Kali Mandir : 202 साल पुरानी है भवानीपुर काली मंदिर का इतिहास, मुरादें पूरी होने पर लोग चढ़ाते हैं सोने के आभूषण

भागलपुर, 12 नवम्बर । पुलिस जिला नवगछिया के भवानीपुर काली मंदिर का इतिहास करीब दो सौ दो वर्ष पुराना है। मंदिर के पंडित प्रभात झा बताते हैं कि सच्चे मन से जो भक्त मैया से कुछ मांगते हैं, मैया उनकी मुरादे अवश्य पूरी करती हैं। इस कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सोनरा बहियार में परिवार के बच्चों ने खेल-खेल में पहले मिट्टी से मां काली की प्रतिमा बना दी।

इसके बाद बच्चों ने किसी का पाठा पकड़ लाया और काली माता का जयकारा लगाते हुए उस पाठा के गर्दन पर कुश चला दिया। देखते ही देखते उस पाठा की गर्दन कट गई। यह देख बच्चे घबरा गये और भागते हुए अपने घर पहुंचे। वहां सभी को घटना के बारे में बताया। बुजुर्गों के कहने पर बच्चों ने मां काली की प्रतिमा को गंगा में विसर्जित कर दिया। उसी रात बालमुकुंद पोद्दार के पिता को मां काली ने स्वप्न में दर्शन दिया और कहा कि मेरी प्रतिमा गंगाजल से निकालकर मंदिर में स्थापित करो और मुझे पाठा का बलि चढ़ाओ। तब बालमुकुंद पोद्दार ने ग्रामीणों की मदद से गंगा से मां काली की मूर्ति निकालकर भवानीपुर में स्थापित किया। तब से बालमुकुंद परिवार के वंशज द्वारा मूर्ति पूजा प्रारंभ हुई।

जब वे लोग पूजा की पूरी व्यवस्था करने में अक्षम होने लगे तो ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक मंदिर का निर्माण करा कर माता को स्थापित किया गया। प्रतिमा स्थापित होने के बाद आज भी बालमुकुंद पोद्दार के वंशज भूसी पोद्दार के घर से नैन व बलि देने की प्रथम पद्धति प्रथा चली आ रही है।

श्रद्धालुओं की मुरादे पूरी होने पर ग्रामीणों एवं बाहर से आए श्रद्धालुओं द्वारा पाठा की बलि और लगभग पांच से सात भैंसों की भी बलि दी जाती है।

मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से मां काली का सुमिरन कर मुराद मांगते हैं और जब उनकी मुरादें पूरी हो जाती है तो श्रद्धालु सोने व चांदी की बिंदी पाठा, झांप, नथ-टीका, मुंडमाला, पायल आदि चढ़ावा चढ़ाते हैं।
नवम्बर 14 की मध्य रात्रि मां काली की प्रतिमा स्थापित होगी। दो दिवसीय मेले का आयोजन 15 एवं 16 नवम्बर को होगा। 16 नवम्बर की संध्या 5 बजे बनारस एवं काशी से आए हुए प्रकांड विद्वानों द्वारा महाआरती का भी आयोजन होगा। 15 एवं 16 नवम्बर की रात्रि 8 बजे से देवी जागरण का आयोजन होगा।

दंगल कमेटी की ओर से 15 एवं 16 नवम्बर को दोपहर के 01 बजे से महादंगल प्रतियोगिता का आयोजन होगा। जिसमें दूरदराज से आए हुए पहलवान अपने बाजुओं की अजमाइश करते नजर आएंगे। वहीं प्रतिमा विसर्जन 16 नवंबर की रात्रि 09 बजे होगी। पूजा समिति के सदस्यों में से मंदिर व्यवस्थापक प्रशांत कुमार उर्फ पिंटू यादव, राम पोद्दार, पंडित प्रभात झा, मंदिर के पुजारी अमित झा सहित कई सदस्य सक्रिय योगदान करते नजर आ रहे हैं।

(हि.स.)

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