Kashi Vishwanath Corridor Inauguration : पीएम मोदी ने किया ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ का लोकार्पण, कहा- यहां सिर्फ डमरू वाले की सरकार

वाराणसी/नई दिल्ली, 13 दिसंबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि विश्वनाथ धाम का नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, बल्कि यह हमारे भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक आत्मा और भारत की प्राचीनता, परम्पराओं एवं भारत की ऊर्जा व गतिशीलता का प्रतीक है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से करते हुये कहा कि श्री काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन हम सभी के लिये खास दिन है। उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं, जो इस घटना के साक्षी बन रहे हैं। पहले यहां मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वह अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है।

पीएम मोदी ने कहा, काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ-साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूं। देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूं। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो तो उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूं।

आगे उन्होंने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहां आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है।

मोदी ने कहा कि विश्वनाथ धाम का यह पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, बल्कि यह प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! यह प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! यह प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आप यहां जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहां अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएं भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

(हि.स.)

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