मरने वाले 11 मजदूरों में 9 मजदूर दलित थे, जिन्हें उत्तर प्रदेश की सरकार ने उनका शव आने के दो दिन के बाद ही उनके खाते में 200000 की मुआवजा राशि भेज दी। लेकिन राज्य सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बाद भी करीब 5 महीने तक मुआवजे की राशि पीड़ित परिवारों को नहीं मिला।

( हि.स.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *